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  • शीर्ष न्यायालय ने कहा कि हमें बताया गया कि नोटिस, समन आदि के लिए पोस्ट ऑफिस जाना संभव नहीं है
  • इन्हें वॉट्सऐप, ई-मेल, फोन और इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप के जरिए भी भेजा जा सकता है

दैनिक भास्कर

Jul 10, 2020, 11:35 PM IST

नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण के बीच अब कोर्ट के नोटिस और समन वॉट्सऐप, ई-मेल, फॉ और इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप के जरिए प्रेषित करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इसकी इजाजत दे दी है। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि हमारा ध्यान में लाया गया कि नोटिस, समन आदि के लिए पोस्ट ऑफिस जाना संभव नहीं है। इन्हें वॉट्सऐप, ई-मेल, फोन और इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप के जरिए भी भेजा जा सकता है।

जस्टिस एएस बोपन्ना और आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने कहा कि दो ब्लू टिक का मतलब ये मान लिया जाएगा कि रिसीवर ने नोटिस देख लिया है। ये आदेश को विभाजित -19 की वजह से हाईकोर्ट और ट्रिब्यूनल कोर्ट में याचिका दायर करने की समय-सीमा बढ़ाए जाने के मामले की सुनवाई के दौरान आए।

चीफ जस्टिस ने नई तककि की तरफदारी की थी
मई में सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों को कोर्ट के समय के बाद भी ई-फाइलिंग की अनुमति दी थी। नई तककि की जरूरत को बताते हुए मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने तब कहा था कि हमें वर्तमान स्थित को समझना होगा कि आपसी एकता को बदलना होगा। हमें नई और पुरानी व्यवस्थाओं में सामंजस्य बनाना होगा।

… तो अयोध्या मामले के फैसले में देरी नहीं होती
चीफ जस्टिस ने ये भी कहा था कि आने वाले समय में महत्वपूर्ण मामलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का रोल काफी महत्वपूर्ण हो सकता है। अगर एआई का उपयोग किया जाता है, तो अयोध्या मामले का फैसला बिना देरी के किया जा सकता था।

मई में कोर्ट में सुनवाई फिर से शुरू हुई
सुप्रीम कोर्ट के जज लॉकडाउन के दौरान अपने घरों से ही वाडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई कर रहे थे। मई से कोर्ट रूम में दोबारा सुनवाई शुरू हुई।





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