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पेंसिलवेनिया में रैली के दौरान ट्रम्प। वे 150 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी की जांच का सामना कर रहे हैं।

  • पहली बार अमेरिका में किसी भी राष्ट्रपति प्रशासन को लोकतंत्र के लिए खतरा माना जा रहा है
  • राष्ट्रपति ट्रम्प वोटों में धांधली होने की बात करके लोकतांत्रिक मूल्यों को तोड़ने वाले हैं

पहली बार अमेरिकी चुनावों में ‘कमजोर लोकतंत्र’ का मुद्दा बन गया है। कारण यह है कि राष्ट्रपति ट्रम्प वोटों में धांधली होने की बात करके लोकतांत्रिक मूल्यों को तोड़ने वाले हैं। वे कोरोना के दौर में संसद से पारित ओबामा कैर को एग्जिक्यूटिव नंबर से बदलना चाहते हैं।

निगेटिव रिपोर्ट आई बिना ट्रम्प मीटिंग कर रहे हैं। राष्ट्रपति उम्मीदवार ट्रम्प 150 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी की जांच का सामना कर रहे हैं। ये गैरजिम्मेदाराना रवैयाये की वजह से ट्रम्प का विरोध उनकी पार्टी में शुरू हो गया है। पार्टी के लोगों का कहना है कि कॉन्स्टरों ने ऐसी कमजोर लोकतंत्र की कल्पना कभी नहीं की थी।

2 गोल, दो शंकाओं को ध्यान में रखते हुए कॉन बना

पहला लक्ष्य: ऐसा संघीय मत बनाना जो अमेरिकी सीमाओं की रक्षा कर सके। सभी राज्य समान अवसर के साथ प्रगति करें। इसको सुनिश्चित करने के लिए एक करेंसी (मुद्रा) को लागू करने का फैसला लिया गया।

दूसरा लक्ष्य: राज्यों को ऑटोनॉमी मिले। ताकि लोग अपनी संस्कृति को जी सकें। इसलिए राज्यों को सिविल और क्रिमिनल कानून बनाने की आजादी मिली। इस तरह संघीय ढांचे में राज्य सरकारें काफी प्रतिस्पर्धी हैं।

पहला डर: यूरोपीय देशों की तरह राजाओं की तानाशाही अमेरिका में न आ जाए। सरकार व्यक्तिगत हित के लिए न बने। व्यक्तिगत लाभ के लिए जनता का शोषण न किया जाए।

दूसरा डर: लोकतंत्र भीड़ तंत्र में न बदल जाता है। उनका मानना ​​था कि ज्यादातर लोग घर, परिवार और रोजगार के आगे नहीं सोचते हैं। ऐसे में वे भ्रमित कर रहे हैं कोई भी सरकार बना सकती है। इसलिए वे तानाशाही और संपूर्ण डेमोक्रेसी से डरे हुए थे।

इन स्थितियों से बचाव के लिए पर सेपरेशन ऑफ पावर्स और चेक्स एंड बुलेंस की व्यवस्था की थी

1787 में कांस्टरों ने भीड़ तंत्र और तानाशाही जैसी स्थिति से बचने के लिए संविधान में सेपरेशन ऑफ पावर (ताकत का अलगाववाद) और चेक्स और बैलेंस (नियंत्रण और संतुलन) को जगह दी। सरकारी शक्ति विधायिका, पूर्वाजी और न्याय तंत्र में बांट दी गई। इसलिए राष्ट्रपति के पास जनता द्वारा चुने जाने की बजाए जनता के नुमाइंदे इलेक्टोरेट कॉलेज से नए जाने लगे।

राष्ट्रपति सीनेट की मंजूरी के बिना कुछ नहीं कर सकते

राष्ट्रपति अमेरिका कांडरर इन शेफ होता है। बिना सीनेट की मंजूरी के न तो आक्रमण कर सकता है और न ही किसी देश से संधि। कांग्रेस का बनाया कानून सुप्रीम कोर्ट को न्याय संगत नहीं लगता है तो वह उसे खारिज कर सकती है। यह नियंत्रण और शक्ति संतुलन की व्यवस्था है। 1791 में बिल ऑफ राइट्स के जरिए नागरिकों के अधिकार सुरक्षित किए गए। संविधान में जिन शक्तियों का उल्लेख नहीं है, वे राज्य सरकारों या नागरिकों को दी गई हैं।





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By GAUTAM

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