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राजस्थान में जारी सियासी उठापटक के बीच आज बागी विधायकों को जारी अयोग्यता नोटिस पर राजस्थान हाई कोर्ट में सुनवाई शुनवाई शुरू हो गई है। गौरतलब है कि पिछले हफ्ते पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बागी तेवर अपनाने के बाद कांग्रेस ने विधायक दल की बैठक बुलाई थी। बैठक में शामिल न होने पर पायलट गुट के विधायकों पर व्हिप उल्लंघन करने को लेकर कार्रवाई हुई। राज्य विधानसभा अध्यक्ष ने बैठक में अनुपस्थित पायलट समेत 19 विधायकों को सदस्यता खत्म करने को लेकर नोटिस जारी किया था। इसके खिलाफ बागी विधायक हाई कोर्ट चले गए। समाचार एजेंसी पीटीआइ के अनुसार मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महंती और न्यायमूर्ति प्रकाश गुप्ता कर रहे हैं। सुनवाई शुरू होने के बाद स्पीकर का प्रतिनिधित्व कर रहे अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें देना शुरू की।

इसी बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सचिन पायलट को पटखनी देने के लिए अगले कुछ दिनों में विधानसभा सत्र बुलाने की तैयारी में हैं। इसी कड़ी में उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी से बातचीत की है। सत्र बुलाकर वह अपना बहुमत साबित करेंगे। शनिवार रात को राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात कर गहलोत ने उन्हें 102 विधायकों की सूची सौंपी थी। इस दौरान उन्होंने बहुमत होने का दावा भी किया था। इसके बाद रविवार को राज्यपाल ने अपने स्तर पर कानून के जानकारों से परामर्श किया।
देर रात तावड़ू के रिजॉर्ट पहुंची एसओजी की टीम

राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की टीम ने देर रात हरियाणा में तावड़ू के बेस्ट वेस्टर्न कंट्री क्लब में दस्तक दी।इसका मुख्य दरवाजा अंदर से बंद था। करीब 20 मिनट तक टीम गेट के बाहर खड़ी रही, लेकिन गेट नहीं खुला और टीम अंदर नहीं सकी। इसके कुछ देर बाद एसओजी की टीम वहां से निकल गई। होटल और रिजॉर्ट के आसपास पुलिस और खुफिया सक्रिय रहा।
इन विधायकों को नोटिस

सचिन पायलट के अलावा सदस्यता रद करने को लेकर विश्वेंद्र सिंह, रमेश मीणा, भंवरलाल शर्मा, , गजेंद्र सिंह शक्तावत, हेमाराम चौधरी, दीपेंद्र सिंह शेखावत, रामनिवास गावड़िया, इंद्रराज गुर्जर, मुरारीलाल मीणा, गजराज खटाणा, पीआर मीणा, राकेश पारीक, वेद प्रकाश सोलंकी, सुरेश मोदी, मुकेश भाकर, हरीश मीणा, बृजेंद्र ओला व अमर सिंह शामिल हैं।

विधायकों की सदस्ता जाने से विधानसभा का समीकरण बदलेगा
पायलट समेत 19 विधायकों की अगर सदन की सदस्यता खत्म होती है, तो विधानसभा में समीकरण बदल जाएंगे। इसके बाद 200 सदस्यों वाली सदन में 181 सदस्य रह जाएंगे और बहुमत का आंकड़ा 92 होगा। फिलहाल कांग्रेस के पास 107 विधायक हैं।19 विधायकों की सदस्यता खत्म होने पर ये संख्या 88 हो जाएगी। उसे चार अन्य सदस्यों समर्थन की जरूरत होगी।



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