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  • सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धेय गठन का नया फॉर्मूला लेकर भोपाल आएंगे
  • फाॅर्मूले के तहत नए चेहरों को शामिल किया जाएगा, वरिष्ठ विधायकों को भी एडजस्ट किया जा सकता है

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 02:27 PM IST

भोपाल। मध्य प्रदेश में शिवराज की मिनी भंडारण बनने के 71 दिन बाद गुरुवार यानी 2 जुलाई कोड़िया का पहला विस्तार होने जा रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को इस बारे में जानकारी दी। पिछली बार 5 बिट्स मिनी कैलकुलेटर ने 21 अप्रैल को शाप ली थी। इस बार भाजपा नए चेहरों और वरिष्ठ विधायकों कोडिया में एडजस्ट करने को लेकर भ्रम में है।

नई क्रेन में कलाकारों के नामों को लेकर आ रही खींचतान की खबरों पर बुधवार को मीडिया ने शिवराज से सवाल किया। इस पर उन्होंने कहा, उन्होंने भी जब भी मंथन होता है, अमृत निकलता है। शरण तो बंट जाता है, लेकिन विष शिव पी जाते हैं। ’’ कहा जा रहा है कि शिवराज कैलकुलेटर में कुछ वरिष्ठ विधायकों को लेना चाहते हैं, जो उनकी पिछली सरकारों में भी मंत्री रहे हैं, लेकिन पार्टी संगठन नए चेहरों को मौका देना चाहते हैं। है।

आनंदीबेन आज शपथ लेंगी, कल विस्तार
उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल आज मध्य प्रदेश के प्रभारी राज्यपाल के तौर पर शपथ लेंगी। इसके बाद कल नए मंत्रियों का शपथ समारोह होगा।

भाजपा के उत्तर प्रदेश प्रभारी बनने के नए फॉर्मूला के बारे में भोपाल आएंगे
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धेon मेंडिया गठन का एक नया फाॅर्मूला बारे में भोपाल आ रहे हैं। इस फाॅर्मूले के तहत काल में नए चेहरों को शामिल करने के साथ वरिष्ठ विधायकों को भी एडजस्ट किया जाएगा। सहस्त्रबुद्धे वरिष्ठ विधायकों को वन-टू-वन चर्चा करने के लिए पार्टी कार्यालय बुलाया जा सकता है। इसके बाद भी कोई सहमति नहीं बनती है, इसलिए मुख्यमंत्री एक बार फिर रात को दिल्ली जा सकते हैं।

उप-मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष ने फांका
भाजपा सूत्रों का कहना है कि गांधी के साथ-साथ विधानसभा अध्यक्ष और उप-मुख्यमंत्री पद का मुद्दा भी सुलझा नहीं है। शिवराज सिंह पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव को विधानसभा अध्यक्ष बनवाना चाहते हैं, लेकिन सहमति नहीं बन पा रही है। अगर भार्गव को मंत्री बनाया गया तो सीतासरन शर्मा को फिर से विधानसभा अध्यक्ष बनाया जा सकता है।

दो उप-मुख्यों पर भी असमंजस
दो उप-मुख्यमंत्री बनाए जाने को लेकर भी अब तक सत्ता और संगठन के बीच तालमेल नहीं बैठ पाया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि हाईकमान ने सिंधिया खेम से काउंटर मंत्री तुलसी सिलावट और गृह मंत्री डॉ। नरोत्तम मिश्रा को उप-मुख्यमंत्री बनाने का विकल्प प्रदेश नेतृत्व को दिया गया है, लेकिन इस पर भी सहमति नहीं बन पाई।

सिंधिया एक भी स्थिति छोड़ने के मूड में नहीं
पार्टी सूत्रों का कहना है कि सिंधिया ने अपने समर्थकों को मंत्री बनाए जाने के लिए जितने पद मांगे थे, उसमें से वे भी पद कम करने के पक्ष में नहीं हैं। कांग्रेस से भाजपा में आए बिसाहूलाल सिंह, एंदल सिंह कंसाना, हरदीप डंग और रणवीर जाटव को भी पार्टी मंत्री बनाने का भरोसा दे चुके है। ऐसा ही निर्दलीय प्रदीप जायसवाल और बसपा के संजीव कुशवाह के साथ भी किया गया है। लिहाजा, क्रेन का आकार और बढ़ सकता है। देर शाम को मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री के बीच पार्टी दफ्तर में इस मुद्दे पर लगभग एक घंटे तक बात हुई है।

मार्च में सियासी उलटफेर, भाजपा की सरकार के 100 दिन पूरे
राज्य में मार्च महीने में बड़ा सियासी उलटफेर हुआ। वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा में आ गए। उनके समर्थन में 22 विधायकों ने भी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ को 20 मार्च को पद से इस्तीफा देना पड़ा। 23 मार्च को शिवराज ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। 21 अप्रैल को 5 मंत्रियों को शपथ दिलाकर मुख्यमंत्री ने कालिया का गठन किया। इन 5 में से 2 मंत्री सिंधिया खेमे से हैं।





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