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अमेरिकी लेखक और वायंगकर मार्क ट्वेन का बहुत प्रसिद्ध कोट है, ‘एक झूठ दुनिया भर में घूम सकता है और फिर से वापस आ सकता है जबकि सच्चाई अपने बूटों की जगह ले रही है’ यानि झूठ की रफ्तार बहुत तेज होती है और जब तक सच में अपने जूते पहनना होता है। तब तक झूठ मध्य दुनिया का भ्रमण कर चुका होता है। वर्तमान में वेब और सोशल मीडिया की दुनिया पर भी यहीं लागू होता है। ये प्लेटफॉर्म पर सच चलने लगता है और झूठ पंख लगाकर उड़ जाता है। वास्तव में एक प्रतिष्ठित पत्र है इंडियन एक्सप्रेस जिसने अपनी रिपोर्ट में यह दिखाया कि कोशिश की है कि दिल्ली पुलिस पवित्र ढंग से काम नहीं कर रही है। दिल्ली पुलिस के विशेष कमिश्नर ने दिल्ली दंगा मामले की जांच कर रहे अधिकारियों को आदेश दिया कि हिंदू हिंदू युवाओं की गिरफ्तारी न करें, ऐसा करने से हिंदू हिंदू समुदाय में रोश फैल सकता है। इस रिपोर्ट के बारे में विस्तार से आगे बताएंगे। पहले इस रिपोर्ट के जवाब में दिल्ली पुलिस और पीआईबी ने क्या प्रतिक्रिया दी है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि इस खबर से सनसनी फैलाने की कोशिश की गई है। सूचना पत्र कार्यालय (पीआईबी फैक्टचेक ने भी इस रिपोर्ट के दावे को भ्रामक और आदेश की भावना के विपरीत बताया है।

क्या था पेपर की रिपोर्ट

इंडियन एक्सप्रेस ने 16 जुलाई को एक रिपोर्ट की जिसमें कहा गया कि दिल्ली पुलिस के विशेष कमिशनर ने दिल्ली दंगा मामले की जांच कर रहे अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि ऐहतियातन हिंदू हिंदू युवाओं की गिरफ्तारी न करें। ऐसा करने से हिन्दू समुदाय में रोश फैल सकता है। आदेश में कहा गया है कि गिरफ्तार करते समय पूरी सावधानी बरती जाए और सुरक्षा मानकों का पूरा पालन किया जाए। दिल्ली पुलिस के विशेष पुलिस आयुक्त (अपराध) ने जांच टीमों की अगुवाई कर रहे वरिष्ठ अधिकारियों को एक आदेश देते हुए ऐसा लिखा है और उन्हें जांच अधिकारियों का “उपयुक्त” मार्गदर्शन करने के लिए कहा है। विशेष सीपी के आदेश में कहा गया है, “किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करते समय उचित देखभाल और सावधानी बरती जाए। प्रत्यक्ष और तकनीकी साक्ष्यों सहित सभी सबूतों का ठीक से विश्लेषण किया गया और यह सुनिश्चित किया गया कि सभी गिरफ्तारियों को पर्याप्त सबूतों द्वारा देखा जाए।)
गौरतलब है कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि इस तरह की प्रवृत्तियों का खंडन हुआ हो। इसके पहले भी इंडियन एक्सप्रेस की कई खबरों को निराधार बता चुकी है दिल्ली पुलिस और पी.आई.बी.

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मौलाना साद का वीडियो एपिसोड
इंडियन एक्सप्रेस ने 9 अप्रैल को प्रकाशित समाचार में दावा किया कि दिल्ली पुलिस को ऐसा लगता है कि मौलाना साद के वायरल वीडियो छेड़छाड़ किया गया है, जिसमें वह जमाकर्ताओं को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करने को कह रही है। दिल्ली पुलिस ने इंडियन एक्सप्रेस की खबर का खंडन किया है जिसमें यह दावा किया गया है कि दिल्ली पुलिस को लगता है कि तबलीगी जमात के मुखिया साद के वीडियो के साथ छेड़छाड़ किया गया है।

गुजरात के अस्पताल में हिंदुओं-मुसलमानों को अलग वार्ड में रखा जाता है

इंडियन एक्सप्रेस ने मेडिकल सुप्रीटेन्डेंट डॉ के हवाले से दावा किया था कि गुजरात के अहमदाबाद में अस्पताल में कोरोना के मरीजों को धर्म के आधार पर वार्ड में रखा गया है। खबर की थी जिसमें एक इसी तरह हमारे यहां पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग वार्ड होते हैं, लेकिन यहां हिंदू और मुसलमानों के लिए भी अलग-अलग वार्ड हैं। यह सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार है। खबर सामने आने के बाद गुजरात के उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने तुरंत इसका खंडन किया। इसके अलावा पीआईबी ने भी अपने फैक्ट चेक ट्वीट में इस खबर को निराधार को बताया।





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