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हर बार कपड़ों की धुलाई के लिए वाशिंग मशीन में पाउडर डालने की जरूरत नहीं। बस एक बार वाशिंग पाउडर डालिए और चार बार तक कपड़े साफ करिए। अब तक कपड़ों से मैल हटाने वाले एंजाइम्स धुलाई के दौरान बह जाते थे, लेकिन अब उन्हें वाशिंग मशीन में सहेजा जा सकेगा। कानपुर स्थित हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) के बायो केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के विज्ञानियों ने नैनो टेक्नोलॉजी पर आधारित वाशिंग पाउडर तैयार किया है।

वाशिंग पाउडर में मौजूद नैनो पार्टिकल्स युक्त सर्फेक्टेंट (यौगिक) और एंजाइम्स (रासायनिक अभिक्रिया को गति देने वाले प्रोटीन निर्मित जैविक उत्प्रेरक) वाशिंग मशीन के वाश टब में मौजूद फिल्टर में चिपक जाएंगे और बहेंगे नहीं। यह वाशिंग पाउडर पहली धुलाई में ही कपड़ों को चिकनाई युक्त मैल, तेल, घी, ग्रीस, मोबिल ऑयल के जिद्दी दागों से छुटकारा दिलाएगा। इसके बाद कम गंदे कपड़ों की धुलाई सिर्फ पानी मिलाकर ही हो जाएगी, पाउडर डालने की जरूरत नहीं रहेगी। यह पाउडर अन्य के मुकाबले काफी सस्ता भी होगा।

बायो केमिकल इंजीनियरिंग के विभागाध्यक्ष प्रो. बृजेश सिंह और अंतिम वर्ष के छात्र सचिन कुमार इस पर काम कर रहे हैं। प्रो. सिंह के मुताबिक एंजाइम्स अनेक बार उपयोग में आ सकते हैं, लेकिन बहकर बर्बाद हो जाते हैं। अब उन्हें बचाने के लिए पाउडर के साथ लौह आधारित नैनो पार्टिकल्स मिलाए गए हैं। इसमें एक विशेष ग्लू का भी उपयोग किया गया है। साथ ही वाशिंग मशीन में एक छोटी सी तबदीली करनी पड़ेगी। उसमें मोटर के निकट विशेष जाली या फिल्टर लगाना होगा। गंदा पानी इससे होकर बाहर चला जाएगा, जबकि नैनो पार्टिकल्स मोटर की मैग्नेटिक क्षमता की वजह से फिल्टर के पास ही चिपके रहेंगे।

प्रो. सिंह ने कहा कि इसके लिए वॉशिंग मशीन निर्माता कंपनियों को बदलाव के लिए कहेंगे और ऐसा फिल्टर भी बनाएंगे, जिसे किसी भी वाशिंग मशीन में आसानी से फिट किया जा सके। प्रो. सिंह ने बताया कि वाशिंग पाउडर में तीन तरह के एंजाइम्स जैविक उत्प्रेरक के तौर पर रासायनिक अभिक्रिया को बढ़ाते हैं। इसमें एल्केलाइन प्रोटिएज प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों से लगने वाले दाग, धब्बे मिटाने में काम आता है। दूसरा एमाइलिएज कार्बोहाइड्रेट संबंधित खाद्य सामग्रियों के दाग मिटाता है, जबकि लाइपेज कपड़ों में लगे ऑयल, फैट और चिकनाई युक्त गंदगी हटाने में मदद करता है।

विज्ञानियों ने उम्मीद जताई कि अगले साल तक इस वाशिंग पाउडर को बाजार में उतारा जा सकेगा। यह प्रचलित उत्पादों की तुलना में ग्राहकों के लिए किफायती भी रहेगा।

कानपुर के बायो केमिकल इंजीनियरिंग विभाग एचबीटीयू के विभागाध्यक्ष प्रो. बृजेश सिंह ने बताया कि अगले चरण में घर में बाल्टी में भी पाउडर सहेजने की योजना पर काम चल रहा है। इसमें जाली की मदद से नैनो पार्टिकल युक्त एंजाइम्स को रोकने की युक्ति बनाई जाएगी। इस तकनीक को पेटेंट कराया जा रहा है।



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