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  • तकनीकी टीम का तर्क- बाधाओं में खिंचाव से गुरुत्वाकर्षण बल बढ़ा, इसलिए गिरा पेड़ खड़ा हो गया
  • प्रशासन की चिंता- यहां लोगों की भीड़ जुट सकती है, इससे कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा है

दैनिक भास्कर

Jul 08, 2020, 11:10 AM IST

विदिशा। मध्यप्रदेश के विदिशा के एक गांव में दो महीने पहले गिरा दशकों पुराना पीपल का पेड़ अपने आप खड़ा हो गया है। गांव के लोग इसे दैविक चमत्कार मान रहे हैं। वहीं, एक्सपर्ट्स वैज्ञानिक तर्क दे रहे हैं। उनका कहना है कि बारिश में बर्फ के भीगने से गुरुत्वाकर्षण बल बढ़ा, जिससे यह पेड़ खड़ा हो गया।

विदिशा के छपारा गांव में देवी माता के मंदिर परिसर में यह पेड़ तेज वंशी से गिर गया था। अब यह पहले की ही तरह फिर से हरा-भरा हो उठा है। इसकी सूचना जैसे ही प्रशासन को मिली तो 5 सदस्यीय तकनीकी दल मौके पर पहुंच गया। दल ने इसे एक भौतिक घटना बताया।

एक्सपर्ट्स का पहला तर्क: पेड़ की शाखाओं को काटने से उसके तने का कारण जड़ वाले हिस्से से कम हो गया होगा। पानी गिरने के बाद पेड़ की बाढ़ ने ‘जाम फ्लोइंग प्रक्रिया’ कर पेड़ को पानी का भोजन उपलब्ध कराया। इससे बचाव में जमीन की तरफ खिंचाव हुआ और पेड़ गुरुत्वाकर्षण बल नियम का पालन करते हुए और वह एक पहले की तरह खड़ा हो गया।

एक्सपर्ट्स का दूसरा तर्क: इस घटना के पीछे एक अलग तर्क है और यह है कि दो महीने पहले जब पेड़ गिरा था उस समय वह 4 फीट ऊंची दीवार पर गिरा था। इससे 1 फीट दीवार टूट कर कर गिर गई थी। अभी पेड़ की ऊंचाई लगभग 11-12 फीट है। जड़ से दीवार तक पेड़ की लंबाई लगभग 6-7 फीट होगी, जबकि दीवार के बाहर 4-5 फीट होगी। पेड़ की जमीन से लगभग 30 डिग्री कोण बनाया जा रहा है। पेड़ के तने से अधिक वजन चक्र पर है। जड़ के ऊपर 2 फीट का तना है। इससे भार का संतुलन बना रहेगा और पेड़ अचानक खड़ा हो गया है।

प्रशासन को भीड़ से सोशल डिस्टेंसिंग का नियम टूटने का डर
गांव के लोग इसे दैविक चमत्कार मान रहे हैं। वहीं, प्रशासन को चिंता है कि अगर दैविक चम्तकर की बात लोगों के बीच फैली तो भीड़ जुटने का खतरा है। इससे कोरोना संक्रमण फैल सकता है। प्रशासन ने यहां श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने की आशंका को देखते हुए, कार्रवाई करने के निर्देश दे दिए हैं।





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