Share this


  • बीमार के इलाज के लिए पैसे जुटाकर देते हैं लोग, पुलिस भी करती है मदद
  • लॉकडाउन में 4 गुना बढ़ीं मोहल्ला कमेटियां, जरूरतमंद सबसे पहले इन्हीं से मिलते हैं

अमित कुमार निरंजन

Jul 06, 2020, 06:14 AM IST

श्रीनगर / बडगाम। जम्मू-कश्मीर की धार्मिक संस्थाओं में होने वाली फंडिंग को अब तक संभावित की निगाह से देखा जाता है। लेकिन, आतंकवाद शुरू होने से पहले ही इन स्थितियों में बीमारों के इलाज के लिए आर्थिक मदद करने की परंपरा चली आ रही है।

घाटी के 900 से ज्यादा गांवों में बीमारों के लिए पैसा जुटाया जाता है। यहां डेथ कमेटियां भी बनी हैं, जो उन घरों का चार दिन तक पूरा खर्च उठाती हैं, जहां किसी की मौत हुई है। इस नेक काम में कई बार स्थानीय पुलिस भी लोगों की मदद करती है।

व्यक्ति अर्जित का कुछ हिस्सा हर शुक्रवार जरूर दे जाता था

जोकू खारियन गांव के पूर्व सरपंच और मौलवी मोहम्मद मकबूल ने बताया कि बीमार की मदद के लिए कुरआन शरीफ और मुस्लिम शरीफ में कहा गया है। इसलिए हमारे यहाँ पहले यह काम मस्जिदों के जरिए होता था। व्यक्ति अर्जित का कुछ हिस्सा हर शुक्रवार जरूर दे जाता था। लेकिन, आतंकवाद के बीच कुछ मस्जिदों में इस धन-संग्रह पर प्रशासन ने कड़ाई की, तो लोगों ने खुद मदद शुरू की और परंपरा को आगे बढ़ाया। आज सभी गांवों में यह चलन है।

इलाज के लिए पैसे इकट्ठे करने की परंपरा यहां पुरानी है- बडगाम एस.पी.

बडगाम एसपी अमोद अशोकपुरी बताते हैं कि बीमार के इलाज के लिए पैसे इकट्ठे करने की परंपरा यहां पुरानी है। मस्जिद और औकाफ कमेटी के लोग मदद जुटाते हैं। डेथ कमेटिक्स भी अच्छा काम कर रहे हैं। मृतक के कफन-दफन से लेकर परिवार के खाने-पीने का खर्च यही कमेटियां उठाती हैं। सरपंच या किसी अन्य की सूचना पर हम भी एकारेंस सहित अन्य व्यवस्थाजाम करने की कोशिश करते हैं।

5 दशकों में मदद का यह सिलसिला पीढ़ी-दर-पीढ़ी चला आ रहा है

साहित्यकार जरीफ अहमद जरीफ कहते हैं कि 5 दशकों में मदद का यह सिलसिला पीढ़ी-दर-पीढ़ी चला आ रहा है।) अब गांव के सरपंच या बुजुर्ग व्यक्ति के माध्यम से बीमार व्यक्ति का परिवार मदद मांगता है और बाकी लोग उसके इलाज के लिए आर्थिक सहयोग करते हैं। मदद की यह परंपरा अब शहरों तक पहुंच गई है, लेकिन प्रारूप बदल गया है।

शहर के मोहल्लों में छोटी-छोटी कमेटियां बनी हुई हैं। इन मोहल्ले के लोगों को केवल जरूरतमंद की मदद करते हैं। लॉकडाउन में तो ऐसी कमेटियां चार गुना तक बढ़ गईं। श्रीनगर में ही इनकी संख्या 50 से ज्यादा हो गई हैं।

चंद दिनों में लाखों रुपए जुट जाते हैं
जोकू खारियन गांव के इरशाद अहमद के कैंसर के इलाज के लिए गांव वालों ने दो दिन में 5 लाख रुपए तो लारकीपुरा के कैंसर पीड़ित इमरान के लिए 8 लाख रुपए जुटाए। इसी तरह संगलीपुरा केे गुलाम मलिक के इलाज के लिए भी छह दिन में 4 लाख रुपए इकट्ठा किए गए।





Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *