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PATNA : राजनीतिज्ञों के लिए चुनाव किसी उत्सव से कम नहीं होता। इसमें वो अपनी पूरी ताकत झोंक देते हैं। क्या दिन, क्या रात… उनके लिए प्रचार के ये दिन जीवन संघर्ष के क्षण होते हैं। इस कार्य में बढ़-चढ़ कर साथ निभाती हैं उनकी धर्मपत्नियां। उनकी जिम्मेवारियां घर की चहारदिवारी तक सीमित नहीं रहती बल्कि क्षेत्र तक विस्तारित हो जाती है। पति के साथ-साथ उनके कार्यकर्ताओं का ख्याल रखना भी उनकी दिनचर्या में शामिल हो जाता है।

गया शहर से लड़ रहे बीजेपी नेता प्रेम कुमार की पत्नी प्रभावती देवी 40 सालों से पति के साथ प्रचार में जाती हैं। कहती हैं चुनाव पर्व से कम नहीं होता। मैं कभी परेशान नहीं होती। पति के साथ क्षेत्र के लोगों से मिलती हूं और समस्याओं को समझने की कोशिश करती हूं। कई बार व्यस्तता इतनी बढ़ जाती है कि पति से दो-तीन दिन तक मुलाकात नहीं होती। गृहिणी हूं तो बच्चों को भी संभालना पड़ता है। बीजेपी नेता नितिन नवीन बांकीपुर से लड़ रहे हैं। पत्नी दीपमाला बैंक मैनेजर हैं। चुनावी मौसम में दिनचर्या क्या होती है इस सवाल पर पहले तो मुस्कुराती हैं। फिर धीरे से कहती हैं पति के साथ मेरी व्यस्तता भी बढ़ जाती है। सुबह 5 बजे उठकर नाश्ता बनाती हूं। रात में नितिन को आते-आते 12 या 1 बज जाते हैं। इस दौरान सोने-उठने, खाने-पीने और आने-जाने का कोई तय समय नहीं होता। चुनाव के समय लोगों का आना-जाना बढ़ा रहता है।

राजद नेता भाई वीरेन्द्र मनेर से मैदान में हैं। पत्नी पूनम यादव सुबह 4 बजे उठती हैं। पूजा के बाद वो कर घर के कामों में जुट जाती हैं। पूनम कहती हैं इन दिनों हमारे सोने का कोई तय समय नहीं है। पति अधिकतर क्षेत्र में ही रहते हैं तो मेरी पूरी कोशिश रहती है कि उन्हें घर का खाना ही मिले। साथ में उनके कार्यकर्ताओं के लिए भी भोजन मैं ही भिजवाती हूं। छह साल का बेटा पापा को बहुत याद करता है। मधेपुरा से खड़े जेडीयू नेता निखिल मंडल की पत्नी वर्षा ने शुरू से ही चुनावी माहौल देखा है। पिता जदयू नेता नरेंद्र नारायण यादव हैं। हौले से मुस्कुराते हुए कहती हैं, बचपन से ही माहौल को देखा है। इसीलिए ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। लेकिन एक पत्नी होने के नाते चुनावी व्यस्तता के दौरान पति का ख्याल रखना मेरा जिम्मा है। प्रचार में निखिल जितने बिजी होते हैं उससे कम मैं भी नहीं होती। मेरा सोना-जागना उनकी दिनचर्या पर तय है।

जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू यादव भी मधेपुरा सीट से भाग्य आजमाएंगे। पत्नी रंजीत रंजन कांग्रेस नेता हैं। दोनों व्यस्त रहते हैं लेकिन एक-दूसरे के लिए वक्त निकाल ही लेते हैं। कहती हैं हम दोनों एक दूसरे के काम को समझते हैं। चुनाव के दौरान मेरा दायित्व बहुत बढ़ जाता है। हर दिन पांच से छह बार फोन करती हूं और उनकी दवाइयों और खाने-पीने के लिए ताकीद करते रहती हूं।



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