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9 मिनट पहले

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  • ब्रिटेन की एक्सेटर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने रिसर्च में किया दावा, इंगलैंड में सामने आया मामला
  • कहा- बच्चों में टाइप -1 डायबिटीज जन्म के 6 महीने बाद होता है लेकिन नए मामले में कोख में ही इंसुलिन जी होता है

ब्रिटिश शोधकर्ताओं की चौकाने वाली रिसर्च फ्रंट आई है। शोधकर्ताओं का दावा है कि गर्भ में पल रहे बच्चे को भी डायबिटीज हो सकता है। अनुसंधान करने वाले एक्सेटर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का कहना है औइम्यून डिसीज गर्भ में पल रहे बच्चे के इम्यून सिस्टम पर अटैक है। यह बीमारी इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को डैमेज करती है। इस तरह जन्म से पहले ही बच्चे में टाइप -1 डायबिटीज हो सकता है। इसका एक मामला सामने आया है।

शोधकर्ता डॉ। एलिजाबेथ रॉबर्टसन के मुताबिक, पहली बार ऐसा मामला सामने आया है, जब जन्म होने पर बच्चे में टाइप -1 डायबिटीज कंफर्म हुआ।

4 पटिन में समझें बच्चों में क्यों और कैसे होता है डायबिटीज

1. बचपन में हो जाता है टाइप -1 डायबिटीज
अब तक बच्चों में टाइप -1 डायबिटीज के मामले जन्म के 6 महीने बाद सामने आते थे लेकिन न्यू रिसर्च कहती है, गर्भ में भी कोई खतरा है। टाइप -1 डायबिटीज ऐसी औटो इम्यून डिसीज है जिसकी शुरुआत आमतौर पर बचपन में ही हो जाती है। इसका पूरी तरह से इलाज संभव नहीं है, बस दवाओं और सावधानियों की मदद से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। इसकी वजह जेनेटिक म्यूटेशन है।

वहीं, टाइप -2 डायबिटीज खाद्य पदार्थों में बेसबरी के कारण होता है। एक्सपर्ट्स का कहना है, अब टाइप -1 डायबिटीज का सटीक इलाज ढूंढने की जरूरत है। अगर इसके मामले बढ़ते हैं तो हालात और गंभीर हो जाएंगे।

2. पहली बार बिना जेनेटिक म्यूटेशन के औक इम्यून डिसीज हुए
डायबिटोलजिया जर्नल में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने डायबिटीज से जूझ रहे 400 बच्चों पर अध्ययन किया। शोध में यह बात सामने आई कि जन्म से 6 महीने पहले भी बच्चे को डायबिटीज हो सकती है हालांकि केवल उसमे जेनेटिक म्यूटेशन हो या न हो। यह पहली बार हुआ जब औबियाम्यून डिसीज के बिना किसी जेनेटिक म्यूटेशन के हुआ है।

3. जन्म के समय औसत से कम बच्चे का वजन था
रिसर्च टीम ने पाया है कि जिस बच्चे में कोख में ही टाइप -1 डायबिटीज हुई उसका जन्म के समय वजन औसत से बहुत कम था। आमतौर पर कोख में ही बच्चे में इंसुलिन बनने लगता है। लेकिन हालिया मामले में इम्यून सिस्टम पर अटैक होने के कारण इंसुलिन बनना कम हुआ और जन्म के समय वजन भी घट गया।

4. डायबिटीज से शरीर के कितने हिस्सों पर असर छोड़ती है
डायबिटीज होना यानी शरीर में ब्लड शुगर का स्तर पर बढ़ना है। यह जैसे-जैसे उठता है शरीर के दूसरे अंगों के फेल या उन्हें नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। डायबिटीज के मरीजों में मांसपेशियों का कमजोर होना, आंखों की रोशनी घटना, किडनी डिसीज, स्ट्रोक और हार्ट डिसीज का खतरा बढ़ जाता है।





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By GAUTAM

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