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गुरदासपुर2 घंटे पहले

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पाकिस्तान के नारोवाल जिले में करतारपुर में स्थित पवित्र गुरुघर, जिसका इतिहास गुरु नानक देव जी के साथ जुड़ा है। यहां जाने के लिए बने अंतर्राष्ट्रीय गलियारे को कोरोना संकट की वजह से बंद किया गया है।

  • गुरु नानक देव से जुड़े ऐतिहासिक गुरुद्वारे के लिए गलियारे का भारत में 26 नवंबर 2018 को और पाकिस्तान में 28 नवंबर को शिलान्यास किया गया था
  • 9 नवंबर 2019 को गुरुनानक देव जी के प्रकाशोत्सव पर गलियारे को जनता को समर्पित कर दिया गया था, 15 मार्च से बंद हो गया है
  • महाराजा रणजीत सिंह की पुण्यतिथि पर पाकिस्तान ने गलियारा खोलने की बात की तो भारत सरकार ने कर दिया था खारिज

सीमा पार से खबर आई है कि भारत के करोड़ों सिखा श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान देते हुए पाकिस्तान को जोड़कर बना करतारपुर कॉरिडोर जल्द ही एक बार फिर खुल सकता है। हालांकि अभी कोरोना की महामारी के थोड़ा नियंत्रण में आने का इंतजार किया जा रहा है। यह पुष्टि शनिवार को पाकिस्तानी मीडिया के हवाले से हुई है। पाक मीडिया के मुताबिक कहा जा रहा है कि एक बार जब कोविड -19 की स्थिति में थोड़ा सुधार आ जाएगा तो उसके बाद श्रद्धालुओं के लिए करतारपुर गलियारा खोल दिया जाएगा। एख बार स्थिति में सुधार आने के बाद श्रद्धालु दर्शन कर सकते हैं।

दरअसल, भारत में कोरोनावायरस के खतरे को देखते हुए 15 मार्च को करतारपुर कॉरिडोर को बंद करने का फैसला लिया गया था। पहले इसे 31 मार्च तक बंद किया गया था, लेकिन बाद में अनिश्चितकाल के लिए बंद रखने का फैसला किया गया। हालाँकि 29 जून को शेर-ए-हिंदुस्तान महाराजा रणजीत सिंह की पुण्यतिथि पर पाकिस्तान की ओर से कॉरिडोर को खोलने की बात कही गई थी। उस वक्त भारत सरकार ने इसे छलावा करार देते हुए सिरे से खारिज कर दिया था।

तीन महीने पहले इस बिनाह पर खारिज हुआ था पाकिस्तान का दावा
दरअसल, लगभग तीन महीने पहले करतारपुर कॉरिडोर को खोलने की बात करके पाकिस्तान खुद को दोस्ती और अमन का पैरोकार साबित करने की कंप्यूटिंग रच रहा था। 27 जून को करतारपुर कॉरिडोर खोलने का ऐलान करता है। इसके लिए सिर्फ दो दिन का वक्त देता है, जबकि दोनों देशों के बीच समझौते के तहत यह तय है कि किसी भी यात्रा के लिए कम से कम 7 दिन पहले एक-दूसरे को जानकारी देनी होगी। समझौते के तहत पाकिस्तान को अपनी तरफ बहने वाली रावी नदी पर पुल बनाना था, लेकिन उसने नहीं बनाया।

गुरु नानक देव से जुड़े करतारपुर गुरुद्वारे का इतिहास
पाकिस्तान के नारोवाल जिले में रावी नदी के पास स्थित गुरुद्वारा करतारपुर साहिब का इतिहास लगभग 500 साल से बहुत पुराना है। मान्यता है कि 1522 में सिखों के गुरु नानक देव ने इसकी स्थापना की थी। उन्होंने अपने जीवन के अंतिम वर्ष यहीं बिताए थे। लाहौर से करतारपुर साहिब की दूरी 120 किलोमीटर है तो गुरदासपुर इलाके में भारतीय सीमा से यह लगभग 7 किलोमीटर दूर है।

दोनों देशों की सरकारों के प्रयासों से कॉरिडोर बना था
भारत और पाकिस्तान की सरकारों ने गुरदासपुर के डेरा बाबा नानक और पाकिस्तान के करतारपुर में स्थित पवित्र गुरुद्वारे को जोड़ने के लिए कॉरिडोर बनाने का फैसला लिया था। करतारपुर कॉरिडोर की नींव 2018 में रखी गई थी। भारत में 26 नवंबर को और पाकिस्तान में 28 नवंबर को शिलान्यास किया गया था। इसके बाद गुरुनानक देव जी के प्रकाशोत्सव पर 9 नवंबर 2019 को इसे जनता को समर्पित कर दिया गया था।





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By GAUTAM

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