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एक सितंबर से होने वाली जेईई मेन परीक्षा और 13 सितंबर को होने वाली नीट परीक्षा को स्थगित करने की मांग का समर्थन करने वाले कई विशेषज्ञ सोशल मीडिया पर परीक्षा न आयोजित किये जाने के पक्ष में अपनी राय देते हुए कई विकल्प सुझा रहे हैं। इन्हीं में से एक है जीरो ईयर। इन विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को वर्तमान शैक्षणिक सत्र का जीरो ईयर घोषित कर देना चाहिए। वहीं दूसरी तरफ, एनटीए द्वारा जेईई मेन अप्रैल/सितंबर – 2020 और नीट (यूजी) 2020 दोनो ही प्रवेश परीक्षाओं के लिए प्रवेश जारी कर दिये गये हैं, जिसमें एजेंसी द्वारा परीक्षा के लिए जरूरी निर्देशों के साथ-साथ महामारी के सम्बन्ध में आवश्यक सावधानियों और तैयारियों के लिए एसओपी भी उपलब्ध कराये गये हैं। जबकि इससे पहले एजेंसी द्वारा अपने ऑफिशियल वेबसाइट, nta.ac.in पर पहले ही कोविड-19 महामारी को ध्यान में रखते हुए निर्देश जारी कर दिये हैं।

जेईई मेन और नीट परीक्षाओं को स्थगित करने की मांग करते हुए कई विशेषज्ञ सोशल मीडिया पर जीरो ईयर का विकल्प सुझा रहे हैं। इन विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड-19 महामारी न सिर्फ देश व्यापी बल्कि है समूचा विश्व इसकी चपेट में है। ऐसे में सभी सरकार को अन्य देशों के साथ मिलकर वर्तमान सत्र को जीरो ईयर घोषित कर देना चाहिए। जीरो ईयर के अंतर्गत शैक्षणिक 2020-21 को अमान्य करने की सलाह विशेषज्ञों द्वारा दी जा रही है।
परीक्षाओं को लेकर कांग्रेस का कल देशव्यापी विरोध

देश भर में हो रहे जेईई मेन और नीट परीक्षाओं के विरोध के बीच कांग्रेस ने कल 28 अगस्त को देशव्यापी प्रदर्शन करने की घोषणा की है। पार्टी की तरफ से महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि कल का अभियान सरकार के तानाशाही कदम के विरोध में है। हर राज्य के राज्य प्रभारी विभिन्न जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करेंगे।
क्या सुप्रीम कोर्ट दायर होगी पुनर्विचार याचिका?

सुप्रीम कोर्ट में परीक्षाओं को स्थगित करने के मामले को 18 अगस्त को खारिज होने के बाद इस पर पुनर्विचार याचिका दायर करने की कवायद शुरू हो गयी है। पंजाब राज्य के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने राज्य के अटॉर्नी जनरल से पुनर्विचार याचिका दायर करने को कहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जबकि राज्य में महामारी बढ़ने की संभावना है, तो परीक्षाओं का आयोजन कैसे हो सकता है। वहीं, दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी पुनर्विचार याचिका दायर किये जाने का समर्थन किया है।
परीक्षाओं का आयोजन होना ही चाहिए – शिक्षा सचिव

नीट और जेईई मेन प्रवेश परीक्षाओं के आयोजन को लेकर शिक्षा सचिव अमित खरे ने कहा कि परीक्षाओं के आयोजन को स्थगित नहीं किया जाना चाहिए और इन्हें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा निर्धारित तिथियों के अनुसार ही आयोजित करना चाहिए। इन दोनो ही परीक्षाओं का आयोजन दीवाली के बाद किये जाने की मांग को लेकर शिक्षा सचिव ने कहा कि दीवाली के बाद छठ पूजा होगी जिसके कारण फिर परीक्षाओं की तिथियों को आगे बढ़ाकर दिसंबर में करने की आवश्यकता होगी और परिणामों की घोषणा फिर 2021 में होगी।
शिक्षाविदों ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

देश भर के 150 शिक्षाविदों ने प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में कहा कि मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में देरी छात्रों के भविष्य के साथ समझौता करना साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग छात्रों के विरोध को अपने राजनैतिक हित के लिए बढ़ावा दे रहे हैं। युवा और छात्र देश का भविष्य होते हैं लेकिन महामारी के चलते उनके कैरियर पर भी निश्चितता के बादल छा गये हैं। सभी की तरफ से यह सहमति है कि प्रवेश प्रक्रिया और कक्षाओं को लेकर गतिरोध जल्द से जल्द समाप्त होने चाहिए।

देश भर में कोविड-19 महामारी की वर्तमान स्थिति को देखते हुए अगले माह राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित की जाने वाली इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन 2020 और मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट 2020 को स्थगित करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट दायर याचिका के 18 अगस्त को खारिज कर दिये जाने के बाद से देश भर में विरोध लगातार बढ़ता ही जा रहा है। जेईई मेन और नीट दोनो ही परीक्षाओं में सम्मिलित होने के लिए पूरे देश से 20 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने पंजीकरण किया है। जेईई मेन 2020 और नीट 2020 परीक्षाओं के विरोध को सत्ताधारी बीजेपी के नेताओं समेत विपक्ष द्वारा व्यापक विरोध दर्ज कराया जा रहा है। सोशल मीडिया पर छात्रों एवं छात्र संगठनों द्वारा लगातार अभियान चलाये जा रहे हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक और अन्य प्रभावी नेताओं के मामले में हस्तक्षेप करने की गुहार छात्राओं ने गुहार लगायी है।



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