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7 अगस्त 2020 को दुबई से कोझिकोड आ रहा है एयर इंडिया का ई-इंजन की फ्लाइट संख्‍या 1344 के केमग्रि‍ट हो जाने से हर कोई दुखी है। विमान रनवे से फिसलकर खाई में गिरा। विमान के दो टुकड़े हो गए और 18 लोगों की मौत हो गई। कोज़िकोड का हवाई अड्डा भौगोलिक रूप से “टेबल टॉप” है। मतलब हवाई पट्टी के इर्द-गिर्द खाई है। ऐसे में क्या होता है टेबल टॉप टर्मिनल? किन-किन देशों में टेबल टॉप टर्मिनल है, भारत में कौन-कौन से टेबल टॉप टर्मिनल हैं इसके बारे में बात करेंगे। साथ ही आप इससे पहले भी देश में हुए बड़े विमान हादसों के बारे में बताएंगे जिसमें कई लोगों ने जान लिया था। साथ ही विमान के बड़े हादसों के बारे में इस रिपोर्ट में बताएंगे।
पहले चार लाइनों में टेबल टॉप टर्मिनल के बारे में जानकारी देते हैं फिर इसके बारे में विस्तार से बात करेंगे
  • टेबल टॉप रनवे अमूमन पातर या पहाड़ के शीर्ष पर होता है
  • इसमें कई बार एक तरफ या कई बार दोनों तरफ से गहरी ढाल होती है, जिसकी नीचे घाटी होती है
  • ऐसे रनवे दिखने में जितने सुंदर होते हैं, यहां उतनी ही जोखिम भरी होती है
  • पागल और टेक ऑफ (उड़ान भरने) दोनों के दौरान विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है
क्या होता है टेबल टॉपपोर्ट
टेबल रन रनवे आमतौर पर एक पहाड़ी की चोटी को काटकर बनाए जाते हैं, और अक्सर रनवे की देखरेख के लिए किसी भी मार्जिन की कमी के कारण के लिए मुश्किल माना जाता है। हड्डी पर होने की वजह से इनपोर्ट्स पर रनवे और सेफ्टी एरिया भी कम ही होता है। यह क्षेत्र बताता है कि रनवे के बाद विमान को सही सलामत रखने के लिए कितनी दूरी है। ऐसे टर्मिनल पर रनवे की लंबाई के अलावा उनकी चौड़ाई भी कम ही हुई होती हैं। पायलटों के अनुसार, टेबल एक्सप्रेस रनवे पर उतरने में त्रुटियों के लिए बहुत कम जगह के साथ सटीक दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है।
कहां-कहां पर टेबल टेबल टर्मिनल है
पूरी दुनिया में इस तरह के टर्मिनल केवल चार देशों में ही हैं। इनमें अमेरिका, नेपाल, नेपालम और भारत जैसे देश शामिल हैं। नेपाल का ताल्चा टर्मिनल, तेंजिंग टर्मिनल, त्रिभुवन इंटरनेशनल टर्मिनल, आपलिंग्टन टर्मिनल भी टेबल एक्सप्रेस टर्मिनल हैं। अलीगढ़ड में नानबियना द्वीप पर बना जुआनचोपोर्ट भी एक टेबल एक्सप्रेस टर्मिनल है। इसके अलावा अमेरिका में के विकारॉर्निया का केटलीनापोर्ट, एरिजोना का सेडोना एयरपोट, पश्चिमी वर्जिनिया काडेगर टर्मिनल भी इसी तरह के टेबल इंजन टर्मिनल हैं।
द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार भारत में केरल का कालाकट इंटरनेशनल इंजन, मंगलोर इंटरनेशनल टर्मिनल, मिजोरम का लैंगपुरी इंजन और सिक्किम का पाकिंगग टर्मिनल शामिल है। वहीं हिमाचल प्रदेश के शिमला और कुल्लू टर्मिनल को भी टेबल एक्सप्रेस टर्मिनल की श्रेणी में गिना जाता है।

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टच डाउन में क्या होता है मुश्किल है
टेबल इंजन टर्मिनल पर विमानों को उतारने के लिए मुश्किलें कहीं जियादा होती हैं। यहां का रनवे छोटा होना ही एक बड़ी समसया नहीं होती है बल्कि इस तरह के टर्मिनल पर अक्सर मौसम में होने वाला बदलाव कई बार परेशानी का सबब बन जाता है। इसके अलावा तेज हवा भी पश्चिमी के लिए बड़ी चुनौती बनती है। इतना ही नहीं मानसून के मौसम में तो ये पासपोर्ट जानलेवा अधिक हो जाते हैं। रनवे गीला होने की वजह से यहां पर विमान के फिसलने का डर जियादा होता है। यहां पर पायलटों को साफतौर पर निर्देश दिए जाते हैं कि यदि वे तय दूरी में टच डाउन करने में नाकाम पत्थर होते हैं तो विमान को फिर से हवा में ले जाएं और फिर कोशिश करें। इस तरह के न करने पर विमान के कैमुग्रिट होने के आसार बढ़ जाते हैं। दक्षिण भारत में इस तरह के टर्मिनल हर साल जून से सितंबर तक काफी खतरनाक हो जाते हैं।

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2011 की रिपोर्ट में रनवे को बताया गया था कि खतरनाक था
एयरपोर्ट के अधिकारियों ने इस बात की अनदेखी की और एयर इंडिया के विमान हादसा हो गया। रनवे 10 को लेकर इस बात की चेतावानी नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा एक सुरक्षा सलाहकार समिति के सदस्य कैप्टन मोहन रंगनाथन ने 9 साल पहले ही इस बात की चेतावनी दी थी। लेकिन अधिकारियों ने इसकी अनदेखी की और एयर इंडिया का विमान हादसा हो गया। वर्षों पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा गठित एक सुरक्षा सलाहकार समिति के सदस्य कैप्टन मोहन रंगनाथन का कहना है कि बारिश होने के बार बारिश की स्थिति में टेबल टर्मिनल पर हवाई अड्डे की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि 17 जून, 2011 को उन्होंने अपनी रिपोर्ट में डीजीसीए, सिविल एविशन सेफ्टी एड्वरी कमेटी और सिविल एविएशन सचिव को एक लेटर में इस बात की जानकारी दी थी। अपने लेटर में उन्होंने बताया कि कोज़िकोड टर्मिनल के रनवे 10 को सुरक्षित क्षेत्र के अभाव में उपयोग में लाने की अनुमति नहीं है। साथ ही हवाई सेवा के लिए रनवे के अंत में 240 मीटर सुरक्षित क्षेत्र विकसित करने और रनवे की लंबाई कम करने का सुझाव दिया गया था। उन्होंने अपने लेटर में बताया था कि विमान रनवे पर नहीं रुकने की स्थिति में सुरक्षित क्षेत्र का प्रावधान होता है, ताकि विमानों की उड़ान को रोका जा सके।
टर्मिनल प्रशासन पर आरोप
कुछ जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि विमान हादसे के लिए कुछ हद तक टर्मिनल प्रशासन भी ज़िम्मेदार है। कोज़िकोड से सांसद के मुरलीधरन का कहना है कि टर्मिनल प्रशासन, जिसमें टर्मिनल के निदेशक भी शामिल हैं, ने टर्मिनल के हालात सुधारने पर ध्यान नहीं दिया है। मुरलीधरन आरोप लगाते हैं, पासपोर्ट प्रशासन स्थानीय सांसदों के साथ भी सहयोग नहीं कर रहे हैं। मुरलीधरन भारतीय संसद की सिविल एविशन कंसलटेटिव समिति के सदस्य भी हैं। वे कहते हैं, ‘जब मैंने व्यक्तिगत तौर पर निदेशक से मुलाक़ात की थी तब भी वे पासपोर्ट से जुड़ी समस्याओं पर बात करने के लिए तैयार नहीं थे।’
आज से ठीक 10 साल पहले मंगलुरु में एयर इंडिया एक्सप्रेस के ही एक विमान के साथ एक बड़ा हादसा हुआ था। 22 मई 2010 को एयर इंडिया की दुबई से मंगलोर आ रही फ्लाइट संख्या 812 टन के जब रनवे को पार करते हुए पहाड़ी में जा गिरी थी। उस हडसे में 158 लोगों की मौत हो गई। उस विमान में 160 यात्री और 6 चालक दल के सदस्य थे। सभी चालक दल के सदस्यों और 152 यात्रियों की हडसे में जान चली गई। केवल 8 यात्री ही बच पाए थे।
भारत को एशिया में अन्य देशों की तुलना में होने वाले विमान हादसों के मुकाबले में अधिक सुरक्षित माना जाता है। फिर भी कई बार हताहत हो जाते हैं। अब आपको भारत के इतिहास में दर्ज कुछ प्रमुख विमानों के बारे में बताते हैं।
1 जनवरी 1978: नए साल का पहला दिन मुंबई से एक दुख भरी खबर आई। मुंबई टर्मिनल से उड़ाने भरने के तुरंत बाद एयर इंडिया का बोईंग 747 धमाके के साथ समुद्र में गिरा दिया गया था। इस हादसे में प्लेन में सवार सभी 213 लोगों की मौत हो गई थी।
14 फरवरी 1990: वैसे तो ये दिन वेलेंटाइन्स डे के रूप में मनाया जाता है। लेकिन साल 1990 में इसी दिन भारत एर्न्स का एयरबस 320 विमान बेली हवाई अड्डे पर उतरने के समय रनवे से 400 मीटर पहले दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में 92 लोग मारे गए थे।
16 अगस्त 1991: ये हादसा इंडियन एबरन्स में हुआ था। जब बोइंग 737-200 इम्फाल हवाई अड्डे से 30 किलोमीटर दूर अज्ञात कारणों से दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में विमान पर सवार सभी 69 लोगों की मौत हो गई थी।
26 अप्रैल 1993: औरंगा में उड़ान भरने की असफल कोशिश के बाद भारतीय एर्न्स का एक बोइंग विमान हवाई अड्डे के सामने बिजली के तार से टकरा कर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में पांच कर्मी दल और 52 यात्रियों की मौत हो गई थी।
12 नवंबर 1996: ये हादसा बेहद अजीब था क्यूंकि ये आसमान में हुआ था। नई दिल्ली में हवाई अड्डे के करीब 4000 मीटर की ऊंचाई पर सउदी एयरलाइंस के बोइंग 747 और कज़ाख़स्तान के इल्यूशिम आईएल 76 की टक्कर हो गई थी। बोइंग पर सवार 312 और इलूशिन पर सवार 37 लोगों की मौत हो गई थी।
17 जुलाई 2000: अलायंस एयर का एक बोइंग 737-200 पटना में लैंडिग के दौरान हवाई अड्डे से दो किलोमीटर दूर एक रिहायशी इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में 52 में 45 यात्री और छह विमानकर्मियों की मौत हो गई थी। जबकि प्लेन गिरने से ज़मीन पर पांच लोगों की मौत हुई थी।



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