Share this


PATNA: बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ही मधेपुरा में एनडीए टूट के कगार पर जाती दिख रही है. भाजपा कार्यकर्ताओं ने चुनाव से खुद को अलग रखने का फैसला लिया है. जिला पार्टी कार्यालय में भाजपा जिला कार्य समिति की बैठक जिला अध्यक्ष स्वदेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित की गयी. बैठक में जिला नेतृत्व के नेताओं के अलावे प्रदेश कार्यसमिति सदस्य और पूर्व प्रत्यशी विजय कुमार विमल भी शामिल हुए. बैठक में सर्व सम्मति से कार्यकर्ताओं ने खुद को विधानसभा चुनाव से अलग रखने की घोषणा की.

बीजेपी ने इसको लेकर प्रेस रिलीज भी जारी किया है, जिसमें बताया गया है कि जिला में एक भी सीट भाजपा को नहीं मिलने से कार्यकर्ताओं में आक्रोश है. इस संबंध में जब जिलाध्यक्ष स्वदेश कुमार से बात की गई तो वो कुछ भी बोलने से इनकार कर दिए, वहीं भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य विजय कुमार विमल ने बताया कि बैठक में कार्यकर्ताओं ने काफी आक्रोश व्यक्त किया. कार्यकर्ताओं ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर जिला के संगठन की उपेक्षा का आरोप लगाया. विजय विमल बताते हैं कि 2015 में बीजेपी ने अपने दम पर मधेपुरा में 54 हजार मत प्राप्त किया था और जदयू समर्थित राजद प्रत्यशी को कड़ी टक्कर दी थी. उस वक्त जदयू ने मधेपुरा सीट राजद को दिया था. इस बार यह सीट भाजपा को मिलनी चाहिए थी. इस बार पूरी संभावना थी कि समाजवाद की इस धरती पर राष्ट्रवाद का कमल खिलेगा लेकिन कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पानी फेरा गया है. उन्होंने जदयू के नेताओं पर भाजपा पार्टी कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं देने का भी आरोप लगाया.

बता दें कि 2015 के विधान सभा में राजद और जदयू के बीच गठबंधन था, जबकि एनडीए में भाजपा के साथ लोजपा और हम था. मधेपुरा जिले के चार विधान सभा में तीन सिंहेश्वर, बिहारीगंज और आलमनगर में जदयू ने चुनाव लड़ा था और मधेपुरा से राजद, वहीं एनडीए में मधेपुरा और बिहारीगंज से बीजेपी चुनाव लड़ी थी, जबकि आलमनगर से लोजपा और सिंहेस्वर से हम. मधेपुरा विधानसभा में बीजेपी को करीब 54 हजार वोट आया था जबकि राजद को करीब 86 हजार वोट मिला था. वहीं बिहारीगंज में जदयू प्रत्याशी निरंजन कुमार मेहता को करीब 78 हजार वोट मिला था जबकि भाजपा के प्रो. रविन्द्र चरण यादव को 50 हजार. इस मामले में जब जदयू नेता महेंद्र पटेल से बात की गई तो उन्होंने इसे भाजपा का अंदरूनी मामला बताते हुए कहा कि किसी भी पार्टी के कार्यकर्ता के लिए ऐसे समय में शीर्ष नेतृत्व के निर्णय को मनाना ही उसके अनुशासन और समर्पण को दर्शाता है. गठबंधन की राजनीति में सभी की सभी इच्छा पूरी नहीं होती. यह एक समझौता होता है जिसे भजपा के जिला नेतृत्व के नेताओं को समझना चाहिए.



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *