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  • कोरोना से लड़ने के लिए बीएमसी ने ट्रिपल टी यानी ‘ट्रेस-टेस्ट-ट्रीटमेंट’ के फॉर्मूले का इस्तेमाल किया
  • धारावी में स्कूल और कॉलेज को क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया, मेडिकल स्टाफ को तीन जब का खाना दिया गया

दैनिक भास्कर

जुलाई 11, 2020, 10:46 AM IST

मुंबई। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन यानी WHO के चीफ टेड्रोस एडनॉम गेब्रेयेसस ने कोरोनावायरस कंट्रोल को लेकर मुंबई के धारावी की मिसाल दी। उनके मुताबिक, धारावी में स्थिति काफी खराब थी, लेकिन तेजी से कार्रवाई करने से कंट्रोल हो गई। गेब्रेयेसस के मुताबिक, कम्युनिटी एंगेजमेंट, टेस्टिंग, ट्रेसिंग, आइसोलेटिंग और सभी बीमारों के इलाज पर फोकस कर कोरोना की चेन को तोड़ना और संक्रमण को खत्म करना संभव है। यहां जानते हैं कि मुंबई के धारावी में आखिर किन तरीकों का इस्तेमाल करके संक्रमण पर काबू पाया गया है।

ट्रिपल टी प्लान सबसे प्रभावी रहा
6 लाख से ज्यादा आबादी वाली एशिया की एशिया की सबसे बड़ी झोपड़पट्टी धारावी में कोरोना से लड़ने के लिए बीएमसी की ओर से प्रत्यारोपण टी यानी ट्रेस-टेस्ट-ट्रीटमेंट के फॉर्मूले का इस्तेमाल किया गया। इसका इस्तेमाल कर दक्षिण कोरिया लगभग पूरी तरह से कोरोना मुक्त हो चुका है।

चेस वायरस: एनेस प्लान
धारावी मुंबई के जी-नॉर्थ वॉर्ड में आता है। यहां के असिस्टेंट कमिश्नर किरण दिघावकर के मुताबिक, धारावी के लिए चेस दिरु नाम से एक एक्शन प्लान बनाया गया था। इसमें घने क्षेत्रों की स्क्रीनिंग, फीवर क्लिनिक की स्थापना, डेवलपर और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शामिल है।

ट्रेस कर लोगों को क्वारंटाइन किया गया
बीएमसी के स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने हर झुग्गी में लोगों की स्क्रीनिंग की। लक्षण वाले लोगों को आइसोलेट करना और टेस्ट करना शुरू किया। यहां के स्कूल, कॉलेज को क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया। यहां लगातार डॉक्टर, नर्स और 3 टाइम का खाना दिया गया। अब तक तकरीबन 12 हजार लोगों को इंस्टिट्यूशनल क्वारंटाइन किया गया है। कुल 12 क्वारंटाइन केंद्र बनाए गए थे, उनमें से 3 रोगी कम होने के बाद बंद हो गए हैं।

तकरीबन ढाई हजार लोगों की टीम यहां तैनात थी
धारावी के लिए बीएमसी 2450 लोगों की एक टीम तैनात थी। जो लोग को ट्रेस करने, टेस्ट करने और ट्रीटमेंट करने का काम कर रहे थे। इसमें डॉ।, नर्स के साथ-साथ सैनिटाइजेशनवेल और सफाईकर्मी भी शामिल थे। इसके साथ 1250 लोगों की कॉन्ट्रेक्ट मेडिकल टीम भी यहां जुटी हुई थी। ये ज्यादातर लोगों की स्क्रीनिंग का काम करते थे।

टॉयलेट फोकस
संक्रमण बढ़ने का सबसे बड़ा करण यहां के सार्वजनिक शौचालय को माना गया है। जिसे तकरीबन 80% लोग इस्तेमाल करते हैं। यहां तकरीबन 450 परमानेंट टॉयलेट हैं। बी परिषद के लोगों ने उन्हें दिन में 5 से 6 बार सैनिटरीज़ करना शुरू किया। हर टॉयलेट के बाहर ब्रांडोंवाश रखा गया था। प्राथमिक कंपनियों की सहायता से यहां मुफ्त में हाथ धोने का साबुन बांटा गया।

पहले दिन में आते थे 100 से ज्यादा केस, अब सिर्फ 2 केस
एक अप्रैल को धारावी में पहला मामला सामने आया था। इसके बाद हर सप्ताह लगभग 100 केस सामने आए। अब यह संख्या बिल्कुल निचले स्तर पर आकर 2 हो गई है।

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