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  • डोनाल्ड ट्रम्प मिलिट्री डॉक्टर्स अपडेट, अमेरिकी राष्ट्रपति अभियान 2020 समाचार; यहाँ न्यूयॉर्क टाइम्स से नवीनतम समाचार है

वॉशिंगटन2 घंटे पहले

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  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कोरोनाटिक होने के बाद तीन दिन तक आर्मी अस्पताल में एडमिट रहे
  • अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद ट्रम्प ने कहा- कोरोना से डरने की जरूरत नहीं है, यह अपने ऊपर हावी न होने दें।

कोरोनात्मक होने के बाद डोनाल्ड ट्रम्प तीन दिन मायलैंड के वाल्टर रे नेशनल मिलिट्री मेडिकल सेंटर में रहे। सोमवार को वे डिस्चार्ज हुए। इस दौरान वे डॉक्टरों से उन्हें जल्द डिस्चार्ज करने की गुजारिश करते रहे। कोरोनावायरस की शुद्धता को उन्होंने हमेशा नकार दिया। इससे डॉक्टरों के सामने भी परेशानी खड़ी हो गई है। क्योंकि, यह पेशेंट उनका बॉस भी था।

कोरोना को लेकर ट्रम्प क्या सोचते हैं, यह अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद उनके एक ट्वीट से पता चलता है। ट्रम्प ने इस ट्वीट में कोरोना की तुलना मौसमी फ्लू से कर दी। उन्होंने कहा कि फ्लू का मौसम आ रहा है। हर साल फ्लू से एक लाख मौतें होती हैं। वैक्सीन के बावजूद लोग मरते हैं।

वंडरर इन शेफ की बात कैसे नकारे
सीन कोनले व्हिट हाउस के फिजिशियन और नेवी के डॉ। हैं। प्रेसिडेंट ही सेनाओं कान्दरर इन चीफ होता है। जाहिर सी बात यह है कि डॉ कोनले के लिए ट्रम्प का नंबर मानना ​​मजबूरी था। क्योंकि, आर्मी में बॉस के भर्ती की अनदेखी नहीं की जा सकती है। यह सबसे बड़ा अपराध माना जाता है। देश के कुछ पूर्व राष्ट्रपति की तरह ट्रम्प ने भी अपने लिए मिलिट्री डॉक्टर ही चुना। कोनले यूएस नेवी में लेफ्टिनेंटेंडर की रैंक में अनंत करते हैं। सोमवार को उन्होंने कहा- राष्ट्रपति की सेहत पर ध्यान देना होगा। एक खत्म नहीं हआ है। हालांकि, उन्होंने ट्रम्प के व्हिट हाउस लौट जाने को गलत मानने से इनकार कर दिया।

अच्छा प्रस्तुत करने वाला ट्रम्प साबित हुआ
डॉ। कोनले ने कहा- प्रेसिडेंट जितने दिन यहां रहे, हमारे लिए अच्छे मरीज साबित हुए। उन्होंने हमारी मेडिकल टीम को पूरी तरह से सहयोग किया। उन्होंने एक बार भी टीम को परेशान नहीं किया। कोनले ने यह बातें ट्रम्प के व्हिट हाउस निकल जाने के बाद कहीं। मिलिट्री हॉस्पिटल में भी ट्रम्प ही बॉस थे। वाल्टर री नेशनल मेडिकल सेंटर है। ट्रम्प ने भी वही डॉक्टर चुना जो स्वास्थ्य के मामले में वही बातें बताए जो वे चाहते थे।

सियासत पर ज्यादा ध्यान दें
‘द प्रेसिडेंट अनुमति ए सिक मैन’ यानी राष्ट्रपति बीमार व्यक्ति हैं, पुस्तक के लेखक मैथ्यू एल्जियो कहते हैं- राष्ट्रपति ने यह निर्णय (अस्पताल से डिस्चार्ज होने का) सियासत की वजह से किया। दवाई या इलाज को उन्होंने प्राथमिकता नहीं दी। यहां आप पॉलिटिक्स और मेडिसिन में मामले को साफ देख सकते हैं। मैथ्यू के मुताबिक, ट्रम्प के फैसले से जनता के उस अधिकार का हनन हुआ जिसके तहत उसे प्रेसिडेंट की हेल्थ के बारे में जानने का हक है। इस बारे में एक कमिशन मेकर सच सामने लाया जाना चाहिए।

टीम भी मजबूर थी
एल्जियो कहते हैं- ट्रम्प ने अपनी सेहत की शुद्धता को छिपाया। उनकी टीम तो मजबूर कही जा सकती है। अब्राहम लिंकन भी गंभीर रूप से बीमार हुए थे। उन्होंने इसे हल्के में भी लिया। वुडरो विल्सन को हार्ट स्ट्रोक आया था, इस पर चार महीने तक पर्दा डालकर रखा गया था। ग्रोवर क्लीवलैंड की कैंसर सर्जरी की बात तो लगभग 25 साल छिपाई गई। फ्रेंकालिन रूजवेल्ट बीमारी को ताउम्र छिपाते रहे। यही वैरेन हार्डिंग ने किया है।

कारण राजनीतिक ही था
विलियम कॉलेज की प्रोफेसर और लेखिकासैन डन कहती हैं- रूजवेल्ट ने सेहत पर गंभीर भ्रम की बात छिपाई। इसकी वजह यह थी कि उसी साल चुनाव होने थे। अब शायद डोनाल्ड ट्रम्प भी इसी तरह चल रहे हैं। वे भी स्वास्थ्य डेंजर को तवज्जो नहीं दे रहे हैं। उनका बर्ताव भी बेहद गैरकानूनी है। वो महामारी की शुद्धता को समझ नहीं रहे हैं। उनके डॉ। भी अपने हिसाब से टाइमलाइन बता रहे हैं, उनकी बातों में भी गंभीरता नहीं दिखती।

केवल भ्रम फलेगा
कुल मिलाकर, ट्रम्प के अस्पताल में एडमिट होने से भ्रम ही पैदा हुआ। उनके कई सहयोगी भी पॉजिटिव पाए गए हैं। अब ये माना जा रहा है कि ट्रम्प की कैरेल वेस्ट विंग ज्यादा कर रही है और डॉ कम है। ट्रम्प ने अपना रूटीन भी पुराना ही रखा है। ये जानते हैं कि वे रिस्क ले रहे हैं कि उनकी उम्र और वजन के लिहाज से यह बीमारी खतरनाक साबित हो सकती है। पूर्व स्वास्थ्य कमिश्नर लीना वेन कहती हैं- इन्फेक्शन होना किसी को अस्पताल में रखने की सही वजह नहीं हो सकती। लेकिन, अगर कोई पेशेंट सटकर दूसरों को खतरे में डाल रहा है तो फिर उसकी मर्जी के खिलाफ भी उसे अस्पताल में रखा जा सकता है।

सेना का भी नुकसान
होमलैंड सिक्योरिटी और डिफेंस डिपार्टमेंट के पूर्व अफसर डेविड लप्पन कहते हैं- जब राष्ट्रपति ही सेहत के बारे में फैसला लेने लगे तो यहां आकर डॉ और अस्पताल के हाथ बंध जाते हैं। इससे तो मिलिट्री और डॉक्टरों का भी नुकसान है। डॉ कोनले ने सोमवार को यह नहीं कहा कि राष्ट्रपति को गुरुवार को फंड रेजिंग प्रोग्राम के लिए न्यूजर्सी जाना चाहिए। उन्होंने सियासी बातों में पड़ने से इनकार कर दिया था। कोनले ने कहा था- मैं इस बारे में बात नहीं करना चाहता।





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By GAUTAM

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