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  • डोनाल्ड ट्रम्प यूएस एच 1 बी वीजा | डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने हिट होने की नई भारतीय एच 1 बी वीजा नियमों की घोषणा की।

वॉशिंगटनएक घंटा पहले

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डोनाल्ड ट्रम्पिसा ने चुनाव से ठीक पहले एच -1 बी वीजा नियम सख्त कर दिए हैं। भारत के आईटी प्रोफेशनल्स पर इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है। (फाइल)

  • फैसले का भारतीयों पर ज्यादा असर पड़ेगा, क्योंकि 70% एच -1 बी वीजा भारतीयों को मिलते हैं

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले ट्रम्प प्रशासन ने एच -1 बी वीजा को लेकर सख्त कदम उठाया है। ट्रम्प प्रशासन ने एच -1 बी वीजा में कटौती और वेतन आधारित प्रवेश नियमों को सख्त कर दिया है। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर भारत के आईटी प्रोफेशनल्स पर पड़ेगा, क्योंकि हाल के वर्षों में एच -1 बी वीजा की 70% तक की भागीदारी भारतीयों की रही है।

डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्युरिटी (एसडीएस) के कार्यकारी उप सचिव केन कुकसिनेली ने कहा- ‘जिन लोगों ने एच -1 बी वीजा के लिए आवेदन किया है, उनमें से एक तिहाई को नए नियमों के तहत वीजा नहीं मिल सकेगा।’ न्यूनतम वेतन आवश्यकताओं के लिए। श्रम विभाग के संशोधन गुरुवार से प्रभावी होने के आसार हैं। दो एस का एच -1 बी संशोधन भी 60 दिनों में लागू हो जाएगा।

यदि नौकरी छूट जाती है तो 60 दिन में नई खोजनी होगी
यदि किसी एच -1 बी वीजा होल्डर की कंपनी ने उसका कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर लिया है, तो नए नियमों के अनुसार वीजा स्टेटस बनाए रखने के लिए उसे 60 दिनों के अंदर नई नौकरी तलाशनी होगी। वरना उसे अपने देश लौटना पड़ेगा।

निर्णय के मायने
भारतीय पेशेवरों के लिए मौके में कमी आएगी
पिछले साल एच1-बी वीजा के लिए 2.5 लाख आवेदन मिले थे, जिनमें से 1.84 लाख भारत से थे। यह संख्या 2016 के मुकाबले 25% कम है। अब अगर यह संख्या एक तिहाई तक घट जाती है तो बहुत नुकसान भी भारतीयों को ही होगा। ट्रम्प 2016 में राष्ट्रपति बने थे, केवल से वीजा नियमों के लगातार सख्ती बढ़ रही है।

नागरिकता पाना और कठिन होगा
अमेरिका अभी भी हर साल 85 हजार एच 1-बी वीजा जारी करता है। ये सेजदतर 5 साल बाद अमेरिकी नागरिकता हासिल करने में कामयाब रहे हैं। अब अगर वीजा ही कम मिलेंगे तो नागरिकता पाने वालों की संख्या भी घटेगी। अभी नागरिकता के लिए 3.5 लाख भारतीयों के आवेदन पेंडिंग हैं।

भारतीय आईटी कंपनियाँ
अमेरिका में हर साल कुल एच -1 बी वीजाधारकों में से 15% सिर्फ टीसीएस, इन्फोसिस और विप्रो में खोज पाते हैं। श्रम नियमों में बदलाव से सैलरी बढ़ाना भी प्रस्तावित है। इसलिए इन कंपनियों के लिए एच 1-बी वीजा के माध्यम से कस्टमर की साइट पर काम करवाना एक्सपर्ट करेंगे। अमेरिका में काम कर रहे 50 से ज्यादा भारतीय कंपनियां एच -1 बी वीजा के तहत केवल कर्मचारी रखती हैं।

लेकिन, ट्रम्प को फायदा मिल सकता है
यह फैसला ट्रम्प की चुनावी रणनीति का हिस्सा है। उनकी पार्टी कहती आई है कि एच -1 बी वीजा के कारण 5 लाख अमेरिकियों की संपत्ति बाहरी लोगों को मिल गई। ईमेल बता रहे हैं कि ट्रम्प अपने कोर वोटर्स पर पकड़ खो रहे हैं, इसलिए वे लगातार अमेरिकियों के हित पहले रखने की बात कह रहे हैं।) वे मूल अमेरिकी वोटर्स का ध्रुवीकरण चाहते हैं।





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By GAUTAM

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