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वॉशिंगटन27 मिनट पहले

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डोनाल्ड ट्रम्प यह शब्द अमेरिका के लिए देश और विदेश में घातक साबित हुआ। उन्होंने अपने पावर्स का गलत इस्तेमाल किया और राजनीतिक वकीलों को उनके वाजिब हक नहीं दिए। कुछ ऐसी बातें भी कीं, जिनके असर पीढ़ियों तक ऑनलाइन हैं। जनता के हितों से ज्यादा अपने व्यवसाय और राजनीतिक फायदे को ध्यान में रखा। अमेरिकी नागरिकों की जिंदगी और उनकी आजादी का सम्मान नहीं किया गया। सही बात तो ये है कि वो इस पद के लायक ही नहीं हैं।

आलोचना होती रहेगी
ट्रम्प के कार्यकाल के दौरान भी हम नस्लवाद और बंटवारे की नीतियों की आलोचना करते रहे। हमने हर बार और हर मौके पर उनकी बंटवारे वाली नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। वे अपने ही देश के लोगों के खिलाफ बोलते रहे और हमने हमेशा इसका विरोध किया। ये बात सही है कि सीनेट ने राष्ट्रपति को ताकत के बेजा इस्तेमाल किया और बाधा डालने का कसूरवार अधिसूचित नहीं किया। लेकिन, हमने इस बात की कोशिश जारी रखी कि उनके राजनीतिक विरोधी ट्रम्प के खिलाफ फर को बैकाल बॉक्स तक पहुंचाने में कामयाब रहे।

तीन नवंबर टर्निंग पॉइंट होगा
तीन नवंबर को चुनाव होगा और यह दिन टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। बहुत साफ तौर पर कहें तो यह चुनाव देश का भविष्य निर्धारित करेगा। इसके माध्यम से नागरिकों को वह रास्ता मिल सकता है, जिस पर वे चलना चाहते हैं। अमेरिका के नागरिकों ने ट्रम्प के चार साल के पहले कार्यकाल को झेला। अगर वे फिर चार साल के लिए चुने जाते हैं तो अमेरिका के लिए इससे बुरा कुछ नहीं होगा।

ट्रम्प हो रहे हैं
वोटिंग के लिए लोग लाइन में लगे हुए हैं। इस दौर में भी ट्रम्प डेमोक्रेटिक प्रॉसेस को तबाह करने की कोशिश कर रहे हैं। उन परंपराओं को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं जो उनके पहले के राष्ट्रपति ने बनाए हैं। अधिकार प्राधिकरण हस्तांतरण से इनकार कर रहे हैं। वे दावा करते हैं कि चुनाव तभी सही होंगे जब उनकी जीत होगी। अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे सत्ता की जंग को अदालतों और सड़कों तक ले जाएंगे। अब यह मौका है जब अमेरिका इस फर को रोक सकता है।

देश के लिए फिट नहीं हैं ट्रम्प
ये हालात में हम देश को यह फिर से लागू करने की कोशिश कर रहे हैं कि ट्रम्प देश के नेता के तौर पर फिट नहीं हैं। उनके पिछले कार्यकाल में हिंसा, भ्रष्टाचार और सत्ता से खिलवाड़ हुआ। क्लाइमेट चेंज, इमीग्रेशन, महिला अधिकार और राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों पर उनका रिकॉर्ड देखिए। इन मुद्दों पर सुधार के लिए जरूरी है कि ट्रम्प अब सत्ता में न रहें। अगर वे हार भी जाते हैं तो नुकसान की भरपाई में कई साल लग जाएंगे। वे अमेरिकी इतिहास के सबसे खराब राष्ट्रपति साबित हुए। चार साल में देश की ज्यादातर मुश्किलें इसलिए हल नहीं हो पाईं क्योंकि सबसे बड़ी समस्या ही राष्ट्रपति थे।

पर्यावरण पर कुछ नहीं किया
पर्यावरण के मुद्दे पर ट्रम्प चुप रहे। इस मुद्दे पर किसी से सहयोग नहीं किया गया। इमीग्रेशन पर उनकी कोई नीति ही नहीं थी। स्वास्थ्य कैर पर जो बराक ओबामा के कार्यकाल में हुआ, उस बिल को ही उन्होंने बदल दिया। ये भी अब तक नहीं बताया गया है कि इसकी जगह क्या नया करेगी। लाखों अमेरिकी बेरोजगार हो गए। वे आम आदमी की बात करते हैं लेकिन काम अमीरों के लिए करते हैं। नॉर्थ कोरिया के किम जोंग उन और रूस के पुतिन जैसे लोगों के साथ नजर आते हैं। चीन से कहीं के नाम पर लाखों अमेरिकियों का टैक्स दांव लगाया गया लेकिन बदले में अब तक कुछ हासिल नहीं हुआ है।

महामारी पर अति पाने में नाकाम
महामारी के इस दौर में यह साबित हो गया कि नेता के तौर पर ट्रम्प नाकम हैं। लोगों की जान बचाने के बजाए वे इसे सार्वजनिक रिलेशन प्रॉब्लम बता रहे हैं। कोरोना के खतरे को नजरअंदाज किया और नतीजा सामने है। स्वयं भी चेतन हुआ। वायरस की रोकथाम या इस पर काबू पाने के पहले ही इकोनॉमिक एक्ट रेटज को शुरू करने पर जोर दे रहे हैं। बेरोजगारों की तादाद बढ़ रही है, लेकिन ट्रम्प को इसकी फिक्र नहीं है। वायरस अब तक दो लाख से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है।

परिणामों पर अभी तक चिंता क्यों
अभी चुनाव नहीं हुआ है। लेकिन, ट्रम्प वोटिंग को लेकर महीनों पहले से सवाल खड़े कर रहे हैं। वे मेल इन बैटल में फ्रॉड की आशंका जताते हैं और खुद इसी तरह से वोटिंग करते हैं। रिचर्ड निक्सन और रोनाल्ड रीगन के दौर में भी सत्ता का गलत इस्तेमाल हुआ। लुई और क्लिंटन के दौर में बहुत बड़ी गलतियाँ हुईं। लेकिन ट्रम्प आगे निकल गए। उन्होंने अपने राष्ट्रपति के तौर पर ली गई शपथ का भी पालन नहीं किया। अमेरिकी संविधान को नहीं माना गया। अब मतदाताओं की बारी है कि वे पिछले चुनाव में की गई शक्तियों को सुधारें।





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By GAUTAM

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