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वॉशिंगटनएक घंटा पहले

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अमेरिकी कंपनियां एच 1-बी वीजा के तहत दूसरे देशों के तकनीकी तकनीकी एक्सपर्ट्स को नियुक्त करती हैं। इसमें ज्यादातर भारतीय शामिल हैं। -फाइल फोटो

  • व्हाइट हाउस ने फ्रॉड डिटेक्शन फोर्स को ज्यादा अधिकार दिया है, इससे अब वीजा मंजूरी से पहले होने की जांच ज्यादा सख्त हो जाएगी
  • व्हिट हाउस ने नए वीजा नियमों पर कहा- इससे अमेरिकी लोगों की मेहनत बचाने और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में मदद मिलेगी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चुनाव से पहले मंगलवार की रात एच -1 बी वीजा से जुड़े नियमों में बदलाव कर दिए। इनसे भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स की मुश्किल बढ़ सकती है। इसमें भगतों से जुड़े पारामीटर्स बढ़ा दिए गए हैं। कंपनियों के लिए विदेशी कर्मचारियों को काम पर रखने की शर्तों में बदलाव किए गए हैं। व्हाइट हाउस ने फ्रॉड डिटेक्शन फोर्स को ज्यादा अधिकार दिया है। इससे अब वीजा मंजूरी से पहले होने वाली जांच काफी सख्त हो जाएगी। व्हिट हाउस के डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने एच 1 बी वीजा से जुड़े दो इंटैरिम फाइनल रुल्स (आईएफआर) के जरिए ये बदलाव किए हैं।

नए नियम में थर्ड पार्टी क्लाइंट के तौर पर नियुक्त किए जाने वाले कर्मचारियों के वीजा के मान्य रहने का समय बहुत कम कर दिया गया है। ऐसे एच 1 बी वीजा वाले कर्मचारी अब ज्यादा से ज्यादा एक साल तक ही काम करेंगे। पहले उन्हें तीन साल तक काम करने की इजाजत दी जाती थी।

अब विशेष टैलेंट वालों को मौका मिलेगा: व्हाइट हाउस

नए नियम जारी करने के बाद व्हाइट हाउस ने कहा- राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अमेरिका के वर्क वीजा कार्यक्रम में सुधार कर रहे हैं। वीजा जारी करने में विशेष टैलेंट और उच्च स्किल्ड वर्कर्स को प्राथमिकता दी जाएगी। कोरोना महामारी की वजह से देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। नए नियमों से अमेरिकी लोगों की क्षमता बचाने और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में मदद मिलेगी। राष्ट्रपति ट्रम्प जानते हैं कि एच 1 बी वीजा स्पेशल टैलेंट वाले लोगों के लिए है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती है। अब तक इस कार्यक्रम का गलत उपयोग हुआ। इसे एक सस्ते वीजा कार्यक्रम के तौर पर इस्तेमाल किया गया।

आईटी कंपनियों की कैसे बढ़ेगी मुश्किल?

एच 1 बी वीजा के आधार पर विदेशी इमलाई रखने वाली कंपनियों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। उन्हें इमिग्रेशन एजेंसियों के सामने साबित करना होगा कि जिन कर्मचारियों की जरूरत है, वे अमेरिका में नहीं हैं। अब अमेरिका में काम कर रही भारतीय आईटी कंपनियों को स्थानीय लोगों को काम पर रखने के लिए उन्हें ज्यादा रुपया देना होगा। यदि भारतीय कर्मचारियों के लिए वीजा जारी करवाती हैं तो इसके लिए भी पहले से ज्यादा राशि देनी होगी।

USITA ने कई बार कहा है कि कई अमेरिकी और भारतीय आईटी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों को एच -1 बी वीजा जारी करवाती हैं। इससे उन्हें टैक्स बचाने में मदद मिलती है। अब वे ऐसा नहीं करेंगे।

हर साल औसतन 85,000 जारी होता है जिसमें एच -1 वीजा होता है

एच -1 बी वीजा पर नजर डालें तो अमेरिका 85,000 वीजा हर साल हाई स्किल्ड वर्कर्स को जारी करता है। यह वीजा 6 साल के लिए रहता है। 2019 में 188,123 एच। 1 वीजा जारी किया गया था। हालांकि इसमें रिन्यूअल वाले भी वीजा थे। भारतीयों के लिए 131,549 वीजा जारी किए गए थे। जबकि बालनिज नागरिकों के लिए 28,483 वीजा जारी किए गए थे। इस साल मई 2020 में केवल 143 एच -1 वीजा जारी किए गए थे। जबकि 2019 के मई में 13,367 वीजा जारी किए गए थे।

पिछले साल 18,354 भारतीयों को जारी किया गया था एल 1 वीजा

एल 1 वीजा की बात करें तो यह हाई लेवल और स्पेशललाइज्ड कंपनी कर्मचारियों के लिए जारी किया जाता है। यह सात वर्षों तक के लिए होता है। 2019 में 76,988 वीजा जारी किया गया था। इसमें से 18,354 वीजा भारतीयों के लिए जारी किए गए थे। ब्रिटेन के लिए 5,902 वीजा जारी किए गए थे। आईटी के लिए 5,295 वीजा जारी किए गए थे।

एच -1 बी वीजा क्या है?

एच -1 बी वीजा गैर-विदेशी वीजा है। अमेरिकी कंपनियां इसके तहत दूसरे देशों के तकनीकी एक्सपर्ट्स को नियुक्त करती हैं। नियुक्ति के बाद सरकार से इन लोगों के लिए एच -1 बी वीजा मांगा जाता है। अमेरिका की ज्यादातर आईटी कंपनियां हर साल भारत और चीन जैसे देशों से लाखों कर्मचारियों की नियुक्ति इसी तरह के वीजा के जरिए करती हैं। नियम के अनुसार, यदि कोई एच -1 बी वीजाधारकों की कंपनी ने उसके साथ कांट्रैक्ट खत्म कर लिया है तो वीजा स्टेटस बनाए रखने के लिए उसे 60 दिनों के अंदर नई कंपनी में जॉब तलाशना होगा। बीएसआईएस के मुताबिक, एच -1 बी वीजा के सबसे बड़े लाभार्थी भारतीय ही हैं।





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By GAUTAM

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