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  • आतंकी कंप्यूटिंग के मामले में एनआईए ने गिरफ्तार किए गए डीएसपी देविंदर और हिजबुल के आतंकवादियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
  • देविंदर सिक्योर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार हाईकमीशन के अधिकारियों से बातचीत करता था, उन्हें खुफिया जानकारी देता था

आदित्य राज कौल

Jul 06, 2020, 11:17 PM IST

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में आतंकी घुसपैठ के मामले में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) ने आरोपी डिप्टी एसपी देविंदर सिंह, हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकवादी सैयदवीद मुश्ताक उर्फ ​​रविद पबू, रफी अहमद राठर, तनवीर अहमद वानी, सैयद इरफान और वकील इरफान शफीक को गिरफ्तार किया। चार्जशीट दाखिल करना।

भास्कर को जानकारी मिली है कि एनआईए की पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कुबूल किया है कि वे लगातार पाकिस्तानी हाईकमीशन के अधिकारियों के संपर्क में थे। हाईकमीशन में एक अधिकारी शफाकत असिस्टेंट के तौर पर काम करता था। लेकिन, मूल रूप से वह जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों की भर्ती, टेरर फाइनेंसिंग और हवाला कारोबार का जरिया था।

इन अधिकारियों ने देविंदर को खुफिया सूचनाएं देने के लिए तैयार किया था। देविंदर भी इनसे लगातार सिक्योर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए बातचीत करता था।देविंदर को 11 जनवरी 2020 को आतंकी नवाद के साथ गिरफ्तार किया गया था।

एनआईए की चार्जशीट में क्या आरोप तय किए गए

  • एनआईए ने जनवरी 2020 में देविंदर कोविद बाबू और दो अन्य आतंकवादियों के साथ गिरफ्तार किया था। 6 महीने बाद एनआईए ने अपनी चार्जशीट पेश की है। एनआईए ने कहा कि देविंदर नेवीद बाबू, इरफान शफी मीर, इरफान अहमद के लिए जम्मू में ठिकाने का इंतजाम किया था।
  • देविंदर ने हिजबुल के इन आतंकवादियों के आने-जाने के लिए अपने वाहन का इस्तेमाल किया। इसके अलावा उन्हें हथियार देने का भी वादा किया गया था।
  • सभी आरोपी हाईकमीशन में असिस्टेंट के तौर पर काम करने वाले शफाकत के लगातार संपर्क में थे, जो हवाला ट्रांसमिशन, टेरर फंडिंग और आतंकवादियों की भर्ती में शामिल था। देविंदर को खुफिया सूचना देने के लिए पाकिस्तानी अधिकारियों ने तैयार कर लिया था।

देविंदर की मदद सेवीद बाबू को मिलते थे हथियार

एनआईए की जांच में खुलासा हुआ है कि पूर्व कॉन्स्टेबल रविद बाबू जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कई हत्याओं में शामिल थे। वह भोलेभाले मुस्लिम युवाओं को हिजबुल में शामिल करता था। उसे एलओसी ट्रेडर तनवीर अहम वंत से फंडिंग मिलती थी। तनवीर उसे टैगके स्थित व्यापारियों की मदद से निधि मुहैया करवाता था।
देवीद बाबू सीमा पार से हथियार तस्करों की मदद से जोधा हासिल करता था। इसके अलावा देविंदर भी उसके जोन्स का इंतजाम करता था। इन्हीं हथियारों का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों में किया गया था।

पाक में हिजबुलंदरवास और आईएसआई अफसरों से भी मुलाकात की गई थी
सभी आरोपी पाकिस्तान स्थित हिजबुल मुजाहिदीन और पाकिस्तानी एजेंसियों के साथ मिलकर भारत में हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने की सूचना रच रहे थे। हिजबुल के सरगना सैयद सलाहुद्दीन और उसे डिप्टींदरर जम्मू स्थित आतंकी तेंदुओं को मदद करते हैं।

एक अन्य आरोपी इरफान शफी मीर ने पाकिस्तान में हिजबुल के टॉपैंडरों से मुलाकात की थी। इसके अलावा वे आईएसआई के उमर चीमा, अहसान चौधरी और सुहाल अब्बास से भी मिलीं। इरफान को जिम्मेदारी दी गई थी कि वह हवाला ट्रांसमिशन के लिए नए चैनल एक्टिवेट करे ताकि कश्मीर घाटी में आतंकी गतिविधियों के लिए फंडिंग की जा सके।

मीर के साथ पाकिस्तानी हाईकमीशन के अधिकारी भी संपर्क में थे। वे मीर को निधि मुहैया करवाते थे ताकि भारत सरकार के खिलाफ सेमिनार करवाए जा सकें और भीड़ इकट्ठा हो सके।

मीर को पैसा और ऑर्डर हाईकमीशन ही देता था। मीर के माध्यम से ही कई कश्मीरियों को वीजा पर पाकिस्तान भी भेजा गया।

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