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  • चीन ताइवान के साथ सीमा पर सैनिकों की संख्या बढ़ाता है, सुपरसोनिक मिसाइलों को तैनात करता है जो लंबी दूरी की हड़ताल करते हैं

बीजिंग20 मिनट पहले

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चीन ने गुआंगडोंग राज्य के मिलिट्री डे पर डीएफ -17 मिसाइलों को तैनात किया है। इस बेस पर बीते एक दशक से दूसरी मिसाइलें तैनात थीं। -फाइल फोटो

  • कैमरों से ली गई तस्वीरों से पता चला है कि चीन ने ग्वांगडों और फुजियन के घरों फोर्स बेस और मरीन कोस पर सुविधाएं बढ़ा दी हैं।
  • चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पांच दिन पहले सैनिकों को आदेश दिया था कि वे युद्ध के लिए उच्च खोज लेव की तैयारियां बनाए रखेंगे

चीन की सेना ताइवान पर हमला करने की योजना बना रही है। इसने ताइवान से सटे दक्षिण पूर्वी तट पर नौसैनिकों की तादाद बढ़ानी शुरू कर दी है। चीन इस इलाके से एक दशक से बहुत अधिक समय से तैनात पुरानी डीएफ -11 और डीएफ -15 मिसाइलों को हटा रहा है। इनकी जगह आधुनिक सुपरसोनिक डीएफ -17 मिसाइलों को तैनात किया जा रहा है। ये मिसाइलें ज्यादा दूरी तक चलने कर सकती हैं। दक्षिण बालना मॉर्निंग ने पोस्ट किया रक्षा विशेषज्ञों के हवाले से जारी रिपोर्ट में इसका दावा किया गया है।

कैमरों से ली गई तस्वीरों से चीन की तैयारियों का पता चला है। चीन ने ग्वांगडोंस और फुजियन के घरों फोर्स बेस और मरीन कोस पर सुविधाएं बढ़ा दी हैं। ये दोनों बेस पर पर्याप्त हथियारों की तैनाती कर दी गई है। कनाडा के कांन्वा डिफेंस रिव्यू ने अपने पास ऐसी ब्लूटूथ फोटो होने की बात कही है।

ताइवान का समर्थन करने पर अमेरिका से चीन नाराज
अमेरिका ने बीते कुछ समय से ताइवान का खुलकर समर्थन किया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के सीनियर ऑफिसर कीथ क्रैच सितंबर में ताइवान के दौरे पर पहुंचे थे। हर संभव मदद का भरोसा दिलाया था। दो दिन पहले एक अमेरिकी जंगी पुल ताइवान की खाड़ी में गश्त करते हुए नजर आया था। इसपर चीन ने नाराजगी जाहिर की थी। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग मंगलवार को गुआंगडोंग प्रांत के मिलिट्री बेस के दौरे पर पहुंचे थे। उन्होंने सैनिकों को आदेश दिया कि वे युद्ध के लिए उच्च प्रदर्शन लेवल की तैयारियां बनाए रखें। अपने दिल-दिमाग को भी उसके लिए तैयार करें।

ताइवान को अपना हिस्सा बताता है कि चीन
ताइवान पर भी कभी चीन की रूलिंग पार्टी का कंट्रोल नहीं रहा। हालांकि, चीन ताइवान को अपना हिस्सा बताता है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ताइवान को हमला करने की धमकी देती रही है। चीन के विरोध के कारण ही चीन विश्व स्वास्थ्य असेंबली का हिस्सा नहीं बन पाया था। चीन की शर्त थी कि असेंबली में जाने के लिए ताइवान को वन बालना नीति को मानना ​​होगा, लेकिन ताइवान ने शर्त ठुकरा दी थी। ताइवान में जबसे डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी सत्ता में आई है तबसे चीन के साथ संबंध बहुत खराब हुए हैं।





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By GAUTAM

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