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वॉशिंगटन37 मिनट पहले

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साइबेरियन आर्कटिक में भी तापमान औसत से ऊपर बना हुआ है। आर्कटिक सागर पर बर्फ का आवरण अपने दूसरे न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। -फाइल फोटो

क्लाइमेट चेंज सर्विस कॉपरनिकस के मुताबिक, इस साल सितंबर महीने की दुनिया में अब तक का सबसे गर्म महीना रहा है। यह पिछले साल के सितंबर की तुलना में 0.05 डिग्री ज्यादा गर्म था। यूरोपियन यूनियन का अर्थ ऑब्जर्वेशन प्रोग्राम कॉपरनिकस ने कहा कि साइबेरियन आर्कटिक में भी तापमान औसत से ऊपर बना हुआ है। आर्कटिक सागर पर बर्फ का आवरण अपने दूसरे न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। इसमें 40% तक की कमी आई है।

कहा जा रहा है कि यह साल यूरोप के लिए भी रिकॉर्ड सबसे गर्म साल है, भले ही तापमान अभी तक कुछ ठंडा हो। फ्रांस में भी 15 सितंबर के बाद रिकॉर्ड गर्मी पड़ी। ब्लैक सी के पास बेमौसम गर्म वेदर देखा गया था। पश्चिम एशिया में तुर्की, इजराइल और जॉर्डन में भी रिकॉर्ड तापमान दर्ज किया गया।

बढ़ते तापमान की वजह से ही जंगलों में आग लगी

तापमान में बढ़ते तापमान के कारण ही Yanukovych और ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में भीषण आग लगी। वहीं, इस साल अगस्त में दुनिया की सबसे गर्म जगह डेथ वैली में रिकॉर्ड 54.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया था। इससे पहले 2013 में यहां 54 ° सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया था।

इस वर्ष कार्बन का अधिक परिमाण

कॉपरनिकस के साइंटिस्ट्स के मुताबिक, पिछले महीने आर्कटिक सर्किल में लगी आग से निकलने वाला CO2 2019 की तुलना में एक तिहाई से ज्यादा था। 1 जनवरी से 31 अगस्त के बीच 244 मेगाटन कार्बन निकला, जबकि 2019 में पूरे साल भर में कुल 181 मेगाटन कार्बन का ही उत्पादन शुरू हुआ था।

मौसम और मौसम में बदलाव रहता है

कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस की डिप्टी डायरेक्टर सामंथा बर्गेस ने बीबीसी को बताया- इनमें से कुछ घटनाएं मानक हैं। हालांकि हमें इस बात की झूठी उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि साल दर साल तापमान बढ़ेगा। मौसम और मौसम में बदलाव रहता है। लेकिन इस तरह की घटनाओं से जलवायु पर आगे प्रभाव पड़ेगा।





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By GAUTAM

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