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वारसॉ2 दिन पहले

धमाके के बाद नहर का पानी 30 फीट से बहुत अधिक ऊंचाई तक ऊपर उठा गया। बम को डिफ्यूज करने से पहले नहर के पास 750 लोग को दूसरी जगह ले जाना गया था।

  • बम को नहर में ले जाने वाले सभी डाइवर्स इसके फटने से पहले ही डेंजर जोन से बाहर निकल गए थे
  • बम का नाम टालबॉय था, यह सितंबर 2019 में जेकिन शहर में नाले की खुदाई करने के दौरान मिला था

पोल में कुछ दिन पहले दूसरे विश्व युद्ध के समय का सबसे बड़ा बम मंगलवार को बम डिफ्यूज करने के दौरान फट गया। पोल की नेवी के डाइवर्स इसे डिफ्यूज करने के लिए एक नहर में पानी के नीचे ले गए थे। धमाके में किसी को नुकसान पहुंचने की जानकारी नहीं है। बम को नहर में ले जाने वाले सभी डाइवर्स इसके फटने से पहले ही डेंजर जोन से बाहर निकल गए थे।

सेकंड वर्ल्ड वार के दौरान इस्तेमाल में लाए जाने वाले इस बम का नाम टॉल बॉय था। सितंबर 2019 में किंग के जेकिन शहर में नाले की खुदाई करने के दौरान मिला था। सेकंड वर्ल्ड वार के दौरान ब्रिटेन की रॉयल एयरफोर्स (आरएएफ) इन बमों का इस्तेमाल किया था। इसका कुल वजन 5,400 किलोग्राम है। था। इसके अंदर 2,400 किग्रा। हाइवे भरा था।

अब इस बम से कोई नहीं नहीं: पोल नेवी

बम को डिफ्यूज करने के लिए ले जाने से पहले पिएस्ट नहर के पास से 750 लोगों को बचाया गया था। नेवी के प्रवक्ता ग्रिगोर्ज लेवेंडॉस्की ने बताया कि बम को डिफ्लैगरेशन स्पैल से डिफ्यूज करने की योजना थी। हालाँकि, यह डेटोनेट हो गया है। यह फट गया है इसका मतलब यह पूरी तरह से इनएक्टिव हो चुका है। अब इससे किसी तरह का खतरा नहीं है।

यह इस तरह का क्ले का सबसे बड़ा ऑपरेशन है

उन्होंने बताया कि पोल में सेकंड वर्ल्ड वार के समय के कई ऐसे बम, मिस या ग्रेनेड मिले हैं जो फटे नहीं थे। हालाँकि, यह अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन था। इस बम को ब्रिटिश एयरोनॉटिकल इंजीनियर बार्न्स वेलिस ने डिजाइन किया था।

एक्सपर्ट्स बम के नहीं फटने की वजह पता नहीं चल पाई है

रॉयल एयर फोर्स ने 1945 में जर्मन क्रूजर लुटजो पर हमला करने के लिए इसे गिराया था। आम तौर पर यह जर्मनी के नाजी सरकार के पूरक अधिकारियों को नष्ट करने के लिए गिराया जाता है। एक्सपर्ट यह पता नहीं कर सकता है कि आखिरकार यह बम अब फिएट क्यों नहीं था।





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By GAUTAM

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