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वॉशिंगटन44 मिनट पहले

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  • मंगलवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और डेमोक्रेट पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडेन के बीच पहली प्रेसिडेंशियल डिबेट हुई
  • यह बहस कुल 6 मुद्दों पर हुई, इस दौरान कई बार दोनों कैंडिडेट्स के बीच तीखी नोंकझोंक देखने को मिली।

हर अमेरिकी को, फिर चाहे उसका राजनीतिक रुझान या विचारधारा कोई भी हो, उसे मंगलवार को हुई प्रेसिडेंशियल बहस जरूर देखनी होगी। और आगे आने वाली दोनों डिबेट्स का हर मिनट गौर से देखना चाहिए।

ट्रम्प का बर्ताव राष्ट्रीय शर्म की बात
डिबेट स्टेज पर ट्रम्प ने जो कुछ किया, वो हर लिहाज से राष्ट्रीय शर्म की बात है। उन्होंने व्हाइट सुपरमेसिस्ट्स यानी श्वेतों को अभिनय देने वाले विचारधारा की निंदा करना तो दूर, उन्हें गलत ठहराने से भी इनकार कर दिया। न ही ये भरोसा दिलाया कि वे चुनाव के नतीजों को स्वीकार करेंगे। हर अमेरिकी की यह जिम्मेदारी है कि वह इस बहस को देखे, सुने और इस पर विचार करे। किसी बात की जानकारी न हो, तर्क नहीं होता। कंजर्वेटिव्स या रिपब्लिकन अब बहुत ज्यादा देर तक इस सच्चाई को दरकिनार नहीं कर सकते कि ट्रम्प इस देश यानी अमेरिका के सिद्धांत और एकता को नुकसान पहुंच रहे हैं।

यह मुश्किल है
यह मुश्किल है। लेकिन, ऐसे कितने अमेरिकी हैं जो किसी विदेशी चुनाव में राष्ट्रपति को इस तरह का बर्ताव करते हुए देख सकते हैं। इस तरह की राष्ट्रपति जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया को धांधली और धोखा बताए। हथियारबंद लोगों और हिंसा का समर्थन करता है। श्वेतों को बेहतर बताए और अपने राजनीतिक विरोधियों से हर मसले पर उलझे।

दुखदायी की इस बहस को देखना था
हर वो अमेरिकी जो इस देश से प्रेम करता है, और जिसने यह बहस देखी। उसे बहुत दुख हुआ। गलत खबरों के माध्यम भ्रम फैलाया जा रहा है, आदानें राची जा रही है। राजनीतिक परंपराओं को खत्म किया जा रहा है। यह कोशिश की जा रही है कि लोग सच और झूठ में बात न कर पाएं। महामारी में हजारों लोग मारे गए। व्यवस्थाएँ खराब हो गईं। और ये सब वो सरकार कर रही है, जिसे ज्यादातर अमेरिकियों की सरकार ने नहीं कहा जा सकता है।

इस डिबेट में एक नेता ऐसा था जो देश के लोगों को साथ लाने की कोशिश कर रहा था। दूसरा नेता ऐसा था जिसका खुद पर ही नहीं था। भाषा अजीब और खराब थी।

ट्रम्प भी सच जानते हैं
राष्ट्रपति पांच साल तक झूठ बोलते रहे, लोगों का अपमान करते रहे। उन्हें इस बात की भी चिंता नहीं है कि आप उन्हें भ्रष्ट और खुद में खोए हुए मानते हैं। वे अपने खिलाफ बोलने वाले हर शख्स को बुरा बताते हैं। वे यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि वे सबसे ज्यादा साहसी हैं। वे कोशिश कर रहे हैं कि अमेरिकी सही और गलत में बात ही न कर पाएं।

सच ये है कि ट्रम्प अब हताश हो चुके हैं। ये ट्रम्प भी जानते हैं और पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स भी कहते हैं कि वे चुनाव हारने के रास्ते पर चल रहे हैं। वे बहुत सेटरों तक पहुंचने की कोशिश नहीं कर रहे हैं। कोई और राष्ट्रपति होता है तो शायद ज्यादा से ज्यादा लोगों के पास पहुंचने की कोशिश करता है।

वही पुराना रवैया
डिबेट के दौरान ट्रम्प ने वही सब किया, जो वे पिछले कई महीनों से करते आ रहे हैं। ट्रम्प कहते हैं कि अगर वे नहीं जीते तो चुनाव गैरकानूनी हो जाएंगे। लोकतांत्रिक प्रक्रिया को यह संशोधित सार्वजनिक रूप से दी जा रही है। डिबेट के दौरान इटली के वैलेस ने ट्रम्प से पूछा- क्या आप रील विंग मिलिटेंट्स की निंदा कर सकते हैं। खासतौर पर प्राउड बॉयज नाम के संगठन की। हिंसा के कई मामलों में उसका नाम आया है। राष्ट्रपति ने कहा कि जिन वामपंथियों से है। कुछ लोगों ने ट्रम्प के इस कट्टर रवैये की तारीफ की।

लोकतंत्र मूल्यों का भी सम्मान नहीं
वैलेस ने दोनों कैंडिडेट्स से पूछा- क्या वे चुनाव के नतीजे को मानेंगे। जो बाइडेन इससे सहमत थे। ट्रम्प ने इस मौके पर यह भी कहा कि धांधली हो सकती है। मेल इन बुलट्स पर निर्भर नहीं किया जा सकता है। जबकि, एफबीआई ने कहा है कि मेल इन बैलट्स में धांधली नहीं हो सकता है। ट्रम्प अपने समर्थकों से कह रहे हैं कि वे चुनाव को महसूस से देखें। वे समर्थकों से कह रहे हैं कि बाइडेन के प्रभाव वाले क्षेत्रों पर नजर रखी जाए।

बाद में ट्रम्प ये भी कहते हैं कि चुनाव का फैसला सुप्रीम कोर्ट में होगा। लेकिन, राष्ट्रपति ये क्यों नहीं समझते कि चुनाव का फैसला सुप्रीम कोर्ट में नहीं होता है। डिबेट में दोनों ही प्रभाव पर नहीं। कुछ लोग मांग कर रहे हैं कि बाइडेन को बाकी दो डिबेट में हिस्सा ही नहीं लेना चाहिए। लेकिन, उनके विरोधी तो यही चाहते हैं। बाइडेन को मजबूती से सामने आना चाहिए। क्योंकि, हर अमेरिकी यही चाहता है। लेकिन, हर अमेरिकी को वोट जरूर करना चाहिए। ट्रम्प जैसे तानाशाह को हराने के लिए। इसलिए इस देश को एक बुरे दौर से बाहर निकाला जा सकता है।





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By GAUTAM

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