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  • पाकिस्तान आर्मी इमरान खान | पाकिस्तान के विपक्षी दलों ने शक्तिशाली सेना और इमरान खान को समर्थन देने का विरोध किया।

इस्लामाबाद17 मिनट पहले

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पाकिस्तानी फौज और उसके मुखिया जनरल बाजवा पर आरोप है कि उन्होंने 2018 के आम चुनाव में इमरान खान की बिल्कुल मदद की।) (फाइल फोटो)

पाकिस्तान में सेना को चुनौती देने की हिम्मत किसी ने नहीं की, सत्ता ने भी नहीं। लेकिन बदलते वक्त के साथ फौज ही सबसे ज्यादा निशाने पर है। उसे सियासी पार्टियां सीधे चुनौती भी दे रही हैं। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीसीबीपी) के युवा अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी काफी देर से यह काम कर रहे थे। लेकिन, अब पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी उनके साथ आ गए हैं। इसके अलावा मौलाना फजल-उर-रहमान भी फौज पर तंज कसने मे पीछे नहीं हैं। विशेष बात ये है कि इमरान खान को सत्ता से हटाने के लिए ये तीनों ही साथ भी आ चुके हैं।

बिलावल ने की शुरुआत
2018 में इमरान खान प्रधानमंत्री बने। केवल से उन पर आरोप लग रहे हैं कि वे फौज के जरिए कुर्सी तक पहुंचे। बिलावल दो साल से अपने भाषणों में इस बात को दोहराते आ रहे हैं। अब नवाज की पार्टी (पीएमएल-एन) भी इसी तरह चल रही है। विपक्ष एकजुट होकर इमरान सरकार को गिराने के लिए सड़कों पर उतर चुका है। सरकार एक के बाद एक विपक्षी नेताओं को जेल में डाल रही है। नवाज ने पिछले दिनों विपक्ष की संयुक्त रैली को लंदन से संबोधित किया। कहा- फौज ने पिछले चुनावों में धांधली की। इसकी वजह से लोगों का उस पर भरोसा टूटता है। इमरान से उतनी समस्या नहीं है, क्योंकि फौज की गलत हरकतों से है। उसे सियासत से दूर होना होगा। फौज के साथ ही नवाज ने ISI पर भी तंज कसे।

तीन बार पीएम रहे नवाज
नवाज 1993 में पहली बार पीएम बने। तब राष्ट्रपति ने फौज के इशारे पर उन्हें हल किया। 1999 में जब वे फिर प्रधानमंत्री बने तो परवेज मुशर्रफ ने सत्ता हथिया ली। देश में फौजी हुकूमत आई। 2017 में कोर्ट और फौज ने इमरान के आंदोलन के नाम पर उन्हें रोक दिया। नवाज को तीनों बार सत्ता सेना की वजह से खोनी पड़ी। अब वे इस परेशानी को खत्म करने के लिए विपक्ष को एकजुट करने में कामयाब हो रहे हैं।

फौज से टकराने को तैयार बिलावल
बिलावल भुट्टो ने फौज को सीधा चेतावनी दी है कि वह सियासी मामलों से दूर रहे। उन्होंने पिछले दिनों धमकी दी कि अगर फौज सरकार का समर्थन बंद नहीं करती तो विधानसभाओं और संसद से सभी चुने हुए प्रतिनिधियों ने इस्तीफा दे दिया। बिलावल ने कहा- मुझे समझ नहीं आता कि पोलिंग बो के अंदर और बाहर फौजियों की तैनाती क्यों की गई है। गिल्ली-बाल्तिस्तान को पांचवां राज्य बनाने पर हमें आपत्ति नहीं, लेकिन ये काम संसद की बजाए फौज क्यों कर रही है।)

11 पार्टियां और एक बैनर
20 सितंबर को पाकिस्तान के 11 विपक्षी दलों ने एक गठबंधन बनाया। इसके माध्यम से वे सरकार गिराने के लिए तीन चरणों में आंदोलन कर रहे हैं। इसे पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएफएम) नाम दिया गया है। सभा का दौर शुरू हो चुका है। विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। जनवरी 2021 में इस्लामाबाद तक मार्च निकाला जाएगा। बिलावल और नवाज इमरान को क्ट सिलेक्टेड प्राइम मिनिस्टर की कह रहे हैं।





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By GAUTAM

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