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PATNA : जे है से कि…रामविलास पासवान पंचतत्व में विलीन होने वाले हैं। जे है से कि…रामविलास का तकिया कलाम था। यह तकिया कलाम यह बताता है कि वे अपनी मिटटी से किस कदर जुड़े हुए थे। ये शब्द उनकी कर्मस्थली में बहुत प्रचलित हैं। स्थानीय बोलचाल में लोग आत्मीयता दिखाने के लिए इनका प्रयोग करते हैं। रामविलास भी अपने क्षेत्र के लोगों से किस कदर जुड़े हुए थे, ये शब्द वही बताते हैं। उनके अंतिम दर्शनों के लिए एक दिव्यांग समर्थक सिवान से पटना पहुंचे हैं। पटना में इस दिव्यांग समर्थक की मां उसे कंधे पर बैठाकर पासवान के आवास पहुंची, जहां उनका पार्थिव शरीर रखा था। राज कुमार नाम के इस दिव्यांग समर्थक की अपने नेता के प्रति अगाध श्रद्धा ही थी कि उसे कंधे पर बिठाकर भी उसकी मां अंतिम दर्शन कराने ले आई।

राज कुमार से सवाल पूछे जाने पर वह कहता है कि दिल्ली में उसने कई बार पासवान से मुलाकात की है। वे उसे बहुत प्यार करते थे। जब उनके निधन का पता चला तो इस हालत में भी मैं उन्हें अंतिम बार देखने चला आया। केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के पार्थिव शरीर का दर्शन करने हजारों लोग पटना आए हैं। पटना में एसके पुरी स्थित रामविलास पासवान के आवास से निकली उनकी अंतिम यात्रा बेली रोड होते हुए दीघा घाट पहुंची जहां अंतिम संस्कार की रस्म अदायगी की जाएगी। इस मौके पर सड़क से लेकर घाट तक हजारों की भीड़ उमड़ी। इस भीड़ में आम चेहरों के बीच कई खास चेहरे भी मौजूद हैं। सीएम नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी और केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद भी अपने सहयोगी की इस अंतिम यात्रा का हिस्सा हैं।



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