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  • प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली कुछ देर बाद मुख्य विरोधी पुष्प कमल दहल प्रचंड से मुलाकात करेंगे
  • माना जा रहा है कि इस मुलाकात के बाद यह साफ हो जाएगा कि ओली की कुर्सी बचेगी या नहीं

दैनिक भास्कर

Jul 06, 2020, 08:35 AM IST

आज श्रावण का पहला सोमवार है। आज ही भगवान पशुपतिनाथ की धरती नेपाल में प्रधानमंत्री ओली की किस्मत का फैसला हो सकता है। सत्तारूढ़ नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) का विरोधी गुट ओली से इस्तीफा मांग रहा है। कुछ घंटों में पार्टी की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक होगी। प्रधानमंत्री विरोधी गुट के नेता प्रचंड से मुलाकात करेंगे। इसके बाद साफ हो जाएगा कि ओली इस्तीफा देंगे या सरकार बचेगी।

सियासी पारा चढ़ना
हालिया जब में नेपाल की सियासत का यह सबसे महत्वपूर्ण मोड़ है। ओली पर इस्तीफे का दबाव बढ़ रहा है। कुर्सी बचाने के लिए वे हर तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। खास बात ये है कि उन्हें चुनौती से बाहर नहीं बल्कि पार्टी के अंदर से ही मिली है।

रविवार को परिणाम नहीं निकला
प्रचंड और ओली के बीच रविवार को भी बातचीत हुई थी। लेकिन, दोनों नेताओं के बीच कोई नतीजा नहीं निकल सका। दूसरे शब्दों में कहें तो यह तय नहीं हो पाया है कि ओली रिजफा करेंगे या नहीं। हां, एक बात पर जरूर सहमति बन गई थी कि सोमवार को बातचीत का एक और दौर हो।

ओली की मुश्किल क्या है?
प्रधानमंत्री की सबसे बड़ी मुश्किल पार्टी की स्टैंडिंग कमेटी का गणित है। यह तय है कि ओली रहेगा या जाएगा। लेकिन, यहां उनका पलड़ा बेहद कमजोर है। कमेटी में कुल 44 मेंबर हैं। 30 से ज्यादा चाहते हैं कि ओली बिना कब गंवाए रिजफा दें। खास बात ये भी है कि ओली न सिर्फ प्रधानमंत्री हैं, बल्कि पार्टी के अध्यक्ष भी हैं। वे दोनों ही पद नहीं छोड़ना चाहते। पार्टी महासचिव बिष्णु पौडियाल को उम्मीद है कि मसला सुलझ जाएगी।

पार्टी टूट भी सकती है
माना जा रहा है कि अगर ओली ने इस्तीफे से इनकार किया तो पार्टी टूट जाएगी। एक गुट ओली और दूसरा प्रचंड के साथ चले जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक, रविवार को प्रचंड ने ओली से पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ने को कहा ताकि सरकार बचाई जा सके।

ओली से इसलिए नाराजगी
पार्टी नेता कई मुद्दों पर ओली से नाराज हैं। प्रधानमंत्री कोविड -19 से सामना में नाकाम साबित हुए। भष्टरूप के आरोपों पर कार्रवाई नहीं की। एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा भारत से जुड़ा है। पार्टी नेता मानते हैं कि सीमा विवाद पर उन्होंने भारत से बातचीत नहीं की। वैसे भी ओली पार्टी के तीनों प्लेफॉर्म्स पर कमजोर हैं। सेक्रेटेरेट, स्टैंडिंग कमेटी और सेंट्रल कमेटी में उन्हें समर्थन नहीं हैं। पार्टी के नियमों के मुताबिक, अगर ये तीन प्लेटफॉर्म पर नेता कमजोर होते हैं तो उनका जाना तय है।

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