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प्रसार भारतीयों ने एक बैठक में दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो के पीटीआई के साथ और भारत सरकार की वर्दीधारी सदस्यता के साथ सदस्यता समाप्त करने का फैसला किया। प्रसार भारती के इस फैसले के बाद से ही मीडिया के एक वर्ग द्वारा इस कदम को बदले की भावना के रूप में देखा जाने लगा। साथ ही ये दलील दी जाने लगी की पीटीआई द्वारा भारत में चीन के राजदूत के साक्षात्कार के बाद से ही पीटीआई को लेकर कोई कदम उठाने की तैयारी थी।
चीन के राजदूत का साक्षात्कार
पीटीआई ने चीनी राजदूत सून विडोंग का एक इंटरव्यू किया था, जिसमें उन्होंने भारत-चीन हिंसक गतिरोध के लिए भारत को दोषी ठहराया था, जिसमें 20 भारतीय युवा शहीद हो गए थे। इस पूरे इंटरव्यू में चीनी राजदूत से केवल तीन सवाल पूछे गए थे जिसमें चीनी राजदूत ने दोनों देशों के बीच गलवान घाटी में हुई झड़प के लिए भारत को दोषी ठहराया था। इंटरव्यू छिंग के बाद कई लोगों ने इस बात पर आपत्ति जताई की पीटीआई के रिपोर्टर ने तीखे सवाल क्यों नहीं पूछे? कई लोगों ने तब इसे एक इंटरव्यू के बजाय चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति तक बता दिया था।

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प्रसार भारती ने जताई थी कड़ा ऐतराज
इस साल जून महीने में प्रसार भारतीयों ने कहा पीटीआई । राष्ट्र विरोधी ने बताया था। इस संबंध में प्रसार भारतीयों ने शनिवार, 27 जून को एक पत्र भेजकर कहा कि “पीटीआई की समाचार राष्ट्र हित में नहीं है।” इसके संचालन को लेकर संपूर्णता में चीज़ों को देखा जा रहा है। ”प्रसार भारती ने इस पत्र में ये भी कहा है कि वो पीटीआई से अपने संबंधों को आगे जारी रखने को लेकर समीक्षा कर रहा है और इस संदर्भ में जल्द ही फ़ैसले से अवगत कराएगा। दिया जाएगा। इसके साथ ही प्रसार भारती ने एक अफ़सर ने कहा था, ‘पीटीआई की राष्ट्र विरोधीताओं की वजह से यह स्पष्ट नहीं है कि उसके साथ संबंध बरक़रार रखा जाए।
पीटीआई-यूएनआई के साथ संबंध समाप्त किए गए
प्रसार भारतीयों ने प्रेसिडेंट ट्रस्ट ऑफ इंडिया और यूनिफाइड न्यूज ऑफ इंडिया न्यूज एजेंसी को पत्र लिखकर अपना सब्सक्रिप्शन रद्द करने की जानकारी दी है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि प्रसार भारती ने 15 अक्टूबर को लिखित पत्र में पीटीआई और यूएनआई को बताया कि उसके बोर्ड ने अंग्रेजी भाषा और अन्य मल्टीमीडिया सेवाओं के लिए डिजिटल सब्सक्रिप्शन के लिए सभी घरेलू न्यूज एजेंसीज से नए प्रस्ताव (बोलियां) मंगवाने का फैसला किया है। । प्रसार भारतीयों की सेवा और डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रमुख समीर कुमार द्वारा हस्ताक्षर किए गए पत्र में कहा गया, भारती प्रसार भारती द्वारा सशस्त्र किए जाने के बाद पीटीआई भी इसमें भाग ले सकता है। ’इसके अलावा न्यूज यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया’ को पत्र भेजकर भी यह जानकारी दी गई है कि नए प्रस्तावों को आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया ने व्यक्त की चिंता
एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया ने प्रसार भारती बोर्ड के इस फ़ैसले पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि सरकार और उनकी एजेंसियों ने मीडिया से संशोधित उठाने की नीयत से यह काम किया है।





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