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PATNA : चुनावी मौसम है तो टिकट के अभ्यर्थी भी घरों में नहीं बैठे हैं। सभी दलों के दावेदार टिकट के लिए पार्टी के कार्यालयों और शीर्ष नेताओं का चक्कर लगा रहे हैं। जो अभी विधायक हैं, क्षेत्र और पार्टी में उनकी छवि ही टिकट पाने का मुख्य आधार होगी। जो नए हैं और विधानसभा पहुंचने के लिए आतुर हैं, उनके लिए विभिन्न दलों में अलग-अलग प्रक्रिया है, लेकिन दावेदारों की बेचैनी ऐसी है कि बायोडाटा सभी दलों में जमा किए जा रहे हैं। भाजपा और जदयू में टिकट के दावेदार अलग-अलग स्तर पर बायोडाटा पहुंचा रहे हैं। भाजपा में जिलाध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष, डिप्टी सीएम कार्यालय और संगठन के शीर्ष स्तर पर आवेदकों की भीड़ है। कांग्रेस में प्रत्याशी चयन की दो प्रक्रिया है। विधायकों और नए दावेदारों के लिए अलग-अलग। सबसे ज्यादा लोकतांत्रिक व्यवस्था राजद में दिख रही है। दावेदारों से आवेदन लेने की परंपरा राजद में शुरू से ही है। हर बार हजारों की संख्या में आवेदन आते हैं। यह अलग सवाल है कि कितने आवेदनों पर ईमानदारी से विचार किया जाता है। इस बार दो स्तर पर बायोडाटा लिए जा रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास और प्रदेश कार्यालय में। प्रत्येक दिन करीब पांच सौ से ज्यादा आवेदन आ रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह से मिलकर लोग अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। कार्यालय में इसके लिए चार प्रदेश महासचिवों को भी लगाया गया है। हालांकि स्क्रूटनी के बाद सभी आवेदन नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के पास पहुंचाया जाएगा, जिसपर आखिरी फैसला उन्हीं को करना है। तेजस्वी अपने स्तर से पूरे राज्य की सभी 243 सीटों का सर्वे भी करा रहे हैं। काम एक एजेंसी को सौंपा गया है। दावेदारों के चयन की प्रक्रिया में लोजपा सबसे आगे है। लोजपा प्रमुख चिराग पासवान ने पहले ही टिकट चाहने वालों को 25-25 हजार नए सदस्यों को जोडऩे का लक्ष्य दिया था। पार्टी का दावा है कि एक-एक क्षेत्र से कई-कई दावेदारों ने लक्ष्य पूरा कर लिया है। अब उन्हें बूथ लिस्ट बनाने के लिए कहा गया है। साथ ही दावेदारों से अपने क्षेत्र का मेनीफेस्टो भी बनवाया जा रहा है। त्रिस्तरीय पंचायत समिति के सदस्यों को भी जोड़ने का टास्क दिया गया है।

सत्तारूढ़ दल होने के चलते जदयू में टिकट के दावेदारों की सबसे ज्यादा भीड़ है। आवेदन मांगे नहीं जा रहे हैं, लेकिन अभ्यर्थी पांच खिड़कियों से अपनी दावेदारी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री आवास प्रथम है, लेकिन सबकी पहुंच वहां तक नहीं है। इसलिए अन्य खिड़कियों पर भी कम भीड़ नहीं हो रही है। विभिन्न क्षेत्रों से प्रत्येक दिन आ रहे दावेदार अपनी-अपनी सहूलियत के मुताबिक आरसीपी सिंह, सांसद राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के आवासों का चक्कर लगा रहे हैं। विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी के पास भी दावेदारों की भीड़ लग रही। जदयू कार्यालय में मेल से भी दावेदारी ठोकी जा रही। बायोडाटा में अपना पूरा ब्योरा, जिस क्षेत्र की दावेदारी है, उसकी विशेष जानकारी और जीत की संभावनाएं आदि बताना है। किसी के लिए कोई पाबंदी नहीं है। किसी भी क्षेत्र से दावा किया जा सकता है।

कांग्रेस के पास भी अभी तक करीब दो सौ से ज्यादा आवेदन आ चुके हैं। कांग्रेस जितनी पुरानी पार्टी है, टिकट पाने का उतना ही जटिल नियम भी है। प्रत्याशी चयन की दो व्यवस्थाएं हैं। नए के लिए अलग, पुराने के लिए अलग। पुराने के लिए टिकट लेना थोड़ा सहज है। कद्दावर, पूर्व विधायक और पहुंच वाले नेताओं का चयन चुनाव समिति करती है। समिति से नाम सीधे दिल्ली केंद्रीय स्क्रीनिंग कमेटी के पास भेजा जाता है। आखिर में संसदीय बोर्ड से मुहर लगती है। नए दावेदारों की पहली अनुशंसा ब्लॉक से जिला को भेजी जाती है। जहां से पार्टी मुख्यालय होते हुए राज्य की चुनाव समिति तक आता है। उसके बाद दिल्ली स्क्रीनिंग कमेटी और फिर पार्लियामेंट बोर्ड तक पहुंचता है। संसदीय बोर्ड में राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष, विधायक दल के नेता के अलावा राज्य के प्रभारी तो होते ही हैं, साथ ही 30-35 केंद्रीय स्तर के नेता भी होते हैं। यहीं तय होता है कि कौन चुनाव मैदान में जाएगा और कौन नहीं।

टिकट के दावेदारों ने भाजपा में खेवनहार की तलाश में ताकत झोंक दी है। संगठन से लेकर सत्ता में 12 से 15 जगह बायोडाटा पहुंचाने की होड़ मची है। मेल से भी भेजा जा रहा है। अहम यह है कि पार्टी सभी 243 सीटों पर टिकट के दावेदारों और सीटों की ग्रेडिंग करा रही है। पार्टी संविधान के तहत टिकट पर आखिरी निर्णय पार्टी की पार्लियामेंट्री बोर्ड को लेना है। किंतु जिलाध्यक्ष, प्रदेश महामंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, संगठन महामंत्री, बिहार प्रभारी, चुनाव प्रभारी, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष तक लोग बायोडाटा पहुंचा रहे हैं। वहीं, सत्ता में उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी, कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार, पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के अलावा केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय को मूल प्रति उपलब्ध कराने के साथ मेल कर रहे हैं। दावेदारों के बारे में राष्ट्रीय नेतृत्व पता लगा रहा है कि पूर्व और मौजूदा प्रत्याशियों से चुनाव जीता जा सकता है और ये पार्टी में बने रह सकते हैं या नहीं। स्पष्ट है कि संगठन और विचारधारा से जुड़े कार्यकर्ताओं को तरजीह दी जाएगी। ऑनलाइन सर्वे के जरिए भी आकलन कराया जा रहा है। दो एजेंसियां काम में लगी हैं। तीसरा सर्वे आरएसएस कराएगा।



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