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PATNA : कोरोना काल में तमाम एहतियात और प्रतिबंधों के चलते भारतीय रेल नियमित यात्री गाड़ियों के संचालन को लेकर भले ही अभी कोई फैसला न ले, लेकिन विशेष ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जा रही है। खासकर उत्तर प्रदेश, बिहार और बंगाल रूट पर, जहां अभी चल रही रेलगाड़ियों में भीड़ बढ़ने लगी है। इसे लेकर रेलवे संबंधित राज्यों और गृह मंत्रालय के संपर्क में है। रेलवे अभी 230 विशेष ट्रेनों का संचालन कर रही है, जो देश के सभी हिस्सों को जोड़ने का काम कर रही हैं। हालांकि अब इन ट्रेनों पर भी दबाव बढ़ने लगा है। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव ने कहा है कि इन विशेष ट्रेनों में 80 फीसदी सीटें भरी हुई जा रही हैं। कुछ रूट पर भीड़ बढ़ी है। खासकर बिहार- बंगाल जाने वाली ट्रेनों में 10 से 15 दिन तक की वेटिंग सामने आ रही है। पहले 30 फीसदी ट्रेनें पूरी तरह से भरी जा रही थीं, वह अब बढ़कर 40 फीसदी तक पहुंच गई हैं। यादव ने कहा कि जिन रूट पर ट्रेनें शत-प्रतिशत भरकर जा रही हैं, वहां नई ट्रेन चलाने की जरूरत है। हालांकि इसके लिए राज्य सरकारों से समन्वय करने के बाद ही फैसला लिया जाएगा। साथ ही कोरोना प्रोटोकॉल के चलते गृह मंत्रालय की अनुमति भी जरूरी है।

राज्यों का सहयोग इसलिए जरूरी है क्योंकि उनको यात्रियों को क्वारंटाइन करने से लेकर कई तरह के एहतियाती कदम उठाने पड़ते हैं। सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल सरकार ज्यादा ट्रेन चलाने के पक्ष में नहीं है। ऐसे में लंबी दूरी की ट्रेनों को भले ही ना बढ़ाया जाए, लेकिन उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए कुछ और विशेष ट्रेनें चलाई जा सकती हैं। इससे इस रूट पर चल रही मौजूदा ट्रेनों में भीड़ को कम किया जा सके। इस बीच दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-कोलकाता रूट पर ट्रेनों की गति बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। अभी इन रूट पर 110 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से यात्री ट्रेनों का संचालन किया जा रहा था। अब यह 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से किया जा सकेगा। इस बारे में जरूरी प्रमाण-पत्र रेलवे को हासिल हो गया है।



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