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  • संयुक्त राज्य अमेरिका भारत कोरोनावायरस मामले बनाम चीन उस्सिया स्पेन | कोरोनावायरस कोविद 19 दुनिया भर के 213 देशों को प्रभावित कर रहा है

नई दिल्ली15 मिनट पहले

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  • कोरोना से होने वाली मौतों के मामले में भारत दुनिया में अमेरिका, जेसन के बाद तीसरे नंबर पर
  • कोरोना के मामलों में अमेरिका के बाद भारत दूसरे नंबर पर, यहां अब तक 63 लाख से ज्यादा प्रकरण हैं

कोरोना के चलते 1 अक्टूबर को भारत में मौतों का आंकड़ा 1 लाख को पार कर गया। अमेरिका और बार्सिलोना के बाद अब भारत कोरोना से होने वाली मौतों में दुनिया में तीसरे नंबर पर है। भारत में कोरोना से होने वाली पहली मौत के 203 दिनों बाद यह संख्या 1 लाख मौतों तक पहुंची है। वहीं ब्राजील में यह आंकड़ा 158 दिनों में ही पहुंच गया था, जब उस अमेरिका में 1 लाख मौतें 83 दिन में हुई थीं।

भारत में कोरोना का पहला केस 30 जनवरी को, पहली मौत 12 मार्च को

भारत में कोरोनावायरस का पहला केस 30 जनवरी को केरल में सामने आया था। चीन के वुहान से लौटे एक छात्र में कोरोनावायरस के लक्षण पाए गए थे। जबकि भारत में कोरोनावायरस से पहली मौत 12 मार्च को कर्नाटक के कलबुर्गी में 76 साल के एक शख्स की हुई थी जो सऊदी अरब से लौटा था। जब भारत में कोरोना से पहली मौत हुई उस वक्त देश में महज 75 केस सामने आए थे।

अब जब भारत में मौतों का आंकड़ा एक लाख पार हो चुका है और भारत में कुल केसों की संख्या 63 लाख से ज्यादा है। वहीं वर्तमान में देश में कोरोना से होने वाली मौतों का औसत डेथ रेट 2 प्रतिशत है। भारत में कोरोना से पहली मौत 12 मार्च को हुई। इसके 47 दिनों के बाद ये मौतों का आंकड़ा 1000 पहुंच गया। अगले 78 दिनों में मौतों की संख्या 10 गुना बढ़कर 10 हजार पहुंच गई। फिर अगले 31 दिनों में मौतों का आंकड़ा 50 हजार के पार पहुंच गया। अगले 47 दिनों में यह आंकड़ा 1 लाख मौतों तक पहुंच गया है।

कोरोना से होने वाली मौतों में अमेरिका सबसे आगे, भारत तीसरे नंबर पर

दुनिया में अब तक कोरोना से 3 करोड़ 41 लाख से ज्यादा केस हो चुके हैं और 10 लाख से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। कोरोना से होने वाली मौतों का औसत डेथ रेट 4% है। कोरोना से होने वाली सबसे ज्यादा मौतों वाले टॉप- 10 देशों की सूची में अमेरिका, जेसन और भारत के अलावा मेक्सिको, यूके, इटली, पेरू, फ्रांस, स्पेन और ईरान जैसे देश शामिल हैं।

अमेरिका में अब तक 2.11 लाख मौतें

अमेरिका में कोराएनावायरस के कारण 2 लाख से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। यहां कोरोना का पहला मामला 15 फरवरी को आया था और 29 फरवरी को इस वायरस से पहली मौत हुई थी। वहीं मौतों के मामले में दूसरे नंबर आने वाले देश जेन में अब तक 2.11 लाख से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। यहां पहला मामला 25 फरवरी का आया और पहली मौत 17 मार्च को हुई।

इटली में दो महीने में 24 हजार से ज्यादा मौतें हुईं

इटली में पत्रों के दिनों में मौतों का आंकड़ा काफी तेजी से बढ़ा था। यहां पहली मौत 21 फरवरी को हुई और इसके एक महीने के अंदर ही 4,841 मौतें हो गईं। वहाँ 60 दिनों में यह आंकड़ा 24,710 मौतों तक पहुंच गया था। मई के बाद यहां मौतों की संख्या में कमी आना शुरू हुई। पहले केस के 242 दिन बाद और पहली मौत के 223 दिनों के बाद अब यहां 35,894 मौतें हो चुकी हैं। वर्तमान में केरोना से होने वाली मौतों के मामले में इटली छठवें स्थान पर है।

फ्रांस में सबसे ज्यादा डेथ रेट, भारत में सबसे कम

कोरोना से होने वाली मौतों में शामिल शीर्ष -10 देशों में फ्रांस ऐसा देश है जहां डेथ रेट 25 प्रतिशत है। यहां कोरोना का पहला केस मिलने के 251 दिनों में 31 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। डेथ रेट के मामले में लिस्ट में दूसरे नंबर पर इटली और तीसरे नंबर पर मेक्सिको है। टॉप -10 देशों में सबसे कम डेथ रेट भारत का है, यहां 2 प्रतिशत डेथ रेट है।

जनसंख्या के लिहाज से डेथ रेट के मामलों में पेरू सबसे आगे है

जनसंख्या के लिहाज से डेथ रेट के मामलों में टॉप -10 देशों में पेरू सबसे आगे है। यहां हर दस लाख लोगों में से 981 लोगों की मौतें हो रही हैं। वहीं भारत में हर दस लाख लोगों में से 71 मौतें हो रही हैं।

आवास में कोरोना से हुई मौतों और संक्रमण को लेकर 06 इंटरेस्टिंग फैक्ट्स हैं

फैक्ट – १

अमेरिका की रिसर्च: अंग्रेजी नहीं बोलने वाले अमेरिकन को कोरोना का टोन ज्यादा

कोरोना संक्रमण के बीच अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कोरोना और भाषा के बीच भी कनेक्शन ढूंढ निकाला है। यूनिवर्सिटी ऑफ शेनटन स्कूल ऑफ मेडिसिन ने अपनी रिसर्च में दावा किया है कि जो अमेरिकन अंग्रेजी नहीं बोलता है उन्हें कोरोना होने का एक ज्यादा है। अमेरिका के ऐसे लोग जिनकी पहली भाषा स्पेनिश या कम्बोडियन है, उनमें कोरोना का संक्रमण होने का खतरा 5 गुना ज्यादा है। रिसर्च के लिए 300 टैबलेट और 3 हॉस्पिटल्स में कोरोना मरीजों की जांच के आंकड़े जुटाए गए थे।

फैक्ट – २

ब्रिटेन की रिसर्च: यहां पर अश्वेत-मिनक बहुत कुछ हुआ

राष्ट्रीय स्वास्थ्य संबंधी निर्देश (एनएचएस) के अस्पतालों के मई के आंकड़े बताते हैं कि ब्रिटेन में कोरोनावायरस का संक्रमण और इससे मौतों का सबसे ज्यादा खतरावरेत, एशियाई और अल्पसंख्यकों को है। अस्पतालों से जारी आंकड़ों के मुताबिक, गोरों के मुकाबले अश्वेतों में संक्रमण के बाद मौत का आंकड़ा दोगुना है। अश्वेत, चीनी और अल्पसंख्यकों को यहाँ बेम (BAME) कहते हैं जिसका मतलब है- काला, एशियाई और माइनॉरिटी एथनिक। ‘द टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एनएचएस के अस्पतालों ने जो आंकड़ा जारी किया है, उसके मुताबिक 1 हजार लोगों पर 23 ब्रिटिश, 27 एशियन और 43 अश्वेत लोगों की मौत हुई है। एक हजार लोगों में 69 मौतों के साथ सबसे ज्यादा केन्याबनियाई लोगों को था, जबकि सबसे कम बांग्लादेशियों (22) को था।

फैक्ट – 3

स्पेन की रिसर्च: जिंक की कमी से जूझने वाले को मौत का खतरा दो गुना

स्पेन के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि ऐसे लोग जो जिंक की कमी से जूझ रहे हैं उन्हें कोरोना का संक्रमण होता है तो मौत का खतरा दो गुना से अधिक है। कोरोना के जिन रोगियों में जिंक की कमी होती है उनमें सूजन के मामले बढ़ते हैं। यह मौत का खतरा बढ़ाता है। बार्सिलोना के टर्शियरी यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल के रिसर्चर ने 15 मार्च से 30 अप्रैल 2020 तक कोरोना के मरीजों पर रिसर्च की। अनुसंधान में कोरोना के ऐसे रोगियों को शामिल किया गया है जिनकी हालत बेहद नाजुक थी। उनकी सेहत, लोकेशन से जुड़े आंकड़े, पहले से हुई बीमारियों को रिकॉर्ड किया गया।

फैक्ट: 4

चीन की रिसर्च: चीनी वैज्ञानिकों का दावा; चश्मा न लगाने वालों में संक्रमण का एक

मेडिकल जर्नल ऑफ वायरोलॉजी में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, कोरोनावायरस आंखों के जरिए भी शरीर में पहुंच सकता है। शोध करने वाले चीन की शुज़ाउ झेंगडू अस्पताल के शोधकर्ताओं का कहना है, जो लोग दिन में 8 घंटे से अधिक चश्मा लगाते हैं उनमें कोरोना का संक्रमण होने का खतरा कम है।

रिसर्चर्स का कहना है, हवा में मौजूद कोरोना के कण सबसे ज्यादा नाक के जरिए शरीर में पहुंचते हैं। नाक और आंख में एक ही तरह की मेम्ब्रेन लाइनिंग होती है। अगर कोरोना दोनों में किसी भी हिस्से की म्यूकस मेम्ब्रेन तक पहुंचता है तो यह आसानी से सकारात्मक कर सकता है। इसलिए आँखों में कोरोना का संक्रमण होने पर रोगियों में कंजेक्टिवाइटिस जैसे लक्षण दिखते हैं। वहीं अगर आप चश्मा पहनते हैं तो यह बैरियर की तरह काम करता है और अस्थिर ड्रॉपलेंट्स को आंखों में पहुंचने से रोकता है। इसलिए ऐसे चश्मे लगाना ज्यादा बेहतर है जो चारों ओर से आंखों को सुरक्षा देते हैं।

फैक्ट: 5

ऑस्ट्रेलिया की रिसर्च: ओ + ब्लड ग्रुप वालों को कम होता है कोरोना संक्रमण

ऑस्ट्रेलिया में लगभग 10 लाख लोगों के डीएनए पर हुए एक शोध में पाया गया कि ओ + ब्लड ग्रुप वालों पर वायरस का असर कम होता है। इससे पहले हार्वर्ड से भी रिपोर्ट आयी थी, लेकिन उसमें कहा गया था कि ओ + वाले लोग कोरोना पॉजिटिव कम हैं, लेकिन सीवियरिटी और डेथ रेट में बाकियों की तुलना में कोई फर्क नहीं पड़ता है।

फैक्ट: 6

सीडीसी के निदेशक का दावा: वैक्सीन से 70% और पूछे जाने वाले प्रश्न 80-85% तक सुरक्षा

जब तक कोरोना की दवा नहीं आती है, तब तक लोगों को चेहरे का प्रयोग करने की सलाह दी जा रही है। शोध को ही सीडीसी के बारे में, अमेरिका के निदेशक रॉबर्ट रेडफील्ड ने कहा कि वर्क वैक्सीन से बहुत अधिक प्रभावी है। रॉबर्ट ने यह बात पूरी दुनिया में जाहिर की हुई बहुत सारी स्टडीज़ के आधार पर कही है। अगर दो लोग आमने-सामने बैठे हुए हैं और चेहरे लगाए जाते हैं, सुरक्षित दूरी बनाए रखते हैं, तो सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है। लेकिन जरूरी है कि फेस सही से लगाया गया हो, मुंह और नाक अच्छी तरह से ढका हुआ है। वायरस से प्रोटेक्शन के लिए स्वास्थ्य होते हैं, जो वैक्सीन देने के बाद लोगों के शरीर में लगभग 70 प्रतिशत ही बन पाते हैं, जबकि वर्क से 80-85 प्रतिशत तक सुरक्षा मिलती है।



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By GAUTAM

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