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PATNA : अयोध्या में प्रस्तावित भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण में गया की फल्गु नदी के बालू को भी शामिल किया गया है. अगस्त में मंदिर निर्माण का शिलान्यास होना है. श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से मिली जानकारी के बाद गया विश्व हिंदू परिषद इकाई के सदस्यों ने हर्ष व्यक्त किया. विश्व हिंदू परिषद के विभाग अर्चक पुरोहित प्रमुख प्रेमनाथ टईआ ने बताया कि विहिप के केंद्रीय उपाध्यक्ष सह श्री राम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय के साथ बातचीत के दौरान उन्हें यह जानकारी मिली.

अयोध्या में मंदिर निर्माण में सात समुद्रों का पानी, देश की सभी धार्मिक नदियों का पानी, प्रमुख धामों की मिट्टी व फल्गु नदी के बालू का प्रयोग किया जायेगा. श्री टईआ ने बताया कि केंद्रीय उपाध्यक्ष से यह जानकारी मिलने के बाद सभी बहुत हर्षित हो गये. उन्होंने तुरंत इसकी जानकारी विहिप गया इकाई के सभी सदस्यों को दी. श्री टईआ ने बताया कि गया से फल्गु का बालू लगभग एक माह पहले ही अयोध्या मंगवा लिया गया था. विहिप की गया इकाई के पदाधिकारियों ने बताया कि अयोध्या में मंदिर निर्माण की नींव में गया धाम से सवा किलो चांदी की ईंट भी भेजी जा रही है. विहिप जिलाध्यक्ष डाॅ एनके गुप्ता के नेतृत्व में एक समिति बनी है. इस समिति की देखरेख में चांदी की ईंट तैयार की जा रही है. यह ईंट अयोध्या में मंदिर की नींव में डाली जायेगी. विहिप अधिकारियों ने बताया कि अयोध्या में श्रीराम का मंदिर बनना दशकों के संघर्ष का परिणाम है. ऐसे में इस पवित्र कार्य में गया का भी योगदान होना चाहिए.

गया एक पावन पितृतीर्थ है. यहां भगवान विष्णु के पादपक्ष विराजमान हैं. एतदर्थ तीर्थोत्तम गयाधाम श्रीपादतीर्थ है. इसकी महिमा अप्रतिम है. यही कारण है कि इस पितृतीर्थ में पौराणिक महापुरुष भगवान श्रीराम, उनके अनुज भरत जी, ॠषि भारद्वाज, पितामह भीष्म, महाराज युधिष्ठिर, महारथी भीम आदि के गया आगमन का वर्णन विभिन्न पुराणों और अन्य धर्मशास्त्रों में मिलता है. पुराणों और आनंद रामायण में भगवान श्री राम के गया धाम आगमन की कथा विस्तारपूर्वक वर्णित है. इसके अतिरिक्त कृतिवास रामायण, बलराम दास रामायण आदि में भी यह कथा कुछ भिन्नताओं के साथ वर्णित है. भगवान राम के गयाधाम आगमन के अनेक पौराणिक व धर्मशास्त्रीय प्रमाणिक संदर्भ सुलभ हैं.



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