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PATNA : पति एक प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टर और पत्नी हाउसवाइफ। लॉकडाउन के दौरान दाई ने आना बंद कर दिया, तो महिला का काम दोगुना बढ़ गया। पति को घर के काम में मदद करने को कहा। पति ने सहयोग नहीं किया तो झगड़ा होने लगा। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि दोनों ने अलग होने तक की ठान ली। मामला महिला हेल्पलाइन पहुंचा। प्रोजेक्ट मैनेजर प्रमिला कुमारी ने बताया कि काउंसलिंग के बाद दोनों के बीच काम को बांटा गया। पति ने भी बात समझी और अपने हिस्से के कई काम वो करने लगा। ऐसी कहानी कई घरों की है। लॉकडाउन का उपयोग किसी ने रचनात्मक काम के लिए किया, तो किसी-किसी परिवार में इस दौरान कलह बढ़ गया। खासकर कामकाजी दंपतियों के बीच। महिला हेल्पलाइन में ऐसे दर्जन भर मामले आए हैं, जिसमें विवाद की वजह काम वाली का नहीं आना है।

बैंकर पति-पत्नी के घर में अब तो न कुक आ रही थी न ही डस्टिंग के काम के लिए काम वाली। काम के बाद घर लौटते ही हर रोज पत्नी खाना बनाने के काम जुट जाती और पति सिर्फ टीवी देखता। पहले तो पत्नी ने बहुत समझाया कि कम से कम घर की साफ सफाई कर लो। कुछ न सुनने पर उसने महिला हेल्पलाइन में शिकायत कर दी। वीडियो कॉल के जरिए दोनों की काउंसिलिंग हुई। बोरिंग रोड निवासी जोड़ा वर्क फ्रॉम होम में व्यस्त रहता। छोटे बच्चे की देखभाल महिला कर रही थी। कभी थकने पर वो कुछ काम के लिए पति से कहती तो काम का बहाना कर लैपटॉप पर बैठा रहता। महिला ने जब हेल्पलाइन में शिकायत की तो काउंसलर ने दोनों की ड्यूटी बांध दी।

लॉकडाउन में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामलों में बढ़ोतरी हुई है। 22 मार्च से 31 जुलाई तक महिला हेल्पलाइन के टोल फ्री नंबर 181 पर 14609 कॉल आए जिनमें 184 पीड़ित महिलाओं के थे। इनमें सबसे ज्यादा 111 मामले घरेलू हिंसा के हैं। बाल विवाह रुकवाने के लिए 24, दहेज संबधी 22, मानसिक प्रताड़ना को लेकर 18, यौनशोषण का 1 और संपत्ति विवाद के 5 मामले आए। 7019 कॉल गलत थे। महिला हिंसा से संबंधित शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर की सुविधा जून 2019 से 24 घंटे के लिए चालू की गई थी। कॉल आने पर निकटतम थाने को महिला की मदद करने के लिए निर्देश दिया जाता है। यह सुविधा पूरे राज्य के लिए है।



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