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दिल्ली से सटे फरीदाबाद के एक निजी अस्पताल में लापरवाही से शव बदलने का मामला सामने आया है। अस्पताल प्रबंधन ने पुरुष की जगह महिला का शव परिजनों को सौंप दिया। जब स्वजन अंतिम संस्कार के लिए शव लेकर गए और श्मशान घाट में उन्होंने चेहरा देखा तो उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई। पुरुष की जगह महिला का शव था। उन्होंने हंगामा कर दिया। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने महिला का शव वापस मंगवाया और सही शव स्वजनों को भिजवाया।

दरअसल, पल्ला निवासी 46 वर्षीय राजकिशोर की बीमारी के चलते रविवार सुबह निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। अस्पताल प्रबंधन ने शव स्वजनों के हवाले कर दिया। राजकिशोर के बेटे रोहित का कहना है कि अस्पताल में राजकिशोर के अंतिम दर्शन करने की इच्छा जाहिर की थी, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने कोरोना का हवाला देते हुए शव को दिखाने से मना कर दिया था।

ऐसे में बिना चेहरा देखे राजकिशोर के स्वजन शव लेकर अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पहुंच गए। वहां अंतिम संस्कार क्रिया के दौरान जब चेहरा देखा तो वे स्तब्ध रह गए। किसी महिला का शव था। स्वजनों ने तुरंत अस्पताल प्रबंधन से संपर्क किया और मामले की जानकारी दी। उन्होंने श्मशान घाट में हंगामा कर दिया। पल्ला थाना पुलिस को सूचित कर दिया। हंगामे की आशंका को देखते हुए श्मशान घाट में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई।
उधर महिला के स्वजन शव लेने अस्पताल पहुंचे तो वे भी पुरुष का शव देखकर चकरा गए। अस्पताल प्रबंधन ने अपनी गलती स्वीकार की और तुरंत एंबुलेंस से राजकिशाेर का शव श्मशान घाट भिजवाया। वहां से महिला का शव वापस मंगाकर उसके स्वजनों को सौंपा दिया। दोनों ही परिवार वाले अस्पताल प्रबंधन की इस लापरवाही से काफी रोष में है।

पल्ला थाना प्रभारी सतीश कुमार का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। पता किया जा रहा है कि शव कैसे बदले। अभी इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन ने भी कुछ कहने से इनकार कर दिया है।



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