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  • रेलवे नेटवर्क को 12 क्लस्टर में बांटा गया है और 12 क्लस्टर में 109 जोड़ी प्राथमिक ट्रेनें चल रही हैं
  • रेलवे ने कहा- प्राथमिक क्षेत्र की ओर से 30,000 करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत है

दैनिक भास्कर

Jul 01, 2020, 10:24 PM IST

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने बुधवार को बड़ा फैसला लिया है। रेलवे ने पैसेंजर ट्रेन सेवा संचालन करने के लिए प्राथमिक पार्टी के लिए दरवाजे खोल दिए हैं। देश में 109 डेस्टिनेशन रूट पर प्राइवेट कंपनियों को ऑपरेट करने वाली फाउंड्री। इसमें 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। रेल मंत्रालय ने इसके लिए रिक्वेस्ट फॉर क्वॉलिफिकेशन (RFQ) मांगा है। पूरे देश के रेलवे नेटवर्क को 12 क्लस्टर में बांटा गया है और उसी में 12 क्लस्टर में 109 जोड़ी प्राथमिक ट्रेनें चल रही हैं। इन सभी ट्रेनों में कम से कम 16 कोच होंगे।

अधिकतम 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली गाड़ियों। ये ट्रेनों का रोलिंग स्टॉक निजी कंपनी खरीदेगी। मेंटिनेंस उसी का होगा। रेलवे सिर्फ ड्राइवर और गार्ड देगा। भारतीय रेलवे का यह प्रोजेक्ट 35 वर्ष के लिए है। मुख्य पार्टी को एनर्जी और हौलेज चार्ज खपत के हिसाब से देना होगा।

30,000 करोड़ रुपए के निवेश की जरूरत होगी

यात्री रेलगाड़ियों के संचालन में निजी कंपनियों की भागीदारी की परियोजना में निजी क्षेत्र की ओर से लगभग 30,000 करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी। रेलवे इसके माध्यम से मॉडर्न टेक्नोलॉजीज को सामने लाने की योजना बना रही है। इससे रेलवे का मेंटिनेंस का बोझ कम होगा। इससे दलित समय में भी कमी आ गई। रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, सेफ्टी का भरोसा मजबूत होगा और यात्रियों को विश्व स्तर पर का अनुभव होगा।

सभी ट्रेन मेक इन इंडिया के तहत भारत में ही बनाई जाएगी

रेलवे के मुताबिक, सभी ट्रेन मेक इन इंडिया के तहत भारत में ही बनाई जाएगी। जिन कंपनियों को मौका मिलेगा, उन्हें फाइनेंस, खरीद, संचालन और रख-रखाव की जिम्मेदार संभालनी होगी। इसका कंसेशन पीरियड 35 साल का हो सकता है। ग्रॉस रेवेन्यू का बंटवारा कमाई के रूप में होगा।





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