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  • राजस्थान में कांग्रेस की अंदरुनी उठापटक पर मोदी-शाह ने भले ही कुछ प्रतिक्रिया न दी हो, पर मामले पर उनकी कबी नजरें हैं
  • मोदी और शाह की जोड़ी ने हर मुश्किल को मौके में बदला और सात राज्यों में विपक्ष से सत्ता छीनकर सरकार बनाई

दैनिक भास्कर

Jul 14, 2020, 08:31 PM IST

नई दिल्ली। 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद से भाजपा ने पलक कभी पीछे नहीं देखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने हर मुश्किल को मौके में बदला और सात राज्यों में विपक्ष से छीनकर सरकार बनाई। राजस्थान में कांग्रेस की अंदरुनी उठापटक पर मोदी-शाह ने भले ही कुछ प्रतिक्रिया न दी हो, पर मामले पर उनकी कबी नजरें। आइये जानते हैं कि 2014 के बाद से मोदी-शाह की जोड़ी ने किस तरह विपक्ष में सेंध लगाकर सरकार बनाई।

अरुणाचल: मुख्यमंत्री केवल विधायकों के साथ भाजपा में आ गए

  • 37 वर्षीय पेमा खांडू ने 17 जुलाई, 2016 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तब तक वे कांग्रेस में थे। पार्टी के पास 60 सदस्यीय विधानसभा में 47 विधायक थे। दो महीने बाद खांडू सहित 43 विधायकों ने क्षेत्रीय पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल (पीसीबीए) की सदस्यता ले ली जो भाजपा के नेतृत्व वाली नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (एऩडेएस) का सदस्य था।
  • २ ९ दिसंबर २०१६ को पीसीए ने भी खांडू को सस्पेंड कर दिया। एक दिन बाद खांडू 33 विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए। बीजेपी ने 12 साल बाद दूसरी नॉन-इलेक्टेड सरकार बनाई।
  • इसका कारण यह अरुणाचल और पूर्वोत्तर के अन्य राज्य फाइनेंशियली पूरी तरह से दिल्ली पर निर्भर हैं। केंद्र की सरकार के साथ गठबंधन में रहना चाहते हैं ताकि उनकी जनता के लिए काम कर सके।
  • 2019 के विधानसभा चुनावों में पेमा खांडू के नेतृत्व में भाजपा ने 60 में से 41 सीटों पर जीत दर्ज की।

बिहार: भ्रष्टाचार के मुद्दे पर फिर से दो प्रमुख पार्टियां हुईं

  • 2014 के लोकसभा चुनावों से ठीक पहले जून 2013 में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा के साथ नाता तोड़ दिया था। आपत्ति भाजपा के प्रधान पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी की ताजपोशी से थी।
  • 2015 के विधानसभा चुनावों में नीतीश ने लालू प्रसाद यादव के आरजेडी और कांग्रेस के साथ मिलकर महागठबंधन बनाया और भाजपा को शिकस्त दी। लेकिन यह महागठबंधन ज्यादा नहीं चला। 20 महीने में यानी जुलाई 2017 में नीतीश फिर भाजपा के साथ लौट आए।
  • नीतीश ने महागठबंधन तोड़ने के बाद कहा था कि मौजूदा परिस्थितियों में जब डिप्टी सीएम और लालू के बेटे तेजस्वी यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं तो उनके साथ मिलकर सरकार चलाना मुश्किल हो रहा है।
  • इस सरकार को बनाने में मोदी-शाह की जोड़ी न केवल सक्रिय रही बल्कि मोदी ने ही बिहार में नीतीश के साथ जाने के फैसले को आगे बढ़ाया। मोदी ने लिखा- भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारे प्रयासों में शामिल होने पर नीतीश कुमार को बहुत बधाई।
  • सीबीआई ने तेजस्वी यादव, लालू यादव और बहन मीसा यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार के केस दर्ज किए थे। तब से ही मुख्यमंत्री पर दबाव बन रहा था कि वे तेजस्वी को डिप्टी सीएम पद से हटाएं।
  • 243 सदस्यों की विधानसभा में उस समय नीतीश की ज़ीयू के पास 71 और भाजपा के पास 53 विधायक थे। उनके सहयोगी रामविलास पासवान की एलजेपी के पास दो विधायक थे। यानी बहुमत उनके पास था। 2019 के लोकसभा चुनाव ज़ीयू और भाजपा ने मिलकर लड़े और अब 2020 में विधानसभा चुनाव भी साथ मिलकर लड़ने की संभावना कायम है।

गो: कांग्रेस सोचती रही और भाजपा ने रातोंरात सरकार बना दी

  • 40 सीटों वाली गो विधानसभा के चुनाव में किसी को भी बहुमत नहीं मिला था। कांग्रेस ने 17 और भाजपा ने 13 सीटें जीती थी। ऐसा लग रहा था कि कांग्रेस की ही सरकार बनेगी। लेकिन हुआ इसका उल्टा।
  • तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने रातोंरात ऐसी रणनीति बनाई कि रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर को राज्य में मुख्यमंत्री के तौर पर भेजा गया। इससे छोटी पार्टियों और निर्दयी साथ आ गए और भाजपा ने बहुमत हासिल कर लिया।
  • 2019 में रही-सही काम मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कांग्रेस को जोर का झटका जोर से दिया। जब कांग्रेस के 10 विधायक दल को छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। उन्हें सरकार में शामिल किया गया था और अब 27 विधायकों के साथ पार्टी अपने दम पर बहुमत में है।

मणिपुर: छोटे भागों को साथ कांग्रेस के अरमानों पर पानी फेरा

  • पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर में भी जाने के लिए। कांग्रेस को 60 में से 28 सीटें मिली थीं और वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। भाजपा को 21, नागा पीपुल्स क्यू को 4 और बाकी पार्टियों को मिली थी।
  • मणिपुर में कांग्रेस बड़ी पार्टी थी, लेकिन यहां भी बीजेपी ने दूसरी छोटी पार्टियों से गठबंधन करके कांग्रेस को सरकार बनाने से रोका। 2016 में कांग्रेस को छोड़कर भाजपा से जुड़े पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी एन बीरेन सिंह को मुख्यमंत्री बनाया गया।

मेघालय: सिर्फ कुछ सीटों के साथ 60 सदस्यों वाले सदन में पाए गए सत्ता में

  • केंद्र में सत्तारुढ़ बीजेपी को 60 सदस्यों वाली मेघला विधानसभा में महज 2 सीट मिली। लग रहा था कि राज्य में 21 सीट हासिल करने वाली कांग्रेस अपनी सरकार बना लेगी। लेकिन मोदी-शाह के नेतृत्व में भाजपा के चतुर रणनीतिकारों ने पासा ही पलट दिया।
  • 60 सदस्यीय मेघालय विधानसभा चुनाव में नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) 19, बीजेपी 2, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) 6, एचएसपीडीपी 2, पीडीएफ 4 और 1 निर्दलीय के साथ आने से गठबंधन करके या 34 विधायकों का समर्थन हो गया है।
  • वहीं सबसे ज्यादा 21 सीट जीतकर राज्य में सबसे बड़ी एकल पार्टी रही कांग्रेस बहुमत से महज 10 सीट दूर रही और फिर से सरकार बनाने की उसकी योजना नाकाम हो गई। इससे पूर्व लोकसभा स्पीकर पीए संगमा के बेटे कोनराड मुख्यमंत्री बन गए।

कर्नाटक: भाजपा को रोकने वाला कोंग्रेसी गठबंधन ज्यादा नहीं चला

  • 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों में भाजपा 104 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी। लेकिन उसके लिए सात विधायकों का समर्थन जुटाना भारी पड़ा। पटेल येदियुरप्पा को बहुमत साबित करने से पहले ही इस्तीफा देना पड़ गया।
  • तब भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस (78) और जेडीएस (40) ने गठबंधन किया और कुमारस्वामी के नेतृत्व में गठबंधन सरकार हासिल की। जुलाई में भाजपा ने राज्य में ऑपरेशन लोटस किया और फिर सत्ता में आ गई।
  • भाजपा के ऑपरेशन में फंसकर कांग्रेस और जेडीएस के 17 विधायकों ने इस्तीफा दिया है। भाजपा में शामिल हो गए।) जुलाई 2019 में कुमारस्वामी सरकार गिर गई। बाद में बीड़ येदियुरप्पा के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी।

मध्यप्रदेश: युवा नेताओं की अनदेखी पड़ी भारी, सिंधिया आ गई भाजपा में

  • मध्य प्रदेश में 2018 के चुनावों में 230 सदस्यों की विधानसभा में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन भाजपा भी बहुत ज्यादा नहीं थी। ऐसे में युवा कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की नाराजी का भाजपा ने फायदा उठाया।
  • सिंधिया के समर्थक 22 विधायकों ने कांग्रेस छोड़ी और भाजपा के साथ आकर सरकार बनाई। सिंधिया खुद भाजपा की सीट पर राज्यसभा पहुंच चुके हैं। हालांकि, उपचुनाव शेष हैं और कांग्रेस यदि सभी सीटों पर जीत हासिल करती है तो उसकी वापसी संभव है।

हालाँकि, महाराष्ट्र में भाजपा के पांसे उलटे पड़े हैं

  • भाजपा 2019 में महाराष्ट्र चुनावों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है लेकिन चुनावी गठबंधन में उसके सहयोगी शिवसेना ने ही उसके साथ नहीं दिया। तब अजित पवार को साथ लेकर एनसीपी के समर्थन का दावा करते हुए देवेंद्र फडणवीस ने रातोंरात शाप ली।
  • हालांकि, चाचा शरद पवार के सक्रिय होने से अजीत पवार की किरकिरी हुई और भाजपा की भी। उस समय सिर्फ शरद पवार ही थे, जिन्होंने किसी तरह भाजपा को सरकार बनाने से रोक दिया था। वरना, कांग्रेस किसी भी स्थिति में शिवसेना के साथ सरकार बनाने को राजी नहीं थी।
  • अभी भी, महाराष्ट्र से आए दिन शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के बीच आपसी उठापटक की खबरें आती रहती हैं। लेकिन वर्तमान में उनकी सरकार सुरक्षित ही नजर आ रही है क्योंकि भाजपा के लिए इस समय किसी भी पार्टी को तोड़ पाना संभव नहीं दिख रहा है।





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