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  • मिस्र में, 22 वर्षीय नादिन ने मी टू अभियान शुरू किया; यौन शोषण के आरोप में जेल गई, महिलाओं के सम्मान का प्रतीक बन गई

डेक्लेन वैल्शएक घंटा पहले

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नादीन अशरफ

  • विश्वविद्यालय की छात्रा ने सोशल मीडिया पर छेड़ा अभियान, सप्ताहभर में 70 हजार फॉलोअर्स से जुड़े
  • नदीन का कहना है कि मेरे अभियान का मकसद सिर्फ इतना है कि महिलाओं को उनके अधिकारों की जानकारी मिले

मिस्र में 22 साल की नदीन अशरफ महिलाओं के आत्म-सम्मान और गौरव का प्रतीक बन गए हैं। काहिरा की अमेरिकी यूनिवर्सिटी में फिलासफी की इस छात्रा ने विश्वविद्यालय में यौन उत्पीड़न करने वालों के खिलाफ न केवल मी हैशटेग मीटू अभियान ‘शुरू किया बल्कि उन्हें जेल की सलाखों में भेजकर बड़े सामाजिक बदलाव का सबब भी बना दिया।

सोशल मीडिया पर नया पेज बनाकर अभियान शुरू किया

नदीन बताती हैं कि में जुलाई में मैंने एक सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म पर एक पोस्ट देखी थी, जिसमें विश्वविद्यालय के एक छात्र पर यौन शोषण का आरोप लगा था। वह काफी अमीर थी। अचानक उसकी पोस्ट गायब हो गई थी। चूंकि उस आदमी पर यह भी इल्जम डाल दिया गया था कि वह यौन शोषण करने के बाद पीड़िता को ब्लैकमेल भी किया करता था, इसलिए मुझे अंजाजा हो गया कि बिना किसी स्पष्टीकरण के वह पोस्ट कैसे अलॉट हो गई है।

मैं इतना आक्रोशित हो गया कि मैंने रातभर जागकर एक दूसरे प्लेटफाॅर्म पर ाल @ असाल्टपोलिस के नाम पर एक पेज बनाया। इसमें उस व्यक्ति के नाम से उस पर लगे आरोपों का विवरण दिया गया है। उसका नाम अहमद बसम जकी था। मैंने उसकी फोटो के साथ उसके कारनामों का विवरण भी डाला। ये शंख जब दसवीं कक्षा में थे, तब से यौन शोषण करता रहा है। लेकिन जैसे ही कोई पीड़िता अपना मुंह खोलती है, कोई न कोई उसका मुंह बंद करवा देता है। मैं इसे रोक देना चाहता था।

इस पोस्ट के जवाब में मुझे सैकड़ों पॉजिटिव नोटिफिकेशंस और लगभग 30 महिलाओं के संदेश भी मिले, जिन्होंने जकी के शिकार होने की बात कबूली। कुछ ने यह भी कहा कि उनके साथ भी दुष्कर्म हुआ है। और इस तरह मीटू अभियान की शुरुआत हो गई। सप्ताहभर के भीतर मेरे पेज पर 70 हजार फॉलोअर्स शामिल थे। ऐसी कहानियों की बाढ़ आ गई जिनका आशय ये था कि मिस्र की औरतें यौन शोषण और बेइज्जती से तंग आ चुकी थीं।

इसी तरह मैंने 6 साल पहले 5 युवकों द्वारा एक महिला से फाइव स्टार होटल में किए गए दुष्कर्म की जानकारी भी पेज पर डाल दी। इसके आरोपी भी पकड़े गए। मुझे धमकियां भी मिलीं। कुछ दिनों पहले मुझे पता चला कि कुछ लोग मेरी पहचान लीक कर रहे हैं, इसलिए मैंने खुद को उजागर करने का फैसला लिया। अगर बुरे लोगों को पता चल सकता है कि मैं कौन हूं तो अच्छे लोगों को भी पता चलना चाहिए कि मैं कौन हूं। इसी तरह मेरी सुरक्षा निहित है। ‘

अभियान का उद्देश्य- महिलाओं को उनके अधिकारों की जानकारी हो
नदीन का कहना है कि मेरे अभियान का मकसद सिर्फ इतना है कि महिलाओं को उनके अधिकारों की जानकारी मिले। मैं खुद 11 साल की थी तब लाॅन्ड्रेड वाले ने मुझे गलत तरीके से छूने की कोशिश की थी। तब मुझे पता नहीं था कि मेरे साथ क्या हो रहा है लेकिन आज समझ में आ रहा है कि उस छोटी सी उम्र में मैं भी यौन शोषण का शिकार थी।





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By GAUTAM

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