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  • अमेरिका में पुलिस द्वारा ब्लैक मैन को गोली मार दी गई। विस्कॉन्सिन, एक काले आदमी को पुलिस द्वारा एक बच्चे के सामने गोली मार दी गई, घायल व्यक्ति के खतरे से बाहर; यह दो महीने में दूसरा ऐसा हादसा है

वॉशिंगटन10 मिनट पहले

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अश्वेत जैकब ब्लक के समर्थन में सोमवार शाम केनोशा के कोर्टहाउस के सामने प्रदर्शन करते लोग। वर्तमान में इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

  • घटना से नाराज लोगों ने केनोशा कोर्टहाउस के सामने प्रदर्शन किया, इसे देखते हुए इलाके में कर्फ्यू लगाया गया
  • अभी यह खुलासा नहीं हुआ कि गोली क्यों मारी गई, केनोश के काउंटी डिप्टी शेरिफ की अगुआई में जांच होगी

अमेरिका में अश्वेतों के साथ जीनति का मामला एक बार फिर सामने आया है। विस्कॉन्सिन शहर के केनेशा इलाके में रविवार को दो पुलिसकर्मियों ने अश्वेत जैकब ब्लैक को उसके बच्चों के सामने पीठ पर कई गोलियां मार दीं। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। अभी यह खुलासा नहीं हुआ है कि उसे गोली क्यों मारी गई।

जैकब के वकील बेन क्रम्प ने इस पूरी घटना का एक वीडियो भी शेयर किया है। इसमें पुलिसकर्मी एक एसयूवी में घुसने की कोशिश करने के बाद जैकब पर गोलियां चलाने नजर आ रहे हैं। घटना से नाराज लोगों ने केनोशा कोर्टहाउस के सामने प्रदर्शन किया। यह देखता है कि इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया है।

प्रदर्शनकारियों को राेकने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोलेशाने में प्रदर्शन किया

सोमवार को प्रदर्शन कर रहे लोगों ने सार्वजनिक सेफ्टी बिल्डिंग में घुसने की कोशिश की। इसके पहले रविवार की रात सैकंडों लोगों ने पुलिस हेडक्वार्टर तक रैली निकाली। लोगों ने जैकब पर गोली चलाने वाले अफसरों पर कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक प्रॉपर्टीज को नुकसान पहुंचाया। कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। भीड़ को रोकने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। वर्तमान क्षेत्र में नेशनल गार्ड के 200 जवानों को तैनात किया गया है। गवर्नर टोनी एवर्स ने लोगों को शांति से प्रदर्शन करने की अपील की है।

जैकब के समर्थन में सड़कों पर उतरे लोगों ने सोमवार को कई प्रकाशक / प्रॉपर्टीज को नुकसान पहुंचाया।

जैकब के समर्थन में सड़कों पर उतरे लोगों ने सोमवार को कई प्रकाशक / प्रॉपर्टीज को नुकसान पहुंचाया।

पुलिस ने मामले की जांच शुरू की
केनोशा पुलिस ने विस्कॉन्सिन क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिविजन को जांच करने के लिए कहा है। जांच केनोश के काउंटी डिप्टी शेरिफ की अगुआई में होगी। इसकी रिपोर्ट डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी मिशेल डी ग्रेवली को सौंपी जाएगी। इसके बाद ग्रेवली ही फैसला करेगी कि अफसरों पर कौन से आरोप लगाया जाएगा। अटॉर्नी ग्रेवली ने कहा है कि वर्तमान में जांचकर्ता चरण में है। इस बीच इस तरह की खबरें आ रही हैं कि गोली चलाने वाले पुलिस अफसर को बचाने्हटी पर भेज दिया गया है।

प्रदर्शन करने वालों को सार्वजनिक सेफ्टी बिल्डिंग में घुसने से रोकने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोलेशने वाले होते हैं।

प्रदर्शन करने वालों को सार्वजनिक सेफ्टी बिल्डिंग में घुसने से रोकने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोलेशने वाले होते हैं।

12 जून को भी एक अनवरत को गोली मारी गई थी

अमेरिका में बीते 2 महीने में किसी अश्वेत पर पुलिस के गोली चलाने का यह दूसरा मामला है। इससे पहले 12 जून को अटलांटा के जॉर्जिया में गिरफ्तारी के दौरान 27 साल के रेशर्ड ब्रूक्स को अफसर ने गोली मार दी थी। घटना के बाद अटलांटा की पुलिस चीफ ने रिजफा दे दिया था। इसके बाद भी लोगों ने प्रदर्शन किए थे। पुलिस ने दावा किया था कि ब्रूक्स एक अफसर की टेजर (छोटी गन) छीनकर भागा थी और पीछा करने वाले एक अफसर पर तान दी थी। उसके बाद उसे गोली मारी गई थी।

प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए केनोश काउंटी कोर्टहाउस के सामने एक पुलिसकर्मी तैनात किया गया।

प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए केनोश काउंटी कोर्टहाउस के सामने एक पुलिसकर्मी तैनात किया गया।

25 मई को अश्वेत फ्लोल्ड की मौत हो गई थी

मिनेपोलिस में 25 मई को जॉर्ज फ्लोल्ड (40) को पुलिस ने गोलीबारी के आरोप में गिरफ्तार किया था। एक पुलिस अफसर ने उसे सड़क पर दबोचा और अपने घुटने से उसकी गर्दन को करीब 9 मिनट तक दबाए रखा। थोड़ी देर में उसकी हरकत बंद हो जाती है। उसे अस्पताल ले जाया जाता है। डॉ। कहते हैं कि उनकी मृत्यु हो गई है। फ्लोल्ड के हाथों में हथकड़ी थी। वह गुहार लगाता रहा, लेकिन पुलिस वाले ने घोना को नहीं रोका।

प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को भी विरोध जारी रखा। कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया।

प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को भी विरोध जारी रखा। कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया।

फ़्लाइटल के समर्थन में जानकर विरोध

फ्लोल्ड की मौत के बाद इस घटना का जोरदार विरोध हुआ। अकेले अमेरिका में ही 140 शहरों में प्रदर्शन हुआ। सरकार को 40 शहरों में कर्फ्यू लगाना पड़ा। ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, स्पेन, इटली, ऑस्ट्रेलिया, जापान, डेनमार्क, नीदरलैंड्स, लिथुआनियाई और दक्षिण अफ्रीका में भी हजारों लोग विरोध जताने सड़कों पर उतरे।

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By GAUTAM

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