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बीजिंग / नई दिल्लीएक घंटा पहले

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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ इमरान खान। चीन और पाकिस्तान सीपैक को जल्द पूरा करना चाहते हैं। इसके लिए अफगानिस्तान को साथ लाने की कोशिश हो रही है। हालाँकि, अफगान सरकार ने अब तक इस बारे में कुछ नहीं कहा है। (फाइल)

  • चीन, पाकिस्तान, नेपाल और अफगानिस्तान के विदेश मंत्रियों ने सोमवार को समूह बैठक की
  • यह चीन की पहल पर हुआ, लेकिन इसकी आड़ में वह भारत को पड़ोसियों से अलग करना चाहता है

चीन कोरोना महामारी की आड़ में भारत को अपने पड़ोसियों से अलग करने की जानकारी रच रहा है। सोमवार को चीन के विदेश मंत्री ने नेपाल, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की। इसके बहाने वह भारत को इन देशों से दूर करना चाहते हैं। इस बैठक में बांग्लादेश और म्यांमार के अलावा श्रीलंका शामिल नहीं हुए। हालांकि, यह साफ नहीं है कि इन देशों को बैठक में शामिल होने का न्योता दिया गया था या नहीं।

सीपैक पर नजर
बैठक का एजेंडा भले ही कोविड -19 की रोकथाम बताया गया हो, लेकिन चीन ने अपने इरादे साफ कर दिए। उसके विदेश मंत्री रेखा ने कहा- चारों देशों को मिलकर सीपैक का निर्माण पूरा करने में मदद करनी चाहिए। यह अफगानिस्तान तक ले जाना इन सभी देशों के लिए फायदेमंद होगा। चीन ने चार प्वॉइंट्स वाला एक प्लान भी पेश किया। ये सभी में सीपैक और वन बेल्ट वन रोड का जिक्र है।

भारत को दूर रखा गया
भारत को इस बैठक से दूर रखा गया। पाकिस्तान के कागज द ट्रिब्यून के मुताबिक, इसकी वजह यह है कि भारत ने हमेशा सीपैक का विरोध किया है और चीन को यह नगवार गुजरता है। नेपाल और अफगानिस्तान भी इस क्षेत्र के छोटे लेकिन महत्वपूर्ण देश हैं। हालांकि, दोनों ही सीपैक का हिस्सा नहीं हैं। दरअसल, चीन दक्षिण एशिया में दबदबा कायम करने के लिए को विभाजित -19 के बहाने छोटे देशों को मदद दे रहा है। नेपाल के प्रधानमंत्री का भारत के प्रति संशोधित रुख उसकी मंशा के संकेत दे चुका है।

भारत की हर हरकत पर नजर
भारत इस बैठक में शामिल नहीं हुआ। लेकिन, भारतीय विदेश मंत्रालय इस बैठक पर पैनी नजर बनाए रख रहा है। अब देखना यह है कि भारत इसका जवाब किस तरह देता है। हालांकि, पाकिस्तान और चीन की राह आसान नहीं है। क्योंकि, सार्क के ज्यादातर देश भारत के साथ हैं। अफगानिस्तान पर अमेरिकी गति है। लिहाजा, इस बात की उम्मीद बेहद कम है कि वह चीन के झांसे में आएगी। नेपाल के बारे में भारत सरकार अब तक खामोश है।

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By GAUTAM

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