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  • कोरोनावायरस वैक्सीन ट्रैकर: भारत में पाया जाने वाला पहला ऑक्सफ़ोर्ड एस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन; भारत के बायोटेक और जाइडस कैडिला सहित 29 टीकों के लिए मानव परीक्षण चल रहा है

एक घंटा पहले

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  • चीनी कंपनी सिनोफार्म का दावा- दिसंबर में बाजार में आ जाएगा उसका वैक्सीन
  • कोविक्सीन के साथ डेवलपर हो रहे हैं दूसरे स्वदेशी वैक्सीन के फेज -2 के ट्रायल्स शुरू

कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों के बीच वैक्सीन को लेकर उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के वैक्सीन ट्रैकर के अनुसार, अब 29 वैक्सीन ह्यूमन ट्रायल्स से गुजर रहे हैं। वहीं 138 वैक्सीन प्री-क्लिनिकल टेस्टिंग से गुजर रहे हैं। चीन की सरकारी कंपनी सिनोफार्म का दावा है कि दिसंबर तक उसका वैक्सीन मार्केट में आ जाएगा।

स्वदेशी वैक्सीन बना रहे भारत बायोटेक-आईसीएमआर और गोडस कैडिला के वैक्सीन फेज -2 के ह्यूमन ट्रायल्स में प्रवेश कर चुके हैं। वहीं, खबरें आ रही हैं कि भारत में ऑक्सफ़ोर्ड-एस्ट्राजेनेका का बनाया कोविशील्ड पहले उपलब्ध होगा। इसके भारत में फेज -2 और फेज -3 ह्यूमन ट्रायल्स के लिए भारत के सीरमैडियम ने अनुमति ले ली है।

सबसे पहले बात, चीन के वैक्सीन की … दिसंबर में उपलब्ध हो जाएगी सिनोफार्म का वैक्सीन

  • चीन में कैनसिनो बायोलॉजिक्स के बनाए वैक्सीन को पेटेंट मिल गया है। चीन के नेशनल इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टीज की वेबसाइट पर प्रकाशित डॉक्युमेंट में दावा किया गया है कि महामारी फैलाने पर इस वैक्सीन का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा सकता है।
  • चीन के सरकारी पत्र पीपुल्स डेली की रिपोर्ट के अनुसार यह निर्देशिका 11 अगस्त को जारी हो गई थी। उसी दिन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रूसी वैक्सीन “स्पुतनिक-वी ‘को रजिस्टर करने की घोषणा की।
  • वहीं, चीन के वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ बायोलॉजिकल प्रोडक्ट्स की ओर से विकसित किया जा रहा वैक्सीन दिसंबर में कमर्शियली उपलब्ध हो जाएगा। इसे बना रही कंपनी सिनोफार्म के प्रमुख ने कहा कि वैक्सीन का फेज -3 ट्रायल्स सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
  • सिनोफॉर्म का वैक्सीन 1,000 डॉलर यानी लगभग 10,800 रुपए का होगा। यह दो डोज का है। जिसे 28 दिन के गैप में दिया जाएगा। इसका एक डोज कोरोना के खिलाफ 97% तक प्रोटेक्शन देता है, जबकि दूसरा डोज लगाने पर प्रोटेक्शन 100% हो जाता है।)
  • सिनोफार्म का यह वैक्सीन फेज -1 / 2 ट्रायल्स में सफल रहा है। इसके फेज -3 ट्रायल्स चल रहे हैं। अब तक के टेस्ट में पता चला कि वैक्सीन लगाने के बाद मजबूत उत्पाद रेस्पांस मिला है।

स्वदेशी वैक्सीन का क्या हो रहा है?

  • भारत बायोटेक का कोविक्सीन और गोडस कैडिला का वैक्सीन फेज -1 पूरा कर चुका है। इसके फेज -2 में ह्यूमन ट्रायल्स शुरू हो गए हैं। डब्ल्यूएचओ के ट्रैकर के मुताबिक इस पर तेजी से काम चल रहा है। लेकिन अगले साल ही वैक्सीन मार्केट में जाएगी।
  • वहीं, सीरम डिप्लोमा ऑफ इंडिया ने भारत में ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के कोविशील्ड वैक्सीन के फेज -2 और फेज -3 ट्रायल्स की अनुमति ले ली है। इसके लिए अस्पतालों में वॉलेंटियर्स को आगे आने की अपील की है।
  • हालाँकि, अच्छी बात यह है कि यूके, यूएस और जेस में इसके फेज -3 पहले ही शुरू हो चुके हैं। यानी अगर हमारे यहाँ ट्रायल्स के रिजल्ट नहीं आए तो भी सीरम इंस्टीट्यूट इसे बनाना शुरू कर देंगे। यह वैक्सीन भारत में 225 रुपए में उपलब्ध होगा।

डब्ल्यूएचओ क्या कर रहा है?

  • डब्ल्यूएचओ ने कोविक्स ग्लोबल वैक्सीन फेसिलिटी कार्यक्रम शुरू किया है। इसे डब्ल्यूएचओ ने राईस देशों और नॉन-प्रॉफिट्स से फंड जुटाने के लिए डिजाइन किया है। ताकि जानने में चल रहे वैक्सीन डेवलपमेंट प्रोग्राम को सपोर्ट करते हुए दो बिलियन इफेक्टिव वैक्सीन अलवर को संभव किया जा सके।
  • इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 31 अगस्त की डेडलाइन रखी गई है। डब्ल्यूएचओ के साथ गावी वैक्सीन अलायंस और कोलिशन फॉर एपिडेमिक प्रिपेयर्डनेस इनोवेशंस भी इस प्रोग्राम से जुड़े हैं।
  • कोविक्स एक बड़े प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसे एक्सेस टू टू डिवाइड -19 टूल्स (एसीटी) एक्सीलेटर कहा जा रहा है। यह महामारियों से लड़ने के लिए वैक्सीन, ट्रीटमेंट, डायग्नोस्टिक टेस्ट और अन्य हेल्थकेयर रिसोर्सेज सुनिश्चित कर रहे हैं।
  • अमेरिका, यूके, जापान और यूरोपीय संघ ने कई बिलियन डॉलर खर्च कर वैक्सीन निर्माताओं से डील की है। अमेरिका ने लगभग 11 बिलियन डॉलर की डील्स वैक्सीन को विकसित करने और हिसार करने के लिए की है।

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By GAUTAM

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