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  • निष्कासित नेता ने कहा कि शी जिनपिंग अपनी ही पार्टी में विरोध कर रहे हैं, भारत के साथ विवाद लोगों का ध्यान भटका रहे हैं

इटली का बकरा4 घंटे पहले

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67 वर्षीय जिआ कहती हैं, अब मैं खुलकर बोल सकता हूं। -फाइल फोटो

  • जिनपिंग विरोधी बयानबाजी करने पर सेंट्रल पार्टी स्कूल की प्रोफेसर काआई जिआ पर कार्रवाई की
  • इससे पहले, चीन में सरकार के स्वामित्व वाली रियल एस्टेट कंपनी के पूर्व अध्यक्ष रेन झिकारी को सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी से तटस्थका कर दिया गया।

चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एक मुखर आलोचक को पार्टी से तटस्थका केन्द्र कर दिया। पार्टी की आजीवन सदस्य काइ जिआ ने जिनपिंग पर आरोप लगाया था कि वह चीन के लोगों का आर्थिक और सामाजिक दिक्कतों से ध्यान भटकाने के लिए भारत और चीन के बीच विवाद भड़का रहे हैं।

जिनपिंग का अपना ही पार्टी में विरोध हो रहा है। जिआ ने राष्ट्रपति के लिए अधिकतम दो कार्यकाल वाला नियम बदलने के लिए संविधान में बदलाव पर भी जिनपिंग की कड़ी आलोचना की थी। उनकी ऑड वायरल होने के बाद पार्टी ने यह कार्रवाई की।

जिआ पिछले डेढ़ दशक से चीन के सेंट्रल पार्टी स्कूल में प्रोफेसर थे। जहां पर धनाढ्य और कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं को पार्टी के आदर्शों और सिंध्धांतों की सीख दी जाती है। जिआ ने कहा कि जिन लोगों में मैंने पढ़ाया-सिखाया उन्होंने ही बाहर का रास्ता दिखाया। उनका कहना है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अब राजनीतिक खिचड़ी में बदल गई है।

अमेरिका में बने रहे काई शिया ने कहा कि जिनपिंग की शक्तियां असीमित हैं। कोई उनका विरोध नहीं कर सकता। पर पार्टी में ही अमेरिका के बीच टकराव जैसे मुद्दों पर दबी आवाज में जिनपिंग की आलोचना हो रही है। जिआ ने कहा कि वुहान से कोरोना महामारी पूरे देश-दुनिया में फैली है। मृत्यु के आँकड़ों को भी लेकर भी परिवर्तन छिपाई गए हैं।

जिआ के मुताबिक सत्ताधारी पार्टी दुर्भावना ग्रस्त है, चीन टुकड़ों में बंटा है। पार्टी के नेता आपस में ही विरोधाभासी हैं। ज्यादातर नेता भ्रष्टाचारी हैं, इसलिए वे राष्ट्रपति सहित किसी भी नेता के खिलाफ आवाज नहीं उठा सकते।

आलोचनात्मक नहीं कर पाते जिनपिंग, कार्रवाई होती ही है

जिआ बताती हैं कि जिनपिंग को आलोचना सुनने वाले नहीं हैं। इससे पहले, चीन में सरकार के स्वामित्व वाली रियल एस्टेट कंपनी के पूर्व अध्यक्ष रेन झिकारी को सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी से तटस्थका स्वभाव कर दिया गया था। उन्होंने कोरोना को लेकर जिनपिंग की सार्वजनिक रूप से आलोचना की थी। इसके बाद तिंग्शुआ विश्वविद्यालय में लॉ प्रोफेसर के जांगरून को सरकार की आलोचना में लेख लिखने के कारण 15 जुलाई को बर्खास्त कर दिया गया था।

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By GAUTAM

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