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वॉशिंगटनएक घंटा पहले

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ये फोटो लद्दाख में भारत-चीन सीमा की है। कुछ दिन पहले यहां दोनों देशों के जवानों की आपस में झड़प हो गई थी।

  • अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में चीन की आक्रामकता पर चिंता जाहिर करने के लिए संशोधन किए गए
  • अमेरिका ने कहा- दक्षिण चीन सागर, शेनकाकू इलैंड जैसे विवादित क्षेत्रों में चीन की आक्रामकता चिंता का विषय है

अमेरिका ने एक बार फिर चीन के खिलाफ अपनी सख्त नीतियों को जाहिर कर दिया है। अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव (प्रतिनिधित्व सभा) में नेशनल डिफेंस ऑथराइजेशन एक्ट (एनडीएए) में संशोधन के पास कर दिया गया है। भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद एमी बोरा और कांग्रेस के प्रतिनिधियों चिली शैबोट ने संशोधन पेश किया था। अमेरिकी सांसदों ने कहा कि चीन ने कोरोनावायरस का इस्तेमाल ध्यान भातकर भारतीय क्षेत्रों को करने के लिए किया।

भारत और चीन तनाव कम करने के लिए मिलकर काम करते हैं

अमेरिकी सांसदों ने संशोधन में चीन की गलवान में की गई हरकत और दक्षिण चीन सागर में उसकी क्षेत्रीय दादागिरी की सफाई से पर जोर की। संशोधन प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) के पास तनाव को कम करने के लिए भारत और चीन को मिलकर काम करना चाहिए। दक्षिण चीन सागर, शेनकाकू आईलैंड, एलएसी जैसे विवादित क्षेत्रों में चीन की सेना का उग्र रवैया चिंता का विषय है।

अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा- चीन अपना रास्ता बदल दे

अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क टी एस्पर ने कहा कि विवादित क्षेत्रों में चीन की लगातार हरकतें यह बता रही हैं कि वह दक्षिण चीन सागर को लेकर 2002 में हुए समझौतों का पालन नहीं कर रही है। हम उम्मीद करते हैं कि चीन को अपने रास्ते बदल देने चाहिए। हमें निश्चित रूप से विकल्पों के लिए भी तैयार रहना चाहिए ।चीन और भारत के बीच हालात पर भी हम लगातार नजर रख रहे हैं। एलएसी के पास क्या हो रहा है, इस पर भी हमारा दृष्टिकोण है। हमें खुशी है कि दोनों पक्ष मिलकर तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

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By GAUTAM

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