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काबुल19 मिनट पहले

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फोटो जुलाई 2019 में कतर में हुई शांति वार्ता में शामिल तालिबान के अधिकार की है। इसी बैठक में तय हुआ था कि तालिबान और अफगान राहत बढ़ाने के लिए कुछ कदम उठाएंगे। – फाइल फोटो

  • तालिबान ने कहा कि शांति प्रक्रिया तभी बढ़ेगी, जब देश में इस्लामिक सरकार बनाने पर बात होगी
  • अफगानिस्तान के राष्ट्रपति भवन ने कहा- तालिबान ने सिर्फ हमारी ओर पूरा किया

अफगानिस्तान में शांति वार्ता को बड़ा झटका लगा है। अमन अवलोकन के लिए सरकार ने पांच हजार तालिबानी आतंकी रिहा किए। अब कॉरीबन चालू हो गया। उन्होंने अशरफ गनी सरकार को ही मानने से इनकार कर दिया। तालिबान ने कहा- हम इस सरकार को वैध नहीं मानते और न ही इसे मान्यता देते हैं। अमन चेतावनी की कोई भी कोशिश तभी शुरू हो पाएगी जब मुल्क में इस्लामिक सरकार पर बातचीत हो। अफगानिस्तान में हाल ही में 400 आतंकी रिहा किए गए थे। इसी प्रकार साप्ताहिक अवतार में शांति वार्ता होती है। तालिबान भी शामिल होंगे। अफगानिस्तान की न्यूज एजेंसी टोलो न्यूज के मुताबिक- अब तालिबान वादे से पलट गया है। उन्होंने कहा कि इस्लामिक एम्स्टर्डम (कोरिबन) काबुल प्रशासन को सरकार पर विश्वास नहीं है। ये अमेरिका के इसारे और उसके विस्तार के लिए काम करता है।

तालिबानी प्रवक्ता ने कहा- अफगान युद्ध में हम जीत गए
एक इंटरव्यू में तालिबान प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा- अफगानिस्तान युद्ध तालिबान की जीत है। हम अफगान सरकार को मान्यता नहीं देते हैं। शांति वार्ता में केवल शामिल होंगे जब अफगानिस्तान में इस्लामिक सरकार बनाने की बात होगी।

राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा- तालिबान ने जब पूरा किया
तालिबान की प्रोमखिलाफी पर अफगानिस्तान के राष्ट्रपति भवन ने बयान जारी किया। कहा- तालिबान ने सिर्फ लंबा बेकार किया। वे बेकार बहाने बना रहे हैं। सरकार ने 5 हजार कैदियों को छोड़ने का वादा पूरा किया। तालिबान की बारी आई तो वो वादे से मुकर गई।
तालिबानी कैदियों की रिहाई के बारे में फैसला लेने के लिए अशरफ गनी सरकार ने 3200 कबीलाई नेताओं की बैठक की शुरुआत की थी। सभी के सुझाव पर कैदियों को छोड़ा गया था।

अधूरा रह सकता है ट्रम्प का एक और चुनावी प्रोम
तालिबान के इस कदम से डोनाल्ड ट्रम्प का एक और चुनावी वादा अधूरा रह सकता है। दरअसल, ट्रम्प ने नवंबर से पहले अपने सैनिकों को अफगानिस्तान से निकालने की बात कही थी। रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने कहा था कि अफगानिस्तान में नवंबर तक 5 हजार से भी कम अमेरिकी सैनिक रहेंगे। इसलिए वह किसी भी हाल में शांति वार्ता करना चाहते थे। अफगान सरकार ने तालिबानी आतंकवादियों को भी ट्रम्प के दबाव की वजह से ही छोड़ा था।

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By GAUTAM

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