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वॉशिंगटन2 मिनट पहले

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परसेवरेंस में 7 फीट की रोबोटिक आर्म, 19 कैमरे और एक ड्रिल मशीन भी है जो मंगल की सतह के फोटो, वीडियो और नमूनों की है।

  • परसेवरेंस में 1000 किलो का रोवर और लगभग 2 किलो का ड्रोन जैसा छोटा हेलीकॉप्टर
  • इससे पहले 19 जुलाई को यूएई ने और 23 जुलाई को चीन ने अपने-अपने मिशन मंगल ग्रह के लिए प्रस्थान किए हैं

अमेरिका का परसेवरेंसिट मंगल पर गुरुवार को प्रस्थान हो रहा है। यह दुनिया में पिछले 11 दिनों में तीसरे मंगल मिशन है। इससे पहले 19 जुलाई को यूएई ने और 23 जुलाई को चीन ने अपने-अपने मिशन मंगल ग्रह के लिए प्रस्थान किए हैं।

नासा अपना मंगल मिशनवाइ के केप केनेवरल एयरफोर्स स्टेशन से लॉन्च करेगा। मिशन अमेरिकी समय सुबह 7:50 बजे (भारतीय समय में 5:20 बजे शाम) को लॉन्च होगा। 18 फरवरी 2021 को मंगल के जेजेरो क्रेटर पर इसकी जंग होगी। यह मिशन मंगल के समय से एक वर्ष (पृथ्वी के 687 दिन) तक चलेगा। इस मिशन के तहत पहले बार मंगल में एक छोटे हेलिकॉप्टर उड़ाया जाएगा।

मंगल पर पहुंचने की होड़ में मौजूदा तीनों मिशन नए और दिलचस्प उद्देश्यों को लेकर रहे हैं। इनमें पानी की तलाश, वहां ऑक्सीजन बनाने से लेकर इतिहास में पहली बार मंगल पर लघु तरंग उड़ाने के प्रयास तक हैं। जानिए, क्या हैं येकी खासियत और ये वहां और क्या-क्या करने वाले हैं …

परसेवरेंस, अमेरिका: ऑक्सीजन अनुरक्षण, नमूने लेगा और पानी भी खोज

खासियतः परसेवारेंस में दो उपकरण हैं- 1000 किलो का रोवर और लगभग 2 किलो का ड्रोन जैसा छोटा मॉड्यूल, जो रोवर के संपर्क में रहेगा। सोलर पैनल, कार्बन ब्लेड जो गति करेगा और एंटीना। रोवर प्लूटोनियम पावर का इस्तेमाल किया जाएगा, जो लगभग 10 साल चलेगा। इसमें 7 फीट की रोबोटिक आर्म, 19 कैमरे और एक ड्रिल मशीन भी है, जो मंगल की सतह के फोटो, वीडियो और नमूने लेगी।

क्या होगा: कार्बन डाइऑक्साइड से ऑक्सीजन का रखरखाव, मौसम को दर्शाने, जिसका मंगल यात्री सामना करेगा। पानी की खोज। मार्कस एनवमेंटलटल डायनामिक्स एनालाइजर जानकारी देगा कि मंगल के हालात इंसानों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं। तापमान, वायुदाब, रेडिएशन, धूल का अध्ययन करेगा।

तियानवेन -1, चीन: पहला मिशन जो परिक्रमा लगाएगा, लैंड करेगा, रोवर का काम भी करेगा

खासियतः तियानवेन का अर्थ है स्वर्ग से सवाल। वजन 5000 किलो। ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर प्रमुख। पैराशूट जो रोवर को आसानी से उतरने में मदद करेगा। कैमरा, 4 सोलर पैनल। सॉफ्टवर्क के लिए पैराशूट, पथरीली या उथ-खाबड़ सतह पर रुकने और स्पीड कम करने के लिए कैप्सूल और ताजा पानी। होटल शिप, जिसमें 7 रिमोट सेंसिंग उपकरण लगे हुए हैं।

क्या होगा: 2-3 महीने चक्कर काटने। इससे दूर की परिस्थिति पता लग जाएगी और नमामी को रोका जा सकेगा। होटल शिप रिमोट सेंसिंग उपकरणों के माध्यम से मंगल का अध्ययन, पत्थरों की जांच, पानी या बर्फ की तलाश करेगा। पहला मिशन जो मंगल का चक्कर लगाएगा, भूमि करेगा और रोवर का काम भी करेगा।

होप ऑर्बिटर, यूएई: पता करेगा कि मंगल पर मौजूद पानी कैसे और कहां गया

खासियतः यूएई का पहला मंगल मिशन। जापान के तनेगाशिमा अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च। ऊंचाई 6 फीट और वजन लगभग 1360 किलो। गर्मी से बचाने वाले कवच, सोलर पैनल जो लॉन्च के बाद खुद ही फैल जाएंगे और सूरज की रोशनी से चार्ज होते रहेंगे। एंटीना जो धरती से संपर्क करेगा। उनके अलावा तीन उपकरण लगे हुए हैं- हाई-रिजोल्यूशन कैमरा, इनफ्रारेड स्पेक्ट्रो-मीटर और तीसरा अल्ट्रावायलेट स्पेक्ट्रो।

क्या होगा: यह ऑर्बिट में घूमता रहेगा। इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रो-मीटर धूल, बर्फ, बादल, नमी का अध्ययन करेगा। इसी धूल के कारण मंगल का तापमान प्रभावित होता है। हाइड्रोजन, कार्बन मोनो ऑक्साइड और ऑक्सीजन का पता लगाया जाएगा। माना जाता है कि पहले मंगल पर पानी था। होप पता लगाएगा कि उस पानी का क्या हुआ?

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1। जापान के अंतरिक्ष केंद्र से मंगल के लिए सैमसंग भेजे गए

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By GAUTAM

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