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  • श्रीलंका चीन भारत | श्रीलंका के विदेश सचिव जयनाथ केटेज ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत पहली नीति को अपनाएगा

कोलंबोएक घंटा पहले

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श्री के विदेश सचिव जयनाथ कमेजे के मुताबिक, श्री ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा, जो भारत के सुरक्षा अधिकारों के खिलाफ हो। (फाइल फोटो)

  • हम्बनटोटा पोर्ट का इस्तेमाल सिर्फ व्यावसायिक गतिविधियों के लिए होगा
  • 2017 में श्रीलंका ने हम्बनटोटा पोर्ट 99 साल की लीज पर चीन को सौंप दिया था

सीमा विवाद को लेकर चीन के साथ जारी तनाव के बीच श्रीलंका से भारत के लिए अच्छी खबर आई। श्री ने कहा है कि वह अपनी नई विदेश नीति के तौर पर ‘इंडिया फर्स्ट’ अप्रोच ही अपना करेगी। श्री के विदेश सचिव जयनाथ कमेज ने कहा- श्रीलंका में चीन की बढ़ती मौजूदगी हमारे लिए चिंता का विषय है।

राष्ट्रपति राजपक्षे भी ‘भारत फर्स्ट’ के पक्ष में
हेँ आसमान पत्र डेली मिरर को दिए इंटरव्यू में कमेजे ने इशारा किया कि उनकी सरकार चीन के दबाव में नहीं आगी। कमेजा ने कहा- श्रीलंका अपने क्षेत्रीय विदेश संबंधों को लेकर भारत के सबसे बड़े उद्देश्यों को पूरा करेगा। इसका मतलब यह हुआ कि श्रीलंका ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगा, जो भारत के सुरक्षा नियमों के खिलाफ होगा। राष्ट्रपति गोतबया राजपक्षे का भी मानना ​​है। कमेजा 2014-16 के बीच श्री नेवी के शेफ रहे। इसके बाद विदेश नीति समीक्षक बने। कमेज देश के पहले ऐसे विदेश सचिव हैं, जिनकी सेना से सीधा संबंध है।

पोर्ट में निवेश के लिए भारत ही पहली पसंद था
उन्होंने कहा- चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। भारत को छठवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था माना जाता है। 2018 में भारत दुनिया की सबसे तेज उभरती हुई अर्थव्यवस्था थी। इसका मतलब है कि हम दो इकोनॉमिक जाइंट्स (आर्थिक महाशक्तियां) के बीच हैं।
उन्होंने कहा – श्रीलंका ये कभी भी देखने को नहीं मिलेगा कि कोई देश अपने फायदे के लिए भारत जैसे किसी दूसरे देश के खिलाफ हमारा इस्तेमाल करे। हम्बनटोटा के दक्षिणी बंदरगाह में चीनी निवेश पर टिप्पणी करते हुए कमेज ने कहा- हमने पहला प्रस्ताव भारत को ही दिया था। हालात के कारण भारत तब यह नहीं पाया गया था। बाद में यह चीनी कंपनी के पास चली गई।

2017 में 99 साल की लीज पर चीन को सौंपा गया था
हम्बनटोटा पर आगे क्या होगा? इस पर किम्बेज ने कहा- हम्बनटोटा की 85% हिस्सेदारी चीनी मर्चेंट होल्डिंग कंपनी के पास है। लेकिन, इसका इस्तेमाल सिर्फ कमर्शियल एक्ट ग्रेडज के लिए ही किया जा सकता है, कानूनी उपयोग नहीं होगा।

2017 में श्रीलंका ने हंबनटोटा पोर्ट को 99 साल की लीज पर चीन को सौंप दिया था। इसको लेकर भारत को चिंताएं थीं। भारत ने कहा था कि चीन यहां मिलिट्री बेस बना सकता है।

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By GAUTAM

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