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ह्यूस्टन21 मिनट पहले

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शुक्रवार को शाम चार बजे (लोकल टाइम) ह्यूस्टन स्थित चीनी कॉन्सीसुलेट में एफबीआई एजेंट्स दाखिल हुए। दरवाजा खुलवाने के लिए उन्हें मशक्कत करनी होगी। बाद में साझेदारी की तलाशी ली गई। इस दौरान फोरेंसिक टीम भी साथ थी।

  • अमेरिका ने मंगलवार को 72 घंटे में चीन को ह्यूस्टन कॉन्सासुलेट खाली करने के आदेश दिए थे
  • शुक्रवार शाम 4 बजे तक डेडलाइन थी, एफबीआई एजेंट्स पूरे 72 घंटे कॉन्सीसुलेट के बाहर तैनात रहे

अमेरिका ने चीन के खिलाफ रुख और सख्त कर लिया। चीन को मंगलवार को ह्यूस्टन कॉन्सीसुलेट 72 घंटे में बंद करने के आदेश दिए गए थे। शुक्रवार शाम 4 बजे जैसे ही डेडलाइन खत्म हुई, अमेरिकी एजेंटों ने इस बोली में दाखिल हो गए। अंदर मौजूद कुछ लोगों ने गेट नहीं खोला है। इस पर एफबीआई ने उन्हें सूचित किया। इसके बाद के एजेंटों ने दरवाजे की ताकत का इस्तेमाल किया।

हैरानी की बात चीन का रवैया है। वियना कन्वेंशन के मुताबिक, उस तय वक्त में बिल्डिंग का पीसीओवर अमेरिका के अधिकारियों को देना था। लेकिन, जब एफबीआई एजेंट्स वहां पहुंचे तो मेन गेट अंदर से लॉक था। पिछले गेट पर भी हाल ही में थे। लेकिन, टीम ने इसे जबरदस्त खोल दिया। बाद में मेन गेट पर भी ताकत का इस्तेमाल करना पड़ा।

एफबीआई एजेंट्स के बाद स्पेशल फोरेंसिक टीम कॉन्सीसुलेट में दाखिल हुई। इस दौरान मीडिया को काफी दूर रखा गया था। खास बात ये है कि ज्यादातर एजेंटों की वर्दी में नहीं थे।

जिद पर अरा चीन
डिप्लोमैसी के नियमों के तहत चीन को अमेरिका द्वारा दी गई डेडलाइन खत्म होने के पहले कॉन्सीसुलेट खाली करना था। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। कॉन्सासुलेट के हेड काई वेई ने िट द पॉलिटिको ’को दिए इंटरव्यू में ट्रम्प प्रशासन का आदेश मानने से इनकार कर दिया। कहा- ये हमारे विरोध करने का तरीका है। हम खाली नहीं करेंगे हालाँकि, वे खाली पड़ी पड़ी हैं।

एफबीआई के पहले लोकल पुलिस की टीम कॉन्स्युलेट के पिछले दरवाजे पर पहुंची। उन्होंने यहां एक व्यक्ति (सामने की तरफ येलो ट्राउजर) से कुछ देर बातचीत की।

चीन के पक्ष में नहीं चीनी मूल के लोग
कॉन्स्युलेट की तलाशी के वक्त हैरान करने वाली बातें दिखीं। कॉन्सीलेट के बाहर कई चीनी नागरिक जुटे हैं। में अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन किया और चीन के विरोध में बातें कहीं। इनमें से ज्यादातर लोग ताली बजाकर एफबीआई एजेंट्स का हौसला बढ़ा रहे थे। कई लोगों ने पूरी घटना का वीडियो बनाया।

तलाशी के बाद कई बॉक्स बाहर लाए गए। हालांकि, ये क्या था। इसकी जानकारी अब तक सामने नहीं आ सकी है।

यह फोटोग्राफर सामान्य नहीं है। वास्तव में, यह चीन के उस माइंडगेम का हिस्सा है जो उसने कॉन्स्युलेट में खेलने की कोशिश की। चीन भागीदारी के बाहरी हिस्से में कुछ लोगों की मुलाकात हो सकती है, ताकि सब रूटीन लगे रहें। अंदर सबूत मिटाने की हरकतें जारी थीं।

एफबीआई को क्या मिला
अब तक यह साफ नहीं है कि एफबीआई को ह्यूस्टन कॉन्स्टिसुलेट से क्या मिला। हालाँकि, एजेंट्स के दाखिल होने के बाद कई लोगों को लेकर बाहर निकले दिखे। ये लोग लोकल पुलिस डिपार्टमेंट के थे। एफबीआई के साथ फोरेंसिक डिपार्टमेंट की एक विशेष टीम भी आई थी। माना जा रहा है कि इस टीम ने मंगलवार को जलाए गए डॉक्युमेंट्स के क्लस्टर तलाशे। दस्तावेज़ जलाए जाने की घटना के बाद ही कॉन्सीसुलेट पर संभावित हुआ था। इसके बाद यह 72 घंटे में बंद करने के आदेश दिए गए थे।

हर हरकत पर नजर
मंगलवार के बाद से ही कॉन्सीसुलेट के बाहर एफबीआई के एजेंट्स तैनात थे। ये यहाँ होने वाली हर हरकत पर पैनी नजर रखने वाले थे। शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे यहां कई ब्लैक एसयूवी, ट्रक और दो व्हाइट वैन पहुंचीं। चार बजते ही एजेंटों ने जबरदस्ती गेट खोला और ये गाड़ियां भी अंदर दाखिल हो गईं। इस दौरान लोकल पुलिस आउट तैनात थी। तलाशी के बाद बोली को सील कर दिया गया।

यह छोटी सी घटना है
सीएनएन से बातचीत में एक अमेरिकी अफसर ने कहा, “ह्यूस्टन में जो हुआ वह तो छोटी से घटना है। सिंचाई के तार बहुत दूर तक फैले हैं। इसकी जानकारी हमें मिली है। अमेरिका के कम से कम 25 शहरों में जासूसी का नेटवर्क चलाया जा रहा था। कॉन्स्युलेट के कुछ लोग जांच को भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें यह पता होना चाहिए कि हम कितने व्यावसायिक तरीकों से जांच करते हैं।]

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By GAUTAM

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