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  • विश्व फोटोग्राफी दिवस 2020; जोसेफ नाइसफोर नीप्स इतिहास, महत्व महत्व और हम क्यों मनाया जाता है?

40 मिनट पहले

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  • 1826 में पहली बार तस्वीर बनी लेकिन 13 साल बाद इसे फ्रांसीसी सरकार ने मान्यता दी और 19 अगस्त को इस दिन की शुरुआत हुई
  • पहले रंगीन चित्र का श्रेय स्कॉटलैंड के भौतिक शास्त्री क्लर्क मैक्सवेल के नाम है, जिन्होंने एक लाल फीते को डुप्लीकेट किया था।

हर तस्वीर अपने आप में एक इतिहास गढ़ती है। दुनिया की सबसे पहली फोटो का भी अपना 194 साल पुराना इतिहास है। डामर या एसफाल्ट की काली प्लेट पर ली गई इस पहली तस्वीर का किस्सा भी दिलचस्प है। वर्ल्ड फोटोग्राफी डे पर इसी किस्से के बहाने एक नजर डालते हैं तस्वीरों की दुनिया पर और जानते हैं किन लोगों ने हमें फोटो खींचने की मदद की।

क्यों मनाया जाता है यह दिन

साल 1826 में दुनिया की पहली दिखने वाली तस्वीर खींचने का श्रेय जाता है फ्रांस के जुझारू इनवेंटर जोसेफ नाइसफोर और उनके दोस्त लुइस डॉगर को, जिन्होंने अपनी आधी उम्र में इसी तरह काम के लिए समर्पित कर दिया। ये दोनों की फोटो खींचने की इसी उपलब्धि को दुनिया ‘डॉगर’ की पूरी कहती है और इसे सम्मान देने के लिए विश्व फोटोग्राफी डे मनाए जाने का सिलसिला शुरू हुआ।

9 जनवरी, 1839 को फ्रेंच एकेडमी ऑफ साइंसेज ने इस प्रक्रिया की घोषणा की और कुछ महीने बाद, 19 अगस्त, 1839 को फ्रांस सरकार ने इस प्रकिया को बिना किसी प्रस्ताव के दुनिया को उपहार के रूप में देने की घोषणा की। केवल से 19 अगस्त को यह दिन मनाया जाता है।

2020 में इस घटना को 194 साल पूरे हो रहे हैं, इसी मौके पर हम आपके लिए लाए हैं पहली तस्वीर के बनने का किस्सा और फोटोग्राफी को समर्पित महान किरदारों की कहानी –

पूर्वी फ्रांस का कस्बा, वसंत का मौसम और वर्ष 1826

  • 1765 में जन्में जोसेफ नाइसफोर पूर्वी फ्रांस के सैंट-लूप-डे-वैरेनीज कस्बे में रहने वाले थे। एक धनी वकील के बेटे और नेपोलियन की सेना के अफसर रह चुके नाइसफोर एक जब में कॉलेज में साइंस के प्रोफेसर भी पढ़े हुए थे। कला में उनकी दिलचस्पी थी और वे उसमें विज्ञान की मदद से फोटोग्राफी मशीन बनाने में जुटे थे।
  • फोटो म्यूजियम में दर्ज जानकारी के मुताबिक, वह 1926 की वसंत के दिन थे जब जोसफ ने पहली तस्वीर खींची थी। अमूमन फोटो खींचते समय क्या बंदचर करना है, हमें मालूम होता है लेकिन, 1826 में ली गई पहली तस्वीर के साथ कोई फर्क नहीं पड़ा।
  • सैंट-लूप-डे-वैरेनीज कस्बे में अपने दो मंजिला घर की पहली मंजिल की खिड़की के पास खड़े होकर जोसेफ ने अचानक ही एक तस्वीर कैप्चर कर ली और उसमें खिड़की के बाहर का एक दृश्य कैप्चर हो गया है। बस, यह वही इतिहास में दर्ज हो गया है और यह दुनिया की पहली तस्वीर है “ले ग्रस में विंडो से देखें” नाम दिया गया है।
वह 1826 में ली गई वह पहली तस्वीर थी जिसे

वह 1826 में ली गई वह पहली तस्वीर थी जिसे “ले ग्रस में विंडो से देखें” नाम दिया गया था। इसमें कुछ इमारतों के बीच खुली जगह दिखाई दे रही है।

सन्त-लूप-डे-वैरेनीज कस्बे में नाइसफोर की याद में बना एक स्मारक।

सन्त-लूप-डे-वैरेनीज कस्बे में नाइसफोर की याद में बना एक स्मारक।

पहली तस्वीर लेने में 6 साल की तैयारी शुरू हो गई थी

  • पहली तस्वीर को हकीकत में बनाने में जोसेफ नाइसफोर और उनके दोस्त लुइस डॉगर सन् 1820 से मेहनत कर रहे हैं। दोनों ने पहले टिन और तांबे जैसी धातु पर फोटो उतारने की कोशिश की। असफल रहने के बाद बादुमिन-एसफाल्ट यानी डामर का इस्तेमाल किया।
  • दोनों अपने ही घर में अलग-अलग केमिकल्स को प्लेट पर फैलाकर सूरज की किरणों की मदद से फोटो लेने की तकनीक डेवलपर करने में लगे हुए हैं।]दरअसल, 18 वीं सदी में कैमरा तो बन गया था लेकिन असली समस्या फोटो प्लेट की थी जिस पर फोटो को डेवलपर किया जा सकता था।
18 वीं शताब्दी में इस्तेमाल होने वाला ऑब्सक्यूरा नाम का कैमरा। इसी से ली गई पहली तस्वीर थी।

18 वीं शताब्दी में इस्तेमाल होने वाला ऑब्सक्यूरा नाम का कैमरा। इसी से ली गई पहली तस्वीर थी।

  • इसके समाधान निकालने के लिए 1820 में दोनों ने मिलकर डॉगर प्रक्रिया प्रक्रिया ईजाद की। डॉगर शब्द शब्द लुईस डॉगर की सरनेम से बनाया गया है। इसके बाद भी पहली तस्वीर लेने में 6 साल का समय लगा और 1826 में इसकी मदद से पहली तस्वीर बसचर की गई।
  • इस तस्वीर को स्विचर करने में ऑब्सक्यूरा नाम के बड़े से कैमरों की मदद ली गई और पूरी प्रक्रिया में लगभग 8 घंटे लगे रहे। आगे चलकर इस पूरी प्रक्रिया को ल हीलिनीकरण ’नाम दिया गया।
  • डॉगर दुनिया की पहली फोटोग्राफिक प्रक्रिया है जिसका इस्तेमाल 1839 से आम लोगों ने तस्वीरों के लिए किया है। इसमें काफी बड़े कैमरों का इस्तेमाल किया गया था। इसकी मदद से कुछ मिनटों में ही साफ तस्वीर खींची जा सकती थी, लेकिन यह सिर्फ ब्लैक एंड व्हाइट था।
  • लगभग 13 साल बाद फ्रांस सरकार ने उनके इस काम को मान्यता दी और 19 अगस्त 1839 को इस अविश्वास की आधिकारिक घोषणा की गई। अल की बात यह थी कि इसके 6 साल पहले ही जोसेफ दुनिया को अलविदा कह गए थे।
लुइस ने फोटोग्राफी पर अपना प्रयोग जारी रखा, 1838 में दुनिया की पहली ऐसी तस्वीर ली जिसमें लोग नजर आए। इसे फ्रांस के बॉलेवार्ड डू टेंपल से लिया गया था।

लुइस ने फोटोग्राफी पर अपना प्रयोग जारी रखा, 1838 में दुनिया की पहली ऐसी तस्वीर ली जिसमें लोग नजर आए। इसे फ्रांस के बॉलेवार्ड डू टेंपल से लिया गया था।

ऐसी ली दुनिया की पहली रंगीन तस्वीर बन गई

  • काले और सफेद तस्वीर सामने आने के बाद रंगीन फोटो लेने की जद्दोजहद शुरू हुई। इसे तैयार करने में बाजी मारी स्कॉटलैंड के भौतिकशास्त्री जेम्स क्लर्क मैक्सवेल ने कहा। इलेक्ट्रोमैगनेटिक फील्ड से परिचय कराने वाले महान वैज्ञानिकानी मैक्सवेल 1955 से ही रंगीन तस्वीर को तैयार करने की थ्री-कलर बोरिसिस प्रक्रिया पर काम कर रहे थे।
  • मैक्सवेल को यह बात का अंदाजा था कि इंसानी आंख में रंगों की पहचान के लिए विशेष कोशिकाएं कोन्स होती हैं और इस पहचान में रोशनी की बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी के आधार पर उन्होंने अपने प्रयोग किए।
  • इस काम में सिंघल लेंस रिफ्लेक्स कैमरा के एक्सप्लोररक थॉमस सुटन ने भी उनकी मदद की और अलग-अगल रंगों की फोटो प्लेट पर सेंसेट कैंसर के हिसाब से फोटो उतारने की एक प्रक्रिया सेट की।
  • मैक्सवेल ने 17 मई 1861 में दुनिया की पहली रंगीन तस्वीर रॉयल सोसायटी में दुनिया के बड़े इनवेंटर के सामने पेश की। यह तस्वीर स्कॉटलैंडलैंड में प्रसिद्ध टार्टन रिबन की थी और इसमें लाल, नीले और पीले रंग का नजर आ रहा था, जिसे इन तीनों रंगों के फिल्टर की मदद से प्लेट पर उतारा गया था।
  • फोटो लेने की यह प्रक्रिया ब्लैक एंड व्हाइट फोटो की हील शोधन पूरी से प्रेरित थी। इसमें कलर फिल्टर की मदद से एक बार में एक रंग की तस्वीर ली जाती थी और फिर सभी रंगों की तस्वीरों को सुपरइम्पोज करके एक पूरी तस्वीर बनाई जाती थी। ये बड़ी पेचीदा और लंबी प्रक्रिया थी, जो आगे चलकर लेंस और कैमराल्स के प्राप्तकर्ता का कारण बनी।
दुनिया की पहली रंगीन तस्वीर, जिसे जैम्स क्लार्क मैक्सवेल ने 1861 में कैप्चर किया था।

दुनिया की पहली रंगीन तस्वीर, जिसे जैम्स क्लार्क मैक्सवेल ने 1861 में कैप्चर किया था।

फोटोग्राफी की दुनिया के 3 सबसे बड़े इनवेंटर्स

1. जोसेफ नाइसफोर

  • जोसेफ के पिता बड़े वकील और भाई शोधकर्ता थे जो बाद में इंग्लैंड चले गए। कॉलेज में पढ़ाई और बाद में बतौर प्रोफेसर काम करने के दौरान उनके अंदर प्रयोग करने में रुचि जागी।
  • फ्रेंच आर्मी में नेपोलियन के नेतृत्व में जोसेफ ने बतौर स्टाफ ऑफिसर इटली और सार्डिनिया के द्वीपों पर दिया दीं। लेकिन, इस दौरान वे बीमार रहने लगे और उन्हें सेना से इस्तीफा देना पड़ा।
  • 1795 में रिजफा देने के बाद अपने भाई क्लॉड के साथ विज्ञान में पुन: प्रयोग शुरू किया और कई वर्षों तक फोटोग्राफी प्लेट डेवलपमेंट की प्रक्रिया पर काम किया।
  • 5 जुलाई 1833 को स्ट्रोक के कारण इनकी मौत हुई। जहां पर उसने पहली फोटो उतारने का प्रयोग किया था, वहीं से कुछ दूरी पर उन्हें दफनाया गया।
  • मृत्यु के बाद उनके बेटे इसिडोरे ने लुइस के साथ मिलकर काम किया और सरकार की ओर से उनके पिता की याद में पेंशन मिलना शुरू हुई।

2. लुइस डॉगर: इन्हीं के नाम पर फोटोग्राफी की पहली पूरी ‘डॉगर पेंटिंग’ है

  • लुइस एक वास्तुकार और निर्माता डिजाइनर होने के साथ दुनिया के पहले पैनोरमा पेंटर भी कहे जाते हैं।
  • जोसेफ नाइसफोर के साथ इनकी दोस्ती 1819 में हुई, दोनों ने 14 साल साथ काम किया।
  • लुइस की लगातार मेहनत का नतीजा था कि दोस्त जोसेफ की याद में सरकार ने पेंशन जारी की।
  • लुइस ने अपने प्रयोग को आगे बढ़ाने के लिए केंद्रीय इंवेस्टर्स के साथ मिलकर फंडिंग की कोशिश की लेकिन नाकाम जीबी रहे।
  • लुइस ने फैसला किया कि अपनी उपलब्धि को लेकर वह जनता के बीच जाएगी। अंतत: फ्रांसीसी सरकार ने इनकी प्राप्ति को सम्मान के तौर पर दर्ज किया गया।

जेम्स क्लार्क मैक्सवेल: पहला रंगीन फोटो इन्हीं की देन है

  • भौतिकशास्त्री जेम्स क्लार्क मैक्सवेल का जन्म स्कॉटलैंड के एडनबर्ग में हुआ था। 1865 में इलेक्ट्रोमैगनेटिक थ्योरी मैक्सवेल ने ही दी थी।
  • बेहद कम उम्र में मैक्सवेल को लम्बी-लम्बी कविताएं पढ़ने का शौक था। एक बार जिस कविता को पढ़ा जाता था, उन्हें याद हो जाता था।
  • इसी खूबी को देखकर इनकी माँ ने मैक्सवेल की पढ़ाई पर विशेष ध्यान देना शुरू किया।
  • मैक्सवेल को पढ़ाई के लिए एडनबर्ग एकेडमी भेजा। वहाँ पर केवल 13 साल की उम्र में एक ही साल में उन्होंने गणित, अंग्रेजी और पोएट्री तीनों में मेडल हासिल किया।
  • महज 14 साल की उम्र में जर्नल के लिए अपना साइंटिफिक पेपर लिखा, जिसमें उन्होंने मैथमेटिकल कर्व के बारे में नई रिपोर्ट लिखी।

अब प्राप्त करें ‘फादर ऑफ वाइल्डलाइफ फोटाग्राफी’ जॉर्ज शिरस III से

  • अमेरिका के पेनसिल्वेनिया में जेंमेंट जॉर्ज शिरस पेशे से वकील और नेता के साथ प्रसिद्ध शिकारी हुआ करते थे। इसी दौरान उन्हें जानवरों की तस्वीरें खींचने का शौक हुआ।
  • जंगलों में घूमते-घूमते जॉर्ज पूरी तरह से वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी में रम गए। आगे चलकर वह वन्यजीवों के रक्षक बन गए और जीवन जंगल और जानवरों को समर्पित कर दिया।
  • जॉर्ज ने ही सबसे पहले 1889 के में कैमरा ट्रैप और फ्लैश फोटोग्राफी का इस्तेमाल वन्य जीवों के फोटो खींचने के लिए किया था।
  • अमेरिका की मिशिगन झील और उसके आसपास उनके खींचे गए ब्लैंक और व्हाइट फोटो आज दुनिया की धरोहर है।
  • नेशनल जियोग्राफिक ने जॉर्ज शिरस को “वन्यजीव फोटोग्राफी के जनक” नाम दिया है। उनका 2400 ग्लास नेगेटिव का पूरा कलेक्शन नेशनल जियोग्राफिक के पास सुरक्षित है।
  • नेशनल जियोग्राफिक ने जॉर्ज के सम्मान में एक किताब “इन द हार्ट ऑफ द डार्क नाइट” प्रकाशित की है।

आखिर में, कहानी कि पहली सेल्फी की जिसकी आज सभी दीवाने हैं

यह दुनिया की पहली सेल्फी है जिसमें इसे लेने वाले रॉबर्ट कॉर्नेलियस नजर आ रहे हैं।

यह दुनिया की पहली सेल्फी है जिसमें इसे लेने वाले रॉबर्ट कॉर्नेलियस नजर आ रहे हैं।

  • दुनिया की पहली सेल्फी लेने का श्रेय अमेरिका के युवा चरित्र और फोटोग्राफी के दीबेन रॉबर्ट कॉर्नेलियस को जाता है। रॉबर्ट के पिता का सिल्वर प्लेट बनाने का कारोबार था जिसका फोटो डेवलपर करने में इस्तेमाल होता था।
  • जिस साल फ्रांस सरकार ने फोटोग्राफी की प्रक्रिया दुनिया को तोहफे में दी, उसी साल यह कारनामा हुआ। वह 1839 का एक दिन था, फिलाडेल्फिया शहर के केंद्र में स्थित चेस्टनट स्ट्रीट पर युवा रॉबर्ट कॉर्नेलियस एक कैमरे के लेंस के सामने खड़े थे।
  • उस समय तस्वीर लेने में कई मिनट का वक्त लगता है तो उन्होंने अचानक ही कैमरा सेट किया और लेंस की कैप निकाली और क्लिक बटन दबाकर उसके सामने दौड़कर फ्रेम में खड़े हो गए।
  • बस, यही दुनिया की पहली सेल्फी जो दौड़कर ली गई थी और आगे चलकर इसे स्ट फर्स्ट लाइट पिक्चर ’का सम्मान मिला।
  • जॉर्ज के देखादेखी उस समय कई लोग ये प्रयोग करने लगे थे, हालांकि उस समय सेल्फी शब्द चलन में नहीं था। कहा जाता है कि सेल्फी शब्द सिर्फ 18 साल पुराना है और यह पहली बार 2002 में ऑस्ट्रेलिया में एक लड़के ने सेल्फ पोट्रेट फोटो के लिए इस्तेमाल किया था।

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By GAUTAM

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